राजस्थान के ऐतिहासिक शहर बूंदी में हाड़ौती अंचल की प्रसिद्ध मेलों की परंपरा का श्रीगणेश करने वाले कजली तीज महोत्सव का आगाज आज भव्य शोभायात्रा के साथ होने जा रहा है। शौर्य और वीरता की समृद्ध विरासत के लिए पहचाने जाने वाले इस पारंपरिक आयोजन को लेकर पूरे शहर में अभूतपूर्व उत्साह और उल्लास का माहौल देखा जा रहा है। कुल पंद्रह दिनों तक चलने वाले इस वृहद मेले में स्थानीय निवासियों के साथ-साथ आसपास के विभिन्न क्षेत्रों से भी भारी संख्या में पर्यटकों और श्रद्धालुओं के पहुंचने की पूरी उम्मीद जताई गई है।
बालचंद पाड़ा से निकलेगी तीज माता की शाही सवारी
इस भव्य महोत्सव के मुख्य आकर्षण के रूप में तीज माता की पारंपरिक शोभायात्रा बालचंद पाड़ा से पूरी शान-शौकत के साथ रवाना होगी। यह शाही सवारी शहर के तमाम मुख्य मार्गों और चौराहों से गुजरती हुई अंत में कुंभा स्टेडियम के पास स्थित मेला प्रांगण में पहुंचेगी। दो दिनों तक चलने वाले इस जुलूस और दर्शन कार्यक्रम के दौरान शहर के अलग-अलग हिस्सों में खड़े श्रद्धालु और आम नागरिक तीज माता के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करेंगे। इस पारंपरिक शोभायात्रा में क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों, जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों और आम जनता की सक्रिय भागीदारी देखने को मिलेगी।
उत्सव के रंग में रंगा पूरा शहर और उमड़ेगी भीड़
शोभायात्रा के आगमन को लेकर बूंदी के नागरिकों में जबरदस्त क्रेज है और रास्ते के तमाम प्रमुख मार्गों पर तीज माता के भव्य स्वागत के लिए विशेष तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। महिलाओं, पुरुषों, युवाओं और बच्चों में माता की एक झलक पाने की भारी उत्सुकता है। जुलूस के गुजरने के दौरान श्रद्धालु पलक-पावड़े बिछाकर माता का अभिनंदन करेंगे और उनके दर्शन कर नमन करेंगे। शहर के मुख्य बाजारों और पारंपरिक रास्तों पर इस दौरान मेले की अनूठी रौनक और सजावट देखने को मिलेगी जो हर किसी का मन मोह लेगी।
रोजगार और मनोरंजन का बड़ा माध्यम बनेगा मेला
कजली तीज का यह प्रसिद्ध आयोजन केवल धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था का केंद्र ही नहीं है, बल्कि यह स्थानीय स्तर पर आजीविका और रोजगार का भी एक बहुत बड़ा जरिया साबित होता है। पंद्रह दिनों की लंबी अवधि तक चलने वाले इस मेले में तरह-तरह के झूले-चकरी, विभिन्न उपभोक्ता वस्तुओं की दुकानें, लजीज व्यंजनों के स्टॉल और मनोरंजन के ढेरों साधन लोगों के विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगे। इस आयोजन से न केवल दुकानदारों को बल्कि स्थानीय लोक कलाकारों और अन्य विधाओं से जुड़े कलाकारों को भी अपनी कला का प्रदर्शन करने और कमाई के बेहतरीन अवसर प्राप्त होंगे।
हाड़ौती की संस्कृति की अनूठी पहचान
बूंदी का यह कजली तीज महोत्सव हाड़ौती संभाग की प्राचीन सांस्कृतिक और लोक परंपराओं के साथ गहराई से जुड़ा हुआ है। ऐसी मान्यता है कि इसी बड़े आयोजन के साथ हाड़ौती क्षेत्र में मेलों के लंबे सिलसिले की आधिकारिक शुरुआत होती है। हर साल देश और दुनिया से बड़ी संख्या में लोग इस सांस्कृतिक उत्सव का हिस्सा बनते हैं। इस महोत्सव के दौरान धार्मिक आस्था के साथ-साथ लोक संस्कृति, पारंपरिक कला और आधुनिक मनोरंजन का एक अद्भुत संगम देखने को मिलता है, जिसे लेकर इस बार भी शहरवासियों में भारी उत्साह बना हुआ है।





















