मेघालय के साउथ गारो हिल्स जिले के रंगदोकराम गांव में एक दिल दहला देने वाली दुर्घटना सामने आई है। यहाँ एक आवासीय संपत्ति के नीचे बने सेप्टिक टैंक की मरम्मत और निर्माण कार्य के दौरान चार निर्माण मजदूरों की संदिग्ध रूप से जहरीली गैस की चपेट में आने से मौत हो गई। यह पूरा हादसा रंगडोकराम गांव निवासी सेबेस्टियन सीएच संगमा के निजी आवास पर हुआ, जहाँ ये सभी मजदूर एक नए बनाए गए सेप्टिक टैंक से जुड़े कार्यों को पूरा करने में जुटे हुए थे। बंद स्थान के भीतर घातक गैसों का संचय इस जानलेवा घटना का मुख्य कारण माना जा रहा है।
घटना का क्रम और शुरुआती प्रयास
प्रारंभिक जानकारियों के मुताबिक, इस दुखद घटना की शुरुआत तब हुई जब दो मजदूरों ने भूमिगत टैंक का ढक्कन हटाने का प्रयास किया। जैसे ही उन्होंने ढक्कन खोला, टैंक के भीतर से निकली जहरीली गैसों के संपर्क में आकर वे तुरंत अहोश होकर गिर पड़े। अपने साथियों को इस स्थिति में देख दो अन्य मजदूर उन्हें बचाने के लिए तुरंत आगे बढ़े और टैंक के पास पहुँचे। हालांकि, बचाव के लिए दौड़े वे दोनों मजदूर भी टैंक से रिस रही जहरीली गैसों की चपेट में आ गए और मौके पर ही बेहोश होकर गिर पड़े।
बचाव अभियान और दमकलकर्मियों की स्थिति
घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस और दमकल एवं आपातकालीन सेवा के कर्मचारी तुरंत घटनास्थल पर पहुँचे और राहत कार्य शुरू किया। हालाँकि, भूमिगत स्थिति और दुर्गम बनावट के कारण मजदूरों तक पहुँचना बचाव दलों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हुआ। फँसे हुए लोगों को बाहर निकालने के लिए बचाव कर्मियों को भारी मशक्कत करनी पड़ी और टैंक के ढाँचे के चारों तरफ की मिट्टी को खोदना पड़ा। इस कठिन बचाव अभियान के दौरान, जहरीली गैस के प्रभाव में आने से दो दमकलकर्मी भी अहोश हो गए, जिन्हें तुरंत चिकित्सकीय सहायता प्रदान की गई।
मृतकों की पहचान और असम से कनेक्शन
सघन बचाव और निकासी अभियान के बाद चारों मजदूरों को मृत घोषित कर दिया गया। प्रशासनिक जाँच में मारे गए सभी मजदूरों की पहचान कर ली गई है। मृतकों में मोफिदुर रहमान (34 वर्ष, जो मनकाचर के दियारा पुरानदियारा के रहने वाले थे), अजियर रहमान (41 वर्ष, चेंगुरचर पुरानदियारा निवासी), इस्माइल हुसैन (20 वर्ष, चोमराशाली कालापानी निवासी) और रकीब हुसैन (22 वर्ष, बोआलिया राधामाधव हाट निवासी) शामिल हैं। ये चारों ही श्रमिक पड़ोसी राज्य असम के दक्षिण सालमारा-मनकाचर जिले के विभिन्न इलाकों के मूल निवासी थे।
जहरीली गैस और वेंटिलेशन की कमी का अंदेशा
आरंभिक तकनीकी आकलन संकेत देते हैं कि टैंक के भीतर वायु संचार की उचित व्यवस्था न होने और गैस निकासी के लिए सही वेंटिलेशन या सोक पिट न होने के कारण खतरनाक गैसें लंबे समय तक अंदर ही जमा होती रहीं। इस प्रकार के बंद सेप्टिक टैंकों में आमतौर पर हाइड्रोजन सल्फाइड और मीथेन जैसी अत्यंत खतरनाक गैसों का निर्माण होता है, जिनकी उच्च सांद्रता मनुष्य के लिए कुछ ही पलों में जानलेवा साबित हो सकती है। स्थानीय प्रशासन और संबंधित अधिकारी इस बात की गहराई से पड़ताल कर रहे हैं कि आखिर टैंक के भीतर इतनी भारी मात्रा में जहरीली गैस कैसे एकत्र हुई।
प्रशासनिक जाँच और सुरक्षा मानकों पर सवाल
हालाँकि अधिकारियों ने अभी तक गैस की सटीक रासायनिक प्रकृति या मौतों के अंतिम तकनीकी कारणों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, फिर भी इस पूरे मामले की विस्तृत जाँच तेजी से जारी है। इस हृदयविदारक घटना ने एक बार फिर इस बात को रेखांकित किया है कि बिना उचित वेंटिलेशन सिस्टम, गैस डिटेक्टर उपकरणों और मानक सुरक्षा उपकरणों के किसी भी बंद या भूमिगत स्थान में उतरना कितना बड़ा जोखिम भरा हो सकता है।
















