सिंह राशिफल 22 सितंबर 2026: आठवें भाव में शनि का प्रभाव, धैर्य और व्यवस्थित दिनचर्या से बनेंगे कामकिश्त की मूल कंपनी वनईएमआई टेक्नोलॉजीज की बाजार में मजबूत एंट्री, 12 फीसदी प्रीमियम पर हुई लिस्टिंगकच्चे तेल में चार दिनों की गिरावट थमी, एशियाई कारोबार में कीमतें संभलींशेयर बाजार में आज 64 कंपनियों का एक्स-डेट एक्शन: टीएएएल टेक का स्टॉक स्प्लिट और 63 शेयरों पर डिविडेंड का मौकाराजस्थान के देशनोक में खेत की डिग्गी में डूबे तीन सगे भाई, एक-दूसरे को बचाने के प्रयास में गई जानलखनऊ में 3,567 शिक्षकों और प्रधानाचार्यों को बांटे गए नियुक्ति पत्र, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया पर जोरझारखंड में गवार की सब्जी की बढ़ी मांग, बाजार में ₹100 किलो तक बिक रही उपजप्राथमिक बाजार में दस्तक देंगे दो नए पब्लिक इश्यू, 770 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारीहॉस्पिटैलिटी दिग्गज ओयो की पैरेंट कंपनी प्रिज्म को 6650 करोड़ रुपये के आईपीओ के लिए मिली सेबी की हरी झंडीलाइव मैच: एशियाई खेल 2026: महिला क्रिकेट के खिताबी मुकाबले में श्रीलंका से भिड़ेगा भारत
गांदरबल के 1998 वंधामा हत्याकांड की एसआईए ने फिर शुरू की जांच, 23 कश्मीरी पंडितों के कातिलों की होगी पहचानजम्मू-कश्मीर
26 अग॰ 2026, 8:59 am (27 दिन पहले)· 1

गांदरबल के 1998 वंधामा हत्याकांड की एसआईए ने फिर शुरू की जांच, 23 कश्मीरी पंडितों के कातिलों की होगी पहचान

जम्मू-कश्मीर पुलिस की स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एसआईए) ने गांदरबल के 1998 वंधामा नरसंहार की जांच दोबारा शुरू कर दी है, जिसके तहत 23 कश्मीरी पंडितों की हत्या में शामिल आतंकवादियों की तलाश की जा रही है.

जम्मू-कश्मीर पुलिस की स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एसआईए) ने गांदरबल जिले में हुए 1998 के चर्चित वंधामा नरसंहार की जांच आधिकारिक तौर पर फिर से शुरू कर दी है. इस हत्याकांड में 23 कश्मीरी पंडितों को गोलियों से छलनी कर दिया गया था. एजेंसी की ओर से जारी बयान के अनुसार, घाटी में कश्मीरी पंडितों से जुड़े कई पुराने अनसुलझे मामलों की फाइलें दोबारा खोली जा रही हैं. इस जांच प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य वारदात में शामिल आतंकवादियों, उनके मददगारों और साजिशकर्ताओं की पहचान कर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करना है.

1998 के वंधामा नरसंहार की पूरी कहानी

यह दिल दहला देने वाली घटना 25 जनवरी 1998 को गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर मध्य कश्मीर के गांदरबल जिले में स्थित वंधामा गांव में हुई थी. सेना की वर्दी पहनकर आए आतंकवादियों का एक गुट गांव में दाखिल हुआ. इन हमलावरों ने कश्मीरी पंडित परिवारों के लोगों से सामान्य बातचीत की और उन्हें एक जगह एकत्र होने को कहा. जैसे ही ग्रामीण एक स्थान पर इकट्ठा हुए, आतंकवादियों ने उन पर अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी.

ये भी पढ़ें

इस गोलाबारी में 23 लोगों की जान चली गई, जिनमें नौ महिलाएं और चार बच्चे भी शामिल थे. पीड़ित लोग उन चार परिवारों के सदस्य थे, जिन्होंने 1990 के दशक की शुरुआत में उग्रवाद फैलने के बाद भी घाटी नहीं छोड़ने का फैसला किया था. घटना के बाद गांदरबल पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई थी, लेकिन यह मामला लगभग तीन दशकों तक बिना किसी नतीजे के अटका रहा. पुलिस जांच के अनुसार, इस वीभत्स हत्याकांड को लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकवादियों ने अंजाम दिया था.

