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एयर इंडिया हादसे की जांच रिपोर्ट पर पायलटों का गंभीर दावा, उठाए 5 बड़े तकनीकी सवालगुजरात
20 जून 2026, 8:28 am (40 दिन पहले)· 3

एयर इंडिया हादसे की जांच रिपोर्ट पर पायलटों का गंभीर दावा, उठाए 5 बड़े तकनीकी सवाल

फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स ने अहमदाबाद में हुए एयर इंडिया विमान हादसे की अंतरिम जांच रिपोर्ट पर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं और स्वतंत्र सिम्युलेटर टेस्ट की मांग की है।

अहमदाबाद में 12 जून 2025 को दुर्घटनाग्रस्त हुई एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 के हादसे की जांच को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) द्वारा जारी की गई अंतरिम रिपोर्ट पर देश के पायलटों के सबसे बड़े संगठनों में से एक, फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (FIP) ने गंभीर सवाल उठाए हैं। FIP का कहना है कि जांच रिपोर्ट में कई ऐसी महत्वपूर्ण तकनीकी कड़ियों को छोड़ दिया गया है जो इस हादसे की वास्तविक वजह का खुलासा कर सकती थीं। संगठन के अनुसार, अगर विमान में हुए इलेक्ट्रिकल फेल्योर से जुड़ी चेतावनियों का पूरा ब्योरा सामने लाया जाता तो जांच की दिशा पूरी तरह बदल सकती थी।

हादसे में जान गंवाने वाले दोनों पायलट अब अपना पक्ष रखने के लिए इस दुनिया में नहीं हैं। इसी वजह से FIP का मानना है कि किसी भी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले हर एक तकनीकी पहलू की गहराई से जांच की जानी बेहद जरूरी है। TrendKia की रिपोर्ट के अनुसार, पायलट संगठन ने इस संबंध में सरकार को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में मांग की गई है कि अंतिम रिपोर्ट को मंजूरी देने से पहले AAIB को स्वयं बोइंग 787 सिम्युलेटर पर व्यावहारिक परीक्षण करने चाहिए। FIP का दावा है कि उनके द्वारा किए गए स्वतंत्र सिम्युलेटर टेस्ट के नतीजे सरकारी ब्यूरो की अंतरिम रिपोर्ट से मेल नहीं खाते हैं।

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बिजली और हाइड्रोलिक सिस्टम के समय में मिला बड़ा अंतर

FIP के अध्यक्ष कैप्टन सी. रंधावा ने एक प्रेस वार्ता के दौरान दावा किया कि यदि विमान के इलेक्ट्रिकल सिस्टम में कोई खराबी आई थी, तो कॉकपिट में कई तरह के चेतावनी संदेश और ऑडियो अलर्ट जरूर आए होंगे। यह सारा डेटा कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) में सुरक्षित होना चाहिए। रंधावा ने आरोप लगाया कि अंतरिम रिपोर्ट में इन चेतावनियों के पूरे घटनाक्रम को शामिल नहीं किया गया है, जिससे जांच की निष्पक्षता पर संदेह पैदा होता है।

इसके साथ ही उन्होंने फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (FDR) को पहुंचे नुकसान पर भी हैरानी जताई। विमान का पिछला हिस्सा अपेक्षाकृत सुरक्षित मिला था, फिर भी उसमें लगा FDR इतनी बुरी तरह क्षतिग्रस्त कैसे हो गया? चूंकि यह रिकॉर्डर पूरी तरह बिजली से चलता है, इसलिए इसकी स्थिति विमान की विद्युत प्रणाली में किसी बड़े फॉल्ट की तरफ इशारा करती है।

FIP ने स्पष्ट किया कि उन्होंने पहले भी AAIB से सिम्युलेटर परीक्षण करने का अनुरोध किया था, लेकिन उसे अनसुना कर दिया गया। इसके बाद संगठन ने खुद बोइंग 787 सिम्युलेटर पर 10 अलग-अलग परीक्षण आयोजित किए। इन परीक्षणों में सामने आया कि इंजन बंद होने के बाद विमान की आपातकालीन बिजली प्रणाली यानी Ram Air Turbine (RAT) को सक्रिय होकर हाइड्रोलिक दबाव बहाल करने में लगभग 18 सेकंड का समय लगता है। इसके विपरीत, AAIB की अंतरिम रिपोर्ट का दावा है कि ईंधन की आपूर्ति बंद होने के महज 4 सेकंड के भीतर ही RAT सक्रिय हो गया था। FIP के अनुसार, 14 सेकंड का यह अंतर मामूली नहीं है और यह हादसे की पूरी टाइमलाइन को बदल सकता है।

‘मिरेकल ऑन द हडसन’ के ऐतिहासिक उदाहरण का हवाला

कैप्टन सी. रंधावा ने इस मामले की गंभीरता को समझाने के लिए साल 2009 के मशहूर ‘मिरेकल ऑन द हडसन’ विमान हादसे का उदाहरण दिया। उस समय अमेरिकी जांचकर्ताओं ने शुरुआत में पायलट कैप्टन चेसली ‘सली’ सलेनबर्गर के फैसले पर संदेह जताया था। हालांकि, बाद में 30 से अधिक सिम्युलेटर परीक्षण किए गए, जिनसे साबित हुआ कि विमान को सुरक्षित रूप से रनवे पर वापस लाना नामुमकिन था। इसके बाद ही पायलट को सम्मानपूर्वक क्लीन चिट दी गई थी।

पायलट संगठन द्वारा उठाए गए 5 प्रमुख सवाल

  • अगर विमान में इलेक्ट्रिकल फेल्योर हुआ था, तो कॉकपिट में आए चेतावनी संदेशों का पूरा विवरण अंतरिम रिपोर्ट में क्यों नहीं दिया गया?
  • कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर में दर्ज संभावित ऑडियो अलर्ट के विवरण को अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया है?
  • विमान का पिछला हिस्सा पूरी तरह सुरक्षित मिलने के बावजूद उसमें लगा फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर इतनी बुरी तरह क्षतिग्रस्त कैसे हो गया?
  • RAT के सक्रिय होने के समय को लेकर अंतरिम रिपोर्ट के दावे (4 सेकंड) और सिम्युलेटर टेस्ट के नतीजों (18 सेकंड) में इतना बड़ा अंतर क्यों है?
  • अंतिम जांच रिपोर्ट तैयार करने से पहले AAIB खुद स्वतंत्र रूप से सिम्युलेटर टेस्ट क्यों नहीं करवा रहा है?

पायलटों के संगठन ने सरकार से पुरजोर मांग की है कि अंतिम रिपोर्ट को अंतिम रूप देने से पहले सिम्युलेटर टेस्ट, रिकॉर्डर डेटा और विद्युत प्रणालियों की फिर से गहन समीक्षा की जानी चाहिए। फिलहाल, FIP के इन गंभीर सवालों पर AAIB की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।

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