चंडीगढ़ में दाखिल होने वाले मुख्य प्रवेश मार्गों में से एक पर पंजाब से आए सैकड़ों किसानों ने मंगलवार से अनिश्चितकालीन तंबू गाड़ दिए हैं। संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के नेतृत्व में शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन 7 सितंबर तक चलेगा। किसान सभी फसलों के लिए डॉ. स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट के अनुसार कानूनन गारंटीकृत न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) लागू करने की मांग पर अड़े हैं। किसी भी संभावित कानून-व्यवस्था की समस्या को रोकने के लिए चंडीगढ़ पुलिस और पंजाब पुलिस ने सीमावर्ती इलाकों में भारी सुरक्षा बल तैनात कर दिया है।
हवाई अड्डा मार्ग पर जमावड़ा और व्यवस्था
प्रदर्शनकारी किसानों ने शहीद भगत सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की तरफ जाने वाले अत्यधिक व्यस्त राजमार्ग के एक हिस्से पर अपने ट्रैक्टर-ट्रालियों की लंबी कतारें खड़ी कर दी हैं। आंदोलनकारियों ने अपने रहने और खाने के लिए सड़क किनारे ही अस्थाई तंबू और लंगर की व्यवस्था तैयार की है। राशन सामग्री और जरूरी सामान से लदे वाहनों के साथ दूर-दराज के गांवों से किसानों के पहुंचने की प्रक्रिया जारी है, जिससे शाम तक भीड़ में व्यापक बढ़ोतरी होने का अनुमान है।
चंडीगढ़ प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करने और सभा आयोजित करने के लिए सेक्टर 48 में एक स्थान आवंटित किया है, जहां एक विशाल मंच का निर्माण भी किया गया था। हालांकि किसानों को दो लेन वाले मुख्य मार्ग के केवल एक हिस्से में अपने वाहन खड़े करने की सहमति दी गई है, फिर भी सात दिनों तक चलने वाले इस आंदोलन के कारण हवाई अड्डे की ओर यात्रा करने वाले आम लोगों और यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।
किसान संगठनों की मुख्य मांगें
चंडीगढ़ सीमा पर जारी इस बड़े विरोध प्रदर्शन में एसकेएम के तहत 32 किसान संगठन हिस्सा ले रहे हैं। इनमें मुख्य रूप से भारतीय किसान यूनियन (राजेवाल), कीर्ति किसान यूनियन और पंजाब किसान यूनियन जैसे प्रमुख संगठन शामिल हैं। एमएसपी की कानूनी गारंटी देने के अलावा, किसान मांग कर रहे हैं कि पंजाब विधानसभा का एक विशेष सत्र बुलाया जाए जिसमें राज्य के नदी जल बंटवारे से संबंधित पिछले सभी अंतरराज्यीय समझौतों को निरस्त किया जाए।
इसके अतिरिक्त, किसान संगठन भाखरा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) में पंजाब राज्य का प्रतिनिधित्व बहाल करने, केंद्र सरकार के बांध सुरक्षा अधिनियम को रद्द करने तथा 2024 के आपदा प्रबंधन अधिनियम को वापस लेने की पुरजोर मांग कर रहे हैं।
बीकेयू उग्राहन का अलग आंदोलन और यातायात प्रबंधन
हालांकि एसकेएम का सहयोगी संगठन होने के बावजूद बीकेयू (उग्राहन) चंडीगढ़ में हो रहे इस प्रदर्शन का हिस्सा नहीं है। इसके स्थान पर बीकेयू उग्राहन ने 30 अगस्त से ही पंजाब के 17 जिलों में उपायुक्त कार्यालयों के बाहर अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन धरना दे रखा है। बीकेयू उग्राहन की मांगों में भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को रद्द करना, पंजाब सरकार की लैंड पूलिंग नीति को खत्म करना, पट्टेदार किसानों के मालिकाना अधिकारों को प्रभावित करने वाले नियमों को समाप्त करना और किसानों व कृषि मजदूरों का संपूर्ण कर्ज माफ करना शामिल है।
यातायात प्रबंधन के बारे में जानकारी देते हुए मोहाली की उपायुक्त कोमल मित्तल ने बताया कि प्रशासनिक अधिकारी सड़क के एक हिस्से को खुला रखकर दोतरफा वाहनों की आवाजाही सुचारू बनाए रखने का प्रयास कर रहे हैं ताकि यात्रियों और स्थानीय निवासियों को न्यूनतम असुविधा का सामना करना पड़े।



