टीका लाल टपलू और जस्टिस नीलकंठ गंजू हत्याकांड की जांच

पुराने अनसुलझे आतंकी मामलों की नए सिरे से पड़ताल करने और दोषियों को सजा दिलाने की रणनीति के तहत एसआईए कई अन्य प्रमुख मामलों को भी खंगाल रही है. इसके तहत 1989 में हुई टीका लाल टपलू और जस्टिस नीलकंठ गंजू की हत्या की जांच भी फिर से शुरू की गई है.

टीका लाल टपलू, जो एक जाने-माने वकील और जम्मू-कश्मीर में BJP के उपाध्यक्ष थे, की सितंबर 1989 में श्रीनगर में उनके आवास के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. वहीं, जस्टिस नीलकंठ गंजू की 4 नवंबर 1989 को हरि सिंह स्ट्रीट पर संदिग्ध JKLF आतंकवादियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी. जस्टिस गंजू ने ही JKLF के संस्थापक मकबूल भट को मृत्युदंड की सजा सुनाई थी.

छापेमारी और सरला भट्ट मामले में चार्जशीट

इन मुकदमों की दोबारा शुरू की गई जांच के सिलसिले में एसआईए की टीमों ने हाल के दिनों में जम्मू-कश्मीर के विभिन्न इलाकों में कई जगह छापेमारी की है. इसके अलावा, एजेंसी ने 1990 में हुई कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट्ट के अपहरण और हत्या के मामले की जांच भी पूरी कर ली है.

सरला भट्ट मामले में एसआईए ने अदालत में 737 पन्नों की एक विस्तृत चार्जशीट दाखिल की है. इस चार्जशीट में प्रतिबंधित संगठन JKLF के प्रमुख यासीन मलिक को अपहरण और हत्या की साजिश का मुख्य आरोपी नामित किया गया है.

सवाल-जवाब

1998 का वंधामा नरसंहार क्या है?
25 जनवरी 1998 को गांदरबल जिले के वंधामा गांव में सेना की वर्दी पहने आतंकवादियों ने 23 कश्मीरी पंडितों (जिनमें 9 महिलाएं और 4 बच्चे शामिल थे) की गोली मारकर हत्या कर दी थी.
इन पुराने अनसुलझे मामलों की जांच कौन कर रहा है?
जम्मू-कश्मीर पुलिस की स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एसआईए) इन ऐतिहासिक और अनसुलझे मामलों की जांच फिर से कर रही है.
एसआईए ने किन अन्य प्रमुख मामलों की जांच दोबारा शुरू की है?
एसआईए ने 1989 में हुई भाजपा उपाध्यक्ष टीका लाल टपलू और जस्टिस नीलकंठ गंजू की हत्या के मामलों की जांच भी दोबारा शुरू की है.
कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट्ट मामले में क्या अपडेट है?
एसआईए ने 1990 में हुई सरला भट्ट की हत्या के मामले की जांच पूरी कर 737 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें यासीन मलिक को मुख्य आरोपी बनाया गया है.
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·26 दिन पहले

वंधामा नरसंहार जैसे तीन दशक पुराने मामलों की एसआईए द्वारा नए सिरे से जांच और सरला भट्ट मामले में ७३७ पन्नों की चार्जशीट दाखिल होना यह दर्शाता है कि कानून प्रवर्तन एजेंसियां अनसुलझे मामलों में न्याय सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी और दस्तावेजी साक्ष्यों को मजबूत कर रही हैं। इन ऐतिहासिक मामलों के खुलने से आतंकवादियों के स्लीपर सेल और स्थानीय मददगारों की भूमिका पर भी नया कानूनी शिकंजा कसेगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·26 दिन पहले

रोहन वर्मा की इस रिपोर्ट से यह स्पष्ट होता है कि एसआईए अब केवल पुरानी फाइलों को नहीं खंगाल रही, बल्कि डिजिटल फॉरेन्सिक्स, आधुनिक सर्विलांस और नए सिरे से जुटाए गए बयानों के आधार पर कड़ियों को जोड़ रही है। तीन दशकों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे परिवारों के लिए यह कानूनी प्रक्रिया इस बात का संदेश है कि जघन्य अपराधों में संलिप्त आतंकवादियों और उनके मददगारों के लिए कानून का शिकंजा कसता जा रहा है और अभियोजन पक्ष अब साक्ष्यों के स्तर पर पूरी तरह से पुख्ता तैयारी के साथ आगे बढ़ रहा है।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp