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गुवाहाटी में जुटे पूर्वोत्तर के उद्यमी और निवेशक, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और तकनीक पर बना नया मंचअसम
20 सित॰ 2026, 10:26 pm (10 दिन पहले)· 1

गुवाहाटी में जुटे पूर्वोत्तर के उद्यमी और निवेशक, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और तकनीक पर बना नया मंच

गुवाहाटी में आयोजित एक विशेष कारोबारी बैठक में असम और पड़ोसी राज्यों के उद्यमियों, बैंकर्स और निवेशकों ने पूर्वोत्तर में तकनीकी उपक्रमों और स्थानीय विनिर्माण को रफ्तार देने पर विचार-विमर्श किया।

असम की राजधानी गुवाहाटी में शनिवार को आयोजित एक नए उद्यमशीलता सम्मेलन में पूर्वोत्तर के स्टार्टअप संस्थापकों, पूंजीपतियों, वित्तीय विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं ने एक साझा मंच पर विचार साझा किए। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य पूर्वोत्तर भारत में रणनीतिक पूंजी और स्थानीय नवाचार के बीच तालमेल स्थापित करना था, ताकि उच्च तकनीक, व्यावसायिक अवसरों, फंडिंग और दीर्घकालिक औद्योगिक साझेदारी को बढ़ावा दिया जा सके। इस संपूर्ण पहल का नेतृत्व यूके की यूनिवर्सिटी ऑफ चेस्टर से एमबीए स्नातक और एमवीबी ग्रुप के संस्थापक व वेंचर बिल्डर कुणाल बारठाकुर ने किया।

पूर्वोत्तर में एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और नई तकनीकों के अवसर

सम्मेलन का औपचारिक शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिसके तुरंत बाद असम के लोकप्रिय गायक और संगीतकार जुबीन गर्ग को संगीतमय श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इसके उपरांत विभिन्न क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले उद्यमियों और पेशेवरों ने अपने व्यावसायिक सफर, वर्तमान उपक्रमों और भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी। मुख्य संबोधन प्रस्तुत करते हुए कुणाल बारठाकुर ने उभरती प्रौद्योगिकियों और आधुनिक विनिर्माण के व्यावसायिक उपयोग पर विस्तार से चर्चा की।

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उन्होंने बताया कि फाइबर रीइन्फोर्स्ड पॉलिमर (FRP), मेटैलिक बॉन्डेड सरफेस और उन्नत विनिर्माण तकनीकों के माध्यम से व्यावसायिक रूप से सफल उद्योग स्थापित किए जा सकते हैं। कुणाल बारठाकुर और उनकी टीम पूर्वोत्तर क्षेत्र में प्लाज्मा वेस्ट-टू-एनर्जी सिस्टम, सौर आधारित जल शोधन तकनीक (जिसका पेटेंट लंबित है) और एफआरपी के विभिन्न औद्योगिक अनुप्रयोगों को पेश करने तथा उन्हें जमीन पर उतारने की दिशा में निरंतर काम कर रहे हैं। इस पूरी पहल की व्यापक रूपरेखा यह है कि इच्छुक युवाओं और उद्यमियों को प्रौद्योगिकी आधारित उद्योगों की पहचान करने तथा स्थानीय स्तर पर टिकाऊ उपक्रम खड़े करने में व्यावहारिक सहयोग मिल सके।

उद्योग जगत और वित्तीय संस्थानों की सक्रिय भागीदारी

इस विचार-विमर्श में बैंकिंग और सामाजिक विकास से लेकर कृषि और डिजिटल तकनीक से जुड़े कई प्रमुख दिग्गजों ने भाग लिया। उपस्थित अतिथियों में एक्सपोर्ट-इंपोर्ट बैंक ऑफ इंडिया के क्षेत्रीय प्रमुख आलोक बोरा, एनईपीईडीएस के चेयरमैन डॉ. प्रशांत बुरागोहाईं, वेंचर बिल्डर डेज़ी भट्टाचार्य, महत्वाकांक्षी उद्यमी श्रेया दास, हाकू डिजिटल प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक अरिंदम भराली, एनईपीईडीएस की निदेशक मल्लिका के. बुरागोहाईं और उद्यमी राजलक्ष्मी सैकिया लहन शामिल रहे।

इनके अतिरिक्त आईडीएफसी बैंक की शाखा प्रमुख रिंकू रॉय, फ्थ्राएग्री सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक मिलन बोरा, निवृत्त फाउंडेशन से इप्सिता बरुआ, रिनेर्जी सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक भार्गव देवरी, द एम्प्लॉयमेंट एक्सप्रेस के संस्थापक संदीप जैन, ऊर्जावान की संस्थापक वर्षा दत्ता, अवांजोटेक की संस्थापक बबीबा सुल्ताना, प्रचुर्य कौशिक (आरोह, गुवाहाटी), एस्टेट ब्रू के संस्थापक प्रबालन सरमा, द वेडबीज की सह-संस्थापक बानाश्री दास, उद्यमी अनिलेश गोगोई, कॉडक्विस्किल के संस्थापक हारून एआरएम गालिब, द वेडबीज के संस्थापक भुचित्र भूषण तथा सोशियो इकोनॉमिक डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन एनजीओ के आरएंडडी विभाग से सैयद रिजवान उमर उपस्थित थे।

कम उम्र में उद्यमिता की शिक्षा और सांस्कृतिक रंग

कार्यक्रम के आयोजकों ने युवा पीढ़ी को स्कूली और कॉलेज के दिनों से ही नवाचार तथा उद्यमशीलता से जोड़ने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। उनका मानना था कि विद्यार्थियों को परंपरागत करियर विकल्पों के साथ-साथ खुद का उद्यम शुरू करने की सोच विकसित करने के अवसर मिलने चाहिए।

बैठक की शाम सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से भी सजी रही। जुबीन गर्ग के सम्मान में नवाचारकर्ता और बांसुरी वादक एके ने बांसुरी पर 'एंधार होबो नुवारे' की धुन बजाई। इसके साथ ही फरहान कुतुब, नबांग्शु आर्यन, निशान कुमार, रूपज्योति गौतम, संजय के. बोरा और कार्तिक काकती जैसे गायकों व संगीतकारों ने मंच संभाला। तीन वर्षीय बालक मास्टर अविराज बारठाकुर ने जुबीन गर्ग का प्रसिद्ध गीत 'माया माथु माया' गाकर सभी का मन मोह लिया। कार्यक्रम के अंतिम चरण में ओपन-माइक सत्र का आयोजन हुआ, जिसमें उपस्थित लोगों ने दिवंगत गायक के विभिन्न गीत प्रस्तुत किए।

हर पखवाड़े आयोजित होगी बैठक

आयोजन से जुड़े पदाधिकारियों के अनुसार, यह उद्यमशीलता बैठक हर पखवाड़े यानी महीने में दो बार शनिवार के दिन आयोजित की जाएगी। इन नियमित सत्रों का प्राथमिक उद्देश्य उद्यमियों, निवेशकों और अन्वेषकों को नियमित रूप से मिलने, विचार विनिमय करने, नए अवसर तलाशने और व्यावहारिक साझेदारी विकसित करने का मंच उपलब्ध कराना है। आगामी बैठकों में मुख्य ध्यान प्रौद्योगिकी और विनिर्माण क्षेत्र पर केंद्रित रहेगा। इस अभियान का व्यापक लक्ष्य पूर्वोत्तर भारत में आत्मनिर्भरता, स्थानीय विनिर्माण, रोजगार सृजन और स्टार्टअप परिवेश को सुदृढ़ बनाना है। आगामी कार्यक्रमों में भाग लेने अथवा प्रौद्योगिकी आधारित उद्यम स्थापित करने के इच्छुक लोग कुणाल बारठाकुर से फोन नंबर 7896829091 या ईमेल [email protected] पर संपर्क कर सकते हैं।

सवाल-जवाब

गुवाहाटी में आयोजित इस बैठक का मुख्य उद्देश्य क्या था?
इसका उद्देश्य पूर्वोत्तर के उद्यमियों, निवेशकों और बैंकर्स को जोड़कर आधुनिक तकनीक, विनिर्माण और फंडिंग के अवसरों पर चर्चा करना था।
इस उद्यमशीलता पहल का नेतृत्व किसने किया?
इस पहल का नेतृत्व यूके की यूनिवर्सिटी ऑफ चेस्टर से एमबीए स्नातक और एमवीबी ग्रुप के संस्थापक कुणाल बारठाकुर ने किया।
सम्मेलन में किन प्रमुख तकनीकों पर चर्चा हुई?
बैठक में फाइबर रीइन्फोर्स्ड पॉलिमर (FRP), प्लाज्मा वेस्ट-टू-एनर्जी और सौर आधारित जल शोधन तकनीक जैसी उन्नत प्रणालियों पर चर्चा की गई।
यह बैठक आगे कितनी बार आयोजित की जाएगी?
आयोजकों के अनुसार यह बैठक हर पखवाड़े यानी महीने में दो बार शनिवार के दिन आयोजित की जाएगी।
आगामी कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए कैसे संपर्क किया जा सकता है?
इच्छुक लोग कुणाल बारठाकुर से फोन नंबर 7896829091 या ईमेल [email protected] के जरिए संपर्क कर सकते हैं।
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टिप्पणियाँ 5

