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ग्वालियर के होटल में बना फर्जी अमेरिकी कॉल सेंटर, नकली नाम रखकर रोज करते थे 400 कॉलमध्य प्रदेश
29 जुल॰ 2026, 3:20 pm (91 दिन पहले)· 4

ग्वालियर के होटल में बना फर्जी अमेरिकी कॉल सेंटर, नकली नाम रखकर रोज करते थे 400 कॉल

ग्वालियर के होटल जैनपथ के एक कमरे से चल रहे फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ हुआ, जहां 10वीं-12वीं पास चार युवक अमेरिकन एक्सेंट में बात कर अमेरिकी नागरिकों को ठग रहे थे. पांच महीने में करोड़ रुपए से ज्यादा की ठगी सामने आई है और अब मामला FBI तक पहुंचेगा.

ग्वालियर में होटल के एक कमरे से चल रहे फर्जी इंटरनेशनल कॉल सेंटर का भंडाफोड़ हुआ है, जहां चार युवक अमेरिकी नागरिक बनकर अमेरिका में रहने वाले लोगों को ठग रहे थे, और पूछताछ में एक के बाद एक हैरान करने वाली बातें सामने आ रही हैं.

होटल का कमरा बना ठगी का अड्डा

यह पूरा खेल ग्वालियर के मोहना थाना क्षेत्र में आगरा-मुंबई नेशनल हाईवे पर स्थित होटल जैनपथ के कमरा नंबर-6 से चल रहा था. पिछले पांच महीने से यह कमरा अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाने वाले कॉल सेंटर का ठिकाना बना हुआ था. पुलिस को भनक लगते ही टीम ने कमरे पर छापा मारा और मौके से चार युवकों को पकड़ लिया.

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नकली नाम, अमेरिकन लहजा, असली रकम

जांच में पुलिस भी चौंक गई. चारों आरोपी सिर्फ 10वीं और 12वीं पास निकले, लेकिन धाराप्रवाह अंग्रेजी वो भी अमेरिकन एक्सेंट में बोलते थे. पूछताछ में आरोपियों ने कबूल किया कि उन्होंने यह लहजा इंटरनेट से देखकर खुद सीखा था. यह अपना असली नाम कभी नहीं बताते थे, बल्कि खुद को फ्रैंक, लुईस, ब्रूस और माइकल नाम के अमेरिकी नागरिक बताकर बात करते थे. गिरोह रोजाना अमेरिका में 400 से ज्यादा लोगों को कॉल करता था.

इस पूरे नेटवर्क का सरगना प्रबल प्रताप सिंह परिहार है, जो इन युवकों को पहले से तैयार स्क्रिप्ट और अमेरिकी नागरिकों का डेटा मुहैया कराता था. यह डेटा डार्क वेब से जुटाया जाता था. कॉल के दौरान लैपटॉप की स्क्रीन पर यही स्क्रिप्ट खुली रहती थी, ताकि आरोपी उसे पढ़कर सामने वाले को असली अमेरिकी होने का भरोसा दिला सकें.

रोज 50 से 70 हजार की ठगी, पांच महीने में करोड़ पार

भारत और अमेरिका के समय में करीब 12 घंटे का फासला होने की वजह से आरोपी पूरा दिन सोकर बिताते थे और रात 9 बजे से सुबह 6 बजे तक कॉल सेंटर चलाते थे. इसी दौरान हर रात 12 से 15 लोग गिफ्ट कार्ड या प्रोसेसिंग फीस के नाम पर इनके जाल में फंस जाते थे. गिरोह हर दिन औसतन 50 से 70 हजार रुपए की ठगी करता था और इस तरह पांच महीने में करोड़ रुपए से ज्यादा की रकम बटोर चुका था. यह पूरी रकम सीधे सरगना के बैंक खातों में जमा होती थी. कॉल करने वाले चारों युवकों को इसके बदले सिर्फ 15 से 20 हजार रुपए महीने की सैलरी और ठगी गई रकम का 5 प्रतिशत कमीशन मिलता था.

अब मामला पहुंचेगा FBI तक

चूंकि इस रैकेट का निशाना सीधे अमेरिकी नागरिक थे, इसलिए मामला अब अंतरराष्ट्रीय स्तर तक जा सकता है. ग्वालियर पुलिस विदेश मंत्रालय के जरिए इसकी जानकारी अमेरिका की जांच एजेंसी FBI तक भेजेगी. मामले की गंभीरता को देखते हुए जरूरत पड़ने पर FBI की एक टीम जांच के लिए ग्वालियर भी आ सकती है. पुलिस ने होटल के कमरे से 4 लैपटॉप, 7 मोबाइल, 4 हेडफोन, स्क्रिप्ट, ग्राहकों की डिटेल और कई दस्तावेज जब्त किए हैं, जिनकी कीमत करीब 3 लाख 75 हजार रुपए आंकी गई है. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह ने अमेरिका में अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया.

सवाल-जवाब

ग्वालियर में यह फर्जी कॉल सेंटर कहां से चल रहा था?
यह होटल जैनपथ के कमरा नंबर-6 से चल रहा था, जो मोहना थाना क्षेत्र में आगरा-मुंबई नेशनल हाईवे पर स्थित है.
आरोपी किस तरह लोगों को ठगते थे?
वे खुद को फ्रैंक, लुईस, ब्रूस और माइकल नाम के अमेरिकी नागरिक बताकर अमेरिकन एक्सेंट में बात करते थे और गिफ्ट कार्ड व प्रोसेसिंग फीस के नाम पर ठगी करते थे.
गिरोह ने कितने पैसे की ठगी की?
पांच महीने में गिरोह ने करोड़ रुपए से ज्यादा की ठगी की, जिसमें रोजाना औसतन 50 से 70 हजार रुपए कमाए जाते थे.
गिरोह का सरगना कौन है?
गिरोह का सरगना प्रबल प्रताप सिंह परिहार है, जो स्क्रिप्ट और अमेरिकी नागरिकों का डेटा मुहैया कराता था.
पुलिस ने कमरे से क्या-क्या जब्त किया?
पुलिस ने 4 लैपटॉप, 7 मोबाइल, 4 हेडफोन, स्क्रिप्ट, ग्राहकों की डिटेल और अन्य दस्तावेज जब्त किए, जिनकी कीमत करीब 3 लाख 75 हजार रुपए है.
यह मामला FBI तक क्यों पहुंचेगा?
चूंकि गिरोह का निशाना सीधे अमेरिकी नागरिक थे, इसलिए ग्वालियर पुलिस विदेश मंत्रालय के जरिए इसकी जानकारी FBI को भेजेगी.
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