फ्रांस के एवियन शहर में होने वाले G7 शिखर सम्मेलन से ऐन पहले कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। White House ने आधिकारिक तौर पर साफ कर दिया है कि अगले हफ्ते फ्रांसीसी धरती पर पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump आमने-सामने बैठेंगे। इसे दोनों नेताओं की इस साल की पहली प्रत्यक्ष मुलाकात माना जा रहा है, क्योंकि इससे पहले 2025 फरवरी में पीएम मोदी के अमेरिका दौरे के दौरान दोनों मिले थे। बीच के महीनों में फोन पर तो कई बार बातचीत होती रही, लेकिन एक ही टेबल पर बैठकर बात अब होने जा रही है।
कब और कहां होगी यह मुलाकात
पीएम मोदी अपनी पांच दिवसीय फ्रांस और स्लोवाकिया यात्रा शुरू कर चुके हैं। इसी क्रम में वे 15 से 17 जून तक एवियन-लेस-बैंस शहर में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे और इसी दौरान Donald Trump के साथ अलग से द्विपक्षीय बातचीत करेंगे। हाल के दिनों में भारत और अमेरिका के बीच रिश्तों में आई नाजुकी को देखते हुए यह बैठक एक अहम मोड़ साबित हो सकती है। एजेंडे पर सिर्फ शिष्टाचार नहीं, बल्कि व्यापार समझौता, रक्षा सौदा, H-1B वीजा और वेनेजुएला के तेल जैसे ठोस और संवेदनशील मुद्दे रहेंगे।
व्यापार समझौते पर पिघलती बर्फ
पिछले कुछ समय से दोनों देशों के बीच टैरिफ को लेकर तनातनी चल रही थी, लेकिन अब इस मोर्चे पर हालात नरम पड़ते दिख रहे हैं। भारत के वाणिज्य मंत्री Piyush Goyal पहले ही इशारा कर चुके हैं कि दोनों देशों के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते की पहली किस्त जुलाई के मध्य तक अंतिम रूप ले सकती है। भारत इस समझौते में अपने सामान को अमेरिकी बाजार में बढ़त दिलाने वाला प्रिफरेंशियल ट्रेड ट्रीटमेंट चाहता है, और फिलहाल बातचीत ठीक इन्हीं बिंदुओं पर अटकी हुई है। उम्मीद है कि मोदी और Trump की बैठक में इसी गुत्थी को सुलझाने पर जोर रहेगा।
लाखों भारतीय पेशेवरों की निगाहें H-1B वीजा पर
अमेरिका में काम कर रहे हजारों भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स और इंजीनियरों के लिए यह बैठक शायद सबसे ज्यादा मायने रखती है। अमेरिकी प्रशासन लगातार H-1B वीजा के नियम और शर्तें सख्त करता जा रहा है, जिससे भारतीय युवाओं के सामने रोजगार का संकट गहराता जा रहा है। माना जा रहा है कि पीएम मोदी इस मुद्दे को Trump के सामने मजबूती से रखेंगे, क्योंकि H-1B वीजा का सीधा असर अमेरिका में रह रहे भारतीय प्रवासियों और भारत की बड़ी टेक कंपनियों दोनों पर पड़ता है।
क्या वेनेजुएला के तेल से मिलेगी राहत?
होर्मुज जलडमरूमध्य में मचे बवाल ने ऊर्जा बाजार में बेचैनी बढ़ा दी है और तेल आपूर्ति पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। ऐसे में भारत अपनी ऊर्जा जरूरतें पूरी करने के लिए अमेरिका और वेनेजुएला के साथ मिलकर एक ट्राइलेटरल यानी त्रिपक्षीय ऊर्जा सहयोग पर दांव लगाने की तैयारी में है। अगर मोदी और Trump के बीच वेनेजुएला के कच्चे तेल की सप्लाई और उस पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील को लेकर कोई समझ बन जाती है, तो यह भारत के तेल बाजार के लिए बड़ी राहत वाली खबर साबित हो सकती है।