Laxmi Gupta@laxmi-gupta·10 दिन पहले

पूर्वोत्तर में तकनीक और विनिर्माण के इस नए मंच की सफलता इसकी ऊर्जा पर निर्भर करती है। अंक ज्योतिषीय दृष्टि से देखें तो इस प्रकार के बड़े उद्यमों और नए उपक्रमों की शुरुआत के लिए सही समय और मजबूत रणनीतिक तालमेल का होना अत्यंत आवश्यक है। कुणाल बारठाकुर के नेतृत्व में हो रहे ये प्रयास, जैसे कि फाइबर रीइन्फोर्स्ड पॉलिमर और वेस्ट-टू-एनर्जी जैसी प्रणालियाँ, आने वाले समय में क्षेत्रीय आर्थिक विकास और दीर्घकालिक औद्योगिक साझेदारी को एक नई दिशा देंगे, बशर्ते वित्तीय संस्थानों का यह सहयोग निरंतर बना रहे।

Ravikash Gupta@ravikash·10 दिन पहले

पूर्वोत्तर में कुणाल बारठाकुर के नेतृत्व में आयोजित इस मंच ने पारंपरिक व्यापार से हटकर फाइबर रीइन्फोर्स्ड पॉलिमर और प्लाज्मा वेस्ट-टू-एनर्जी जैसी एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग को जो दिशा दी है, वह क्षेत्र के आर्थिक परिदृश्य को बदल सकती है। एक्जिम बैंक और आईडीएफसी बैंक जैसे वित्तीय संस्थानों की सक्रिय भागीदारी यह सुनिश्चित करती है कि इन तकनीकी उपक्रमों को शुरुआती स्तर पर ही सही रणनीतिक पूंजी और निवेश अंतर्दृष्टि मिल सके। आने वाले समय में यह पहल पूर्वोत्तर को देश के उभरते डीप-टेक और सस्टेनेबल मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करने में मील का पत्थर साबित हो सकती है।

Ananya Iyer@ananya-iyer·10 दिन पहले

मनोरंजन और पॉप कल्चर रिपोर्टिंग के दायरे से परे देखें, तो यह वैचारिक बदलाव मुख्यधारा के मीडिया और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर भी नई कहानियों को जन्म दे रहा है। जब क्षेत्रीय उद्यमी सस्टेनेबल टेक और वेस्ट-टू-एनर्जी जैसे विषयों पर बात करते हैं, तो यह स्क्रीन पर आने वाले भविष्य के कंटेंट, डॉक्यूसीरीज और कॉर्पोरेट ड्रामा के लिए बेहतरीन वास्तविक जमीन तैयार करता है। इस तरह के वित्तीय और तकनीकी समागम से पूर्वोत्तर अब केवल प्राकृतिक सुंदरता तक सीमित नहीं, बल्कि आधुनिक इंडस्ट्रियल नरेटिव का भी केंद्र बन रहा है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·10 दिन पहले

पूर्वोत्तर राज्यों में तकनीक आधारित विनिर्माण और स्टार्टअप्स का यह विस्तार क्षेत्रीय आर्थिक परिदृश्य को सुदृढ़ करने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर सुरक्षा और अवसंरचनात्मक विकास के नए आयाम खोल सकता है। इस प्रकार के वित्तीय समावेशन और औद्योगिक पहलों से संगठित अपराध और अवैध गतिविधियों पर लगाम कसने में भी अप्रत्यक्ष रूप से सहायता मिलती है, क्योंकि युवा वर्ग को सकारात्मक और वैध रोजगार के अवसर प्राप्त होते हैं। भविष्य में ऐसी पहलों की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि विधिक अनुपालन और प्रशासनिक पारदर्शिता किस स्तर पर सुनिश्चित की जाती है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·10 दिन पहले

यह मंच पूर्वोत्तर में रणनीतिक पूंजी और स्थानीय नवाचार के बीच की खाई को पाटने का काम कर रहा है। फाइबर रीइन्फोर्स्ड पॉलिमर और प्लाज्मा वेस्ट-टू-एनर्जी जैसी तकनीकों का समावेश इस क्षेत्र को पारंपरिक अर्थव्यवस्था से निकालकर आधुनिक औद्योगिक मानचित्र पर स्थापित कर सकता है। हालांकि, दीर्घकालिक सफलता के लिए वित्तीय संस्थानों और स्टार्टअप्स के बीच निरंतर समन्वय आवश्यक होगा।

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