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दूरी और जेब खर्च से बचने को पेड़ की छांव में एक-दूसरे के बाल संवार रहे सरगुजा के युवाछत्तीसगढ़
23 सित॰ 2026, 5:24 pm (2 दिन पहले)· 1

दूरी और जेब खर्च से बचने को पेड़ की छांव में एक-दूसरे के बाल संवार रहे सरगुजा के युवा

सैलून की 15 से 16 किलोमीटर की दूरी और पेट्रोल के खर्च से बचने के लिए सरगुजा के पैगा गांव के युवाओं ने पेड़ के नीचे बाल काटने की अनूठी देसी व्यवस्था तैयार की है।

छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग में ग्रामीण युवाओं ने सैलून जाने की लंबी दूरी और जेब पर पड़ने वाले अतिरिक्त खर्च से निपटने के लिए एक व्यावहारिक देसी उपाय खोज निकाला है। पैगा गांव के युवा अब नियमित रूप से किसी महंगे हेयर कटिंग सैलून जाने के बजाय गांव में लगे आम के पेड़ की छांव में बैठकर एक-दूसरे के बाल संवार रहे हैं। यह साझा प्रयास न केवल समय और पैसे की सीधी बचत कर रहा है, बल्कि पारंपरिक आत्मनिर्भर जीवनशैली और पूर्वजों की पुरानी पद्धतियों की जीवंत मिसाल भी पेश करता है।

आदिवासी विरासत और आधुनिक सैलून की चुनौतियों के बीच आत्मनिर्भरता

सरगुजा संभाग मुख्य रूप से आदिवासी बहुल क्षेत्र है, जहां ग्रामीण समाज आज भी अपनी सांस्कृतिक विरासत और परस्पर सहयोग की परंपराओं से गहराई से जुड़ा हुआ है। आधुनिक दौर में कस्बों और शहरों में बड़े सैलून खुल चुके हैं, लेकिन दूरदराज के इलाकों में रहने वाले युवाओं के लिए वहां तक पहुंचना हमेशा आसान नहीं होता। इसी को ध्यान में रखते हुए गांव के युवकों ने बाहर जाने के बजाय खुद ही यह हुनर सीखने और आपस में एक-दूसरे की मदद करने का फैसला किया।

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सैलून में कारीगरों को देख-देखकर सीखा बाल तराशने का काम

पैगा गांव के निवासी बिरीजेंद्र मझवार ने इस पूरी पहल की जानकारी साझा करते हुए बताया कि उन्होंने और उनके साथी युवाओं ने कभी कोई औपचारिक प्रशिक्षण नहीं लिया। उन्होंने जब भी कभी सैलून का रुख किया, वहां कारीगरों को बाल काटते हुए ध्यान से देखा और धीरे-धीरे इस बारीक हुनर को खुद ही सीख लिया। अब उन्हें नियमित बाल कटवाने के लिए गांव छोड़कर दूर जाने की बिल्कुल जरूरत महसूस नहीं होती।

तीन हेयर स्टाइल में माहिर और आपसी सहयोग का नियम

बिरीजेंद्र मझवार ने बताया कि वे और उनके साथी अब मुख्य रूप से तीन तरह की हेयर कटिंग आसानी से कर लेते हैं, जिनमें सामान्य साधारण कटिंग, डिजाइन वाली विशेष कटिंग और खड़े बालों वाला आधुनिक स्टाइल शामिल है। गांव में जिस भी साथी को बाल कटवाने की जरूरत होती है, अन्य युवा तुरंत कैंची थाम लेते हैं। इस पूरे काम में कोई पैसा नहीं लिया जाता, बल्कि जिसकी कटिंग की जाती है, वह भी बाद में मौका मिलने पर दूसरे साथी के बाल काटकर इस सहयोग को आगे बढ़ाता है।

