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गोवा में राफेल-एम के परीक्षण शुरू, आईएनएस विक्रांत के लिए तैयार हो रहा नौसेना का नया लड़ाकू दस्ताभारत
22 अक्तू॰ 2026, 10:08 am (7 दिन पहले)· 3

गोवा में राफेल-एम के परीक्षण शुरू, आईएनएस विक्रांत के लिए तैयार हो रहा नौसेना का नया लड़ाकू दस्ता

फ्रांसीसी नौसेना का कैरियर-आधारित लड़ाकू विमान राफेल-मरीन भारत आ चुका है, जहां गोवा तट पर आईएनएस विक्रांत से संचालन के लिए उसकी तकनीकी बारीकियों को परखा जा रहा है।

समुद्री सीमाओं की सुरक्षा और विमानवाहक पोतों की मारक क्षमता को आधुनिक बनाने के क्रम में नौसेना ने एक महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश किया है। फ्रांस निर्मित राफेल-मरीन लड़ाकू विमान भारतीय परीक्षण केंद्रों पर पहुंच चुका है, जहां गोवा स्थित नौसैनिक एयर स्टेशन पर इसके सघन उड़ान परीक्षण संचालित किए जा रहे हैं। इन परीक्षणों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यह उन्नत नौसैनिक विमान स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत के तकनीकी ढांचे और उड़ान तंत्र के साथ पूरी तरह तालमेल बिठा सके। समंदर के बीच से उड़ान भरकर सटीक हमले करने और जटिल हवाई खतरों का मुकाबला करने के लिहाज से यह मूल्यांकन भारतीय नौसेना के विमानन विंग के लिए असाधारण रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कैरियर डेक संचालन के तकनीकी पहलुओं का परीक्षण

जमीन पर मौजूद पारंपरिक हवाई पट्टियों की तुलना में समुद्र में तैरते विमानवाहक पोत से युद्धक विमानों का संचालन पूरी तरह अलग इंजीनियरिंग और वैमानिकी कौशल की मांग करता है। एयरक्राफ्ट कैरियर का सीमित रनवे, हवा की गति, समुद्री लहरों का उतार-चढ़ाव और विमान को रोकने वाले अरेस्टिंग वायर सिस्टम ऐसे कारक हैं, जिनके लिए विशेष संरचनात्मक मजबूती की आवश्यकता होती है। गोवा में जारी अभ्यास के दौरान विशेषज्ञ दल इसी बात की विस्तृत समीक्षा कर रहे हैं कि राफेल-एम को आईएनएस विक्रांत के डेक से सुरक्षित और प्रभावी तरीके से उड़ाने तथा उतारने के लिए किन विशिष्ट बदलावों अथवा ऑन-बोर्ड तकनीकी व्यवस्थाओं की दरकार होगी। इन परीक्षणों से प्राप्त आंकड़े ही विमान के अंतिम एकीकरण का मार्ग प्रशस्त करेंगे।

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63,000 करोड़ रुपये का रक्षा सौदा और विमानों की संरचना

भारत सरकार ने 28 अप्रैल 2025 को फ्रांस के साथ आधिकारिक रक्षा अनुबंध पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत कुल 26 राफेल-मरीन जेट विमानों की खरीद को मंजूरी दी गई। लगभग 63,000 करोड़ रुपये के इस विशाल रक्षा समझौते के अंतर्गत नौसेना को दो अलग-अलग स्वरूपों में लड़ाकू विमान प्राप्त होंगे। इस बेड़े में 22 विमान सिंगल-सीट यानी एक पायलट वाले लड़ाकू संस्करण होंगे, जबकि 4 विमान ट्विन-सीट यानी दो पायलटों वाले होंगे, जिनका उपयोग परिचालन के साथ-साथ उच्च स्तरीय मिशन प्रशिक्षण के लिए भी किया जा सकेगा। इस समझौते के साथ भारत दुनिया का पहला ऐसा अंतरराष्ट्रीय देश बन गया है, जिसने दसॉल्ट एविएशन द्वारा निर्मित राफेल के विशेष नौसैनिक संस्करण को अपने सैन्य बेड़े के लिए चुना है।

डिलीवरी की समयसीमा और व्यापक रणनीतिक पैकेज

रक्षा अधिकारियों द्वारा साझा की गई कार्ययोजना के अनुसार, इन 26 आधुनिक नौसैनिक लड़ाकू विमानों की आधिकारिक आपूर्ति 2028 के अंतिम महीनों से शुरू होकर 2029 के शुरुआती चरण तक पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। यह समझौता केवल लड़ाकू विमानों की डिलीवरी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें एक संपूर्ण रक्षा सहायता पैकेज शामिल है। अनुबंध के प्रावधानों के तहत भारतीय पायलटों को विशेष नौसैनिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा, साथ ही अत्याधुनिक फ्लाइट सिमुलेटर, घातक हथियार प्रणालियां, विशेष उपकरण और लंबे समय तक रखरखाव का व्यापक ढांचा भी विकसित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, भारतीय वायु सेना द्वारा पूर्व से इस्तेमाल किए जा रहे राफेल विमानों के लिए जरूरी स्पेयर और तकनीकी उपकरणों को भी इस रक्षा समझौते में समाहित किया गया है।

आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी तकनीक का समन्वय

इस रक्षा समझौते की एक अहम विशेषता स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देने से जुड़ी है। सरकार के आत्मनिर्भर भारत विजन के अनुरूप, सौदे में विस्तृत टेक्नोलॉजी ट्रांसफर यानी तकनीक हस्तांतरण की व्यवस्था की गई है। इसके माध्यम से भारतीय रक्षा वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को यह अधिकार और तकनीकी क्षमता मिलेगी कि वे भारत में ही विकसित उन्नत मिसाइलों, राडार और अन्य स्वदेशी हथियारों को राफेल-एम के सिस्टम के साथ सफलतापूर्वक जोड़ सकें। फ्रांसीसी नौसेना में लंबे समय से सेवारत और प्रमाणित यह जेट विमान भविष्य में भारतीय तकनीक से लैस होकर अपनी उपयोगिता को और अधिक प्रभावशाली बनाएगा।

आईएनएस विक्रांत और विक्रमादित्य से दोहरे संचालन की क्षमता

भारतीय नौसेना की वर्तमान संरचना में दो सक्रिय विमानवाहक पोत मौजूद हैं, जिनमें स्वदेशी रूप से निर्मित आईएनएस विक्रांत और आईएनएस विक्रमादित्य शामिल हैं। फ्रांस से आने वाले ये सभी 26 राफेल-एम विमान इस प्रकार तैयार किए जाएंगे कि वे इन दोनों विशाल युद्धपोतों से निर्बाध रूप से मिशन को अंजाम दे सकें। नौसेना इन लड़ाकू विमानों को कई तरह की बहुआयामी जिम्मेदारियों के लिए तैनात करेगी। इनमें विशाल समुद्री परिधि में एयर डिफेंस सुनिश्चित करना, दूरदराज के समुद्री लक्ष्यों पर अचूक प्रहार, गुप्त निगरानी और टोही मिशन तथा तटीय सामरिक ठिकानों को नेस्तनाबूद करना शामिल है। इन विमानों के जुड़ने से नौसेना को दुश्मन के रडार और मिसाइल पहुंच से दूर रहते हुए हिंद महासागर में अपना स्पष्ट नियंत्रण बनाए रखने में अभूतपूर्व सहायता मिलेगी।

सवाल-जवाब

गोवा में किस लड़ाकू विमान के परीक्षण किए जा रहे हैं?
गोवा स्थित नौसैनिक केंद्र पर फ्रांस निर्मित कैरियर-आधारित लड़ाकू विमान राफेल-मरीन के उड़ान परीक्षण किए जा रहे हैं।
इन परीक्षणों का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इन परीक्षणों का मकसद यह जांचना है कि विमान को स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत से संचालित करने के लिए किन तकनीकी व्यवस्थाओं और बदलावों की जरूरत है।
भारत ने फ्रांस से कितने राफेल-एम विमानों का सौदा किया है?
भारत ने 28 अप्रैल 2025 को कुल 26 राफेल-मरीन विमानों की खरीद का समझौता किया, जिसकी लागत लगभग 63,000 करोड़ रुपये है।
खरीदे जाने वाले 26 विमानों की संरचना कैसी है?
इस बेड़े में 22 सिंगल-सीट (एक पायलट वाले) और 4 ट्विन-सीट (दो पायलटों वाले) विमान शामिल हैं।
इन लड़ाकू विमानों की डिलीवरी कब तक होने की उम्मीद है?
अधिकारियों के अनुसार, इन विमानों की आपूर्ति 2028 के अंत से लेकर 2029 की शुरुआत तक निर्धारित की गई है।
राफेल-एम किन भारतीय विमानवाहक पोतों से काम करेंगे?
ये लड़ाकू विमान भारतीय नौसेना के दोनों विमानवाहक पोतों, आईएनएस विक्रांत और आईएनएस विक्रमादित्य से संचालित होने में सक्षम होंगे।
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टिप्पणियाँ 5

Sneha Kulkarni@sneha-kulkarni·6 दिन पहले

गोवा के Dabolim एयरपोर्ट पर उतरते वक्त जब पास में इन विमानों की गड़गड़ाहट सुनी थी, तब सच में रोंगटे खड़े हो गए थे। विक्रांत के डेक पर इन्हें उतरते देखना हमारे डिफेंस सिस्टम के लिए वाकई बड़ा पल होगा।

Arjun Mehta@arjun-mehta·6 दिन पहले

परीक्षण ठीक हैं पर 2029 तक इंतज़ार बहुत लंबा है, तब तक हालात बदल सकते हैं।

Ravikash Gupta@ravikash·6 दिन पहले

अर्जुन, बात तो सही है आपकी, लेकिन राफेल जैसे बड़े सौदे और कैरियर इंटीग्रेशन में वक्त तो लगता ही है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·6 दिन पहले

समुद्र में देश की ताकत और मजबूत होगी, राफेल-एम का आना बड़ा कदम है।

Rohan Verma@rohan-verma·6 दिन पहले

करण भाई, बिल्कुल सही कहा आपने। पिछली बार जब मैं गोवा गया था और बेस के पास से गुजर रहा था, तब ऐसा लगा था कि यहाँ कुछ बड़ा होने वाला है।

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