तमिलनाडु के धरापुरम से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक कृषि मजदूर अपना ही कटा हुआ हाथ लेकर सरकारी अस्पताल पहुंच गया। इस 32 वर्षीय मजदूर का नाम मुनियांडी है, जिसका एक खेत में काम के बंटवारे को लेकर हुए विवाद के बाद दरांती से हमला कर हाथ शरीर से अलग कर दिया गया था। इस भयानक हमले के बाद अस्पताल परिसर में हड़कंप मच गया और डॉक्टरों ने तुरंत इलाज की प्रक्रिया शुरू की।
नारियल तोड़ने के काम को लेकर हुआ था विवाद
पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरी घटना धरापुरम के नजदीक गाउंडाचिपालयम में स्थित ईश्वरन के कृषि फार्म पर घटित हुई। पीड़ित मुनियांडी मूल रूप से डिंडीगुल जिले का निवासी है और उसने कुछ ही समय पहले इस खेत पर काम करना शुरू किया था। उसी कृषि फार्म पर रंजीत नाम का एक अन्य 32 वर्षीय मजदूर पिछले कई सालों से नारियल तोड़ने का काम कर रहा था।
जब मुनियांडी ने वहां काम करना शुरू किया, तो दोनों के बीच नारियल तोड़ने के काम के अधिकार और हिस्सेदारी को लेकर अनबन शुरू हो गई। शुक्रवार को यह मामूली विवाद अचानक बेहद उग्र हो गया और दोनों के बीच तीखी बहस होने लगी। आरोप है कि इसी दौरान गुस्से में आकर रंजीत ने मुनियांडी पर दरांती से हमला कर दिया, जिससे मुनियांडी का हाथ कलाई से कटकर पूरी तरह अलग हो गया।
कटे हुए हाथ को प्लास्टिक में रख पहुंचे अस्पताल
इस जानलेवा हमले के बाद मुनियांडी गंभीर रूप से घायल हो गया और अत्यधिक दर्द से तड़प रहा था। इसके बावजूद उसने गजब का हौसला दिखाया और जमीन पर गिरे अपने कटे हुए हाथ को उठाकर एक प्लास्टिक कवर में सुरक्षित रख लिया। इसके बाद वह खुद ही एक प्राइवेट एंबुलेंस का प्रबंध करके धरापुरम के सरकारी अस्पताल की ओर निकल पड़ा।
जब मुनियांडी अपने हाथ में अपना ही कटा हुआ अंग लेकर अस्पताल पहुंचा, तो वहां मौजूद नर्स और अन्य स्वास्थ्यकर्मी इस भयानक दृश्य को देखकर दंग रह गए। डॉक्टरों ने तुरंत उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए प्राथमिक उपचार शुरू किया। हालांकि, धरापुरम के इस सरकारी अस्पताल में कटे हुए अंगों को दोबारा जोड़ने के लिए आवश्यक जटिल सर्जिकल सुविधाएं और विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध नहीं थे।
आइस बॉक्स में सुरक्षित रखा गया अंग
पीड़ित के हाथ को दोबारा जोड़ने की संभावनाओं को बनाए रखने के लिए डॉक्टरों ने तत्परता दिखाई। उन्होंने कटे हुए हाथ को एक आइस बॉक्स में सुरक्षित रख दिया ताकि उसके ऊतक जीवित रह सकें। इसके बाद डॉक्टरों ने मुनियांडी को बेहतर और विशेषज्ञ इलाज के लिए तुरंत कोयंबटूर के सरकारी अस्पताल में रेफर कर दिया, जहां इस तरह की सर्जरी की सुविधाएं मौजूद हैं। इन मामलों में समय पर इलाज मिलना ही अंग को बचाने का एकमात्र तरीका होता है।
इस हिंसक घटना की सूचना मिलने के बाद मुलानूर पुलिस ने संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस प्रशासन इस मामले की बारीकी से जांच कर रहा है और हमले के पीछे के असल कारणों का पता लगाने के साथ-साथ आरोपी की तलाश में जुटा हुआ है। फिलहाल घायल मजदूर का कोयंबटूर में इलाज जारी है जहां विशेषज्ञ डॉक्टर उसकी कलाई को दोबारा जोड़ने की कोशिशों में लगे हैं।



