15 से 16 किलोमीटर की दूरी और पेट्रोल के खर्च से राहत

सैलून जाने से परहेज करने की मुख्य वजह बताते हुए युवा ने स्पष्ट किया कि उनके गांव से नजदीकी सैलून लगभग 15 से 16 किलोमीटर दूर स्थित है। इतनी दूर जाने पर आने-जाने में लंबा समय तो बर्बाद होता ही है, साथ ही मोटरसाइकिल में लगने वाले पेट्रोल का खर्च भी जेब पर भारी पड़ता है। कभी-कभार किसी खास अवसर पर वे सैलून चले जाते हैं, लेकिन सामान्य दिनों में गांव में ही पेड़ की छांव का यह देसी इंतजाम उनकी पहली पसंद रहता है।

छोटे आईने से पीछे की निगरानी और दाढ़ी बनाने की नई तैयारी

इस देसी सैलून में किसी बड़े आधुनिक शीशे या कीमती उपकरणों का कोई तामझाम नहीं है। बाल काटते समय सिर के पिछले हिस्से को देखने के लिए युवा हाथ में एक छोटा सा आईना पकड़ते हैं और उसी के सहारे सही कटिंग सुनिश्चित करते हैं। बिरीजेंद्र मझवार ने बताया कि अभी उन्होंने दाढ़ी सेट करने का काम नहीं सीखा है, लेकिन आने वाले दिनों में वे इस हुनर को भी सीखने का पूरा प्रयास करेंगे ताकि पूरी तरह आत्मनिर्भर बन सकें।

सवाल-जवाब

सरगुजा के पैगा गांव के युवा कहां बैठकर एक-दूसरे के बाल काटते हैं?
पैगा गांव के युवा आम के पेड़ की छांव में बैठकर एक छोटे से आईने के सहारे एक-दूसरे के बाल काटते हैं।
गांव के युवाओं ने बाल काटने का यह हुनर कैसे सीखा?
बिरीजेंद्र मझवार के अनुसार उन्होंने और उनके साथियों ने सैलून में कारीगरों को काम करते हुए देखकर धीरे-धीरे यह हुनर सीखा।
गांव से नजदीकी सैलून कितनी दूरी पर स्थित है?
गांव से नजदीकी सैलून लगभग 15 से 16 किलोमीटर दूर स्थित है।
युवा किन-किन हेयर स्टाइल में कटिंग करने में सक्षम हैं?
वे मुख्य रूप से तीन तरह की कटिंग कर लेते हैं, जिनमें साधारण कटिंग, डिजाइन वाली कटिंग और खड़े बालों की कटिंग शामिल है।
क्या इन युवाओं ने दाढ़ी सेट करने का काम भी सीख लिया है?
बिरीजेंद्र ने स्पष्ट किया कि उन्होंने अभी दाढ़ी सेट करना नहीं सीखा है, लेकिन आगे वे इसे सीखने का प्रयास करेंगे।
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टिप्पणियाँ 5

Ravikash Gupta@ravikash·1 दिन पहले

16 किमी दूर सैलून जाने से तो अच्छा है यही देसी जुगाड़, पैसे और पेट्रोल दोनों की बचत।

Pooja Bhatt@pooja-bhatt·1 दिन पहले

रविकेश जी, बात तो सही है। आज के समय में पैसे बचाने के साथ पैदल चलना या ऐसा शारीरिक श्रम सेहत के लिए भी बहुत बढ़िया है।

Rohan Verma@rohan-verma·1 दिन पहले

पेड़ की छांव में बाल संवारते इन लड़कों को देखकर मुझे अपनी पुरानी रिपोर्टिंग के दिन याद आ गए। जब भी कभी दूरदराज के गांवों में जाना होता था, ऐसे ही असली भारत के दर्शन होते हैं।

Arjun Mehta@arjun-mehta·1 दिन पहले

रोhan जी, पुरानी यादें ठीक हैं पर क्या सच में बिना सीखे इतने स्टाइल बन जाते हैं? मुझे थोड़ा शक है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 दिन पहले

15 किलोमीटर दूर सैलून जाने से तो अच्छा है यही देसी जुगाड़। पेट्रोल के पैसे और समय दोनों बच रहे हैं, ऊपर से दोस्त भी आपस में मजे से बाल काट लेते हैं।

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