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गौरव गोगोई ने नगांव के डीसी के इस्तीफे पर उठाए गंभीर सवाल, चुनाव आयोग से तत्काल दखल की मांगअसम
4 सित॰ 2026, 3:08 pm (27 दिन पहले)· 2

गौरव गोगोई ने नगांव के डीसी के इस्तीफे पर उठाए गंभीर सवाल, चुनाव आयोग से तत्काल दखल की मांग

असम में होने वाले आगामी लोकसभा उपचुनाव को लेकर कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने चुनाव आयोग से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग उठाई है। उन्होंने नगांव के पूर्व जिला आयुक्त देवाशीष शर्मा के इस्तीफे और उनके भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़ने की अटकलों पर संदेह जताया है।

असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और जोरहट से कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने आगामी नगांव लोकसभा उपचुनाव को लेकर निर्वाचन आयोग से तुरंत दखल देने का आग्रह किया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया है कि आयोग को इस पूरे मामले का संज्ञान लेते हुए निष्पक्षता सुनिश्चित करनी चाहिए ताकि चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर किसी तरह का कोई संदेह न बचे।

देवाशीष शर्मा के इस्तीफे पर खड़े किए गए सवाल

शुक्रवार को सोशल मीडिया पर जारी अपने एक बयान में कांग्रेस नेता ने नगांव के जिला आयुक्त देवाशीष शर्मा के अचानक दिए गए इस्तीफे को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि एक ऐसे अधिकारी, जो खुद को जिला निर्वाचन अधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहा था, उसका इस तरह पद छोड़कर भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरने की कोशिश करना अपने आप में कई शंकाओं को जन्म देता है।

चुनावी निष्पक्षता और संवेदनशील फैसले

सांसद का आरोप है कि अपने कार्यकाल के दौरान इस अधिकारी ने चुनाव प्रक्रिया से जुड़े कई बेहद संवेदनशील मामलों और फैसलों को सीधे तौर पर संभाला था। ऐसे में उनके द्वारा लिए गए पिछले निर्णय आने वाले उपचुनाव की निष्पक्षता को प्रभावित कर सकते हैं। चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह जरूरी है कि इस पूरे घटनाक्रम की गहराई से समीक्षा की जाए ताकि जनता का भरोसा कायम रह सके।

वित्तीय अनियमितताओं और जांच की मांग

चुनावी मुद्दों के अलावा, नेता ने ग्राम पंचायत स्तर पर पंद्रहवें वित्त आयोग के फंड के इस्तेमाल में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं होने का भी दावा किया है। उनका आरोप है कि इन निधियों के क्रियान्वयन में प्रशासनिक स्तर पर भारी दबाव और प्रभाव का इस्तेमाल किया गया। इन गंभीर शिकायतों के मद्देनजर उन्होंने चुनाव आयोग से एक स्वतंत्र और समयबद्ध जांच के आदेश देने की पुरजोर मांग की है।

निष्पक्षता और जनता के भरोसे की बात

कांग्रेस नेता ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि इस मामले में निर्वाचन आयोग की तरफ से कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया, तो इससे देश की चुनावी व्यवस्था से आम जनता का भरोसा उठ सकता है। उन्होंने एक निष्पक्ष एजेंसी से पूरे मामले की जांच कराने की बात दोहराई ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। इस संबंध में उन्होंने @ECISVEEP को टैग करते हुए अपनी बात सार्वजनिक मंच पर रखी जिसे आप Gaurav Gogoi के एक्स पोस्ट पर देख सकते हैं।

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सवाल-जवाब

गौरव गोगोई ने किस मामले में चुनाव आयोग से हस्तक्षेप की मांग की है?
उन्होंने नगांव लोकसभा उपचुनाव को लेकर चुनाव आयोग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
किस अधिकारी के इस्तीफे को लेकर सवाल उठाए गए हैं?
नगांव के जिला आयुक्त देवाशीष शर्मा के इस्तीफे को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
कांग्रेस नेता ने अधिकारी पर क्या मुख्य आरोप लगाया है?
आरोप है कि अधिकारी ने अपने कार्यकाल के दौरान संवेदनशील चुनावी फैसले लिए और वह भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने की कोशिश कर रहे हैं।
वित्तीय मामलों में किस फंड को लेकर अनियमितता का दावा किया गया है?
ग्राम पंचायत स्तर पर पंद्रहवें वित्त आयोग के फंड के उपयोग में अनियमितताओं का दावा किया गया है।
कांग्रेस नेता ने चुनाव आयोग से क्या मांग की है?
उन्होंने अधिकारी के कार्यकाल और वित्तीय अनियमितताओं की स्वतंत्र, समयबद्ध जांच कराने की मांग की है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·26 दिन पहले

एक प्रशासनिक अधिकारी का अचानक इस्तीफा देकर राजनीतिक दल से चुनाव लड़ने की संभावना सीधा हितों के टकराव का मामला है। यह स्थिति चुनाव आयोग के लिए एक बड़ी परीक्षा है, क्योंकि इससे मतदान प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं। यदि समय रहते प्रशासनिक निर्णयों की समीक्षा और स्वतंत्र जांच नहीं हुई, तो न्याय व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा जैसे संस्थानों पर जनता का विश्वास डगमगा सकता है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·26 दिन पहले

करण मल्होत्रा के इस विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यह प्रकरण केवल एक इस्तीफे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नौकरशाही और चुनावी राजनीति के बीच की धुंधली रेखा को उजागर करता है। जब कोई जिला निर्वाचन अधिकारी संवेदनशील चुनावी प्रबंधन के तुरंत बाद राजनीतिक दल विशेष से जुड़ने की संभावना रखता है, तो इससे मॉडल कोड ऑफ़ कंडक्ट और प्रशासनिक तटस्थता की अवधारणा पर गंभीर आंच आती है। चुनाव आयोग के लिए यह आवश्यक हो गया है कि वह ऐसे मामलों में एक स्पष्ट मिसाल कायम करे, अन्यथा यह ट्रेंड आगामी चुनावों में संस्थागत विश्वसनीयता के लिए एक बड़ा संकट बन सकता है।

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