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हाईकोर्ट से मिली 6 महीने की सजा पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, यूट्यूबर गुलशन पाहुजा को तुरंत रिहा करने का आदेशभारत
3 सित॰ 2026, 3:49 pm (28 दिन पहले)· 0

हाईकोर्ट से मिली 6 महीने की सजा पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, यूट्यूबर गुलशन पाहुजा को तुरंत रिहा करने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने जजों और न्यायिक व्यवस्था पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में यूट्यूबर गुलशन पाहुजा को सुनाई गई 6 महीने की जेल की सजा पर रोक लगा दी है। अदालत ने लगभग 48 दिन हिरासत में बिता चुके पाहुजा की तुरंत रिहाई का आदेश देते हुए नोटिस जारी किया है।

सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक अवमानना के मामले में यूट्यूबर गुलशन पाहुजा को एक बड़ी राहत प्रदान की है। शीर्ष अदालत ने दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा पाहुजा को सुनाई गई 6 महीने की जेल की सजा पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए यूट्यूबर को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया। इसके अलावा, अदालत ने इस पूरी प्रक्रिया के तहत संबंधित पक्षों को नोटिस भी जारी किया है, और आदेश की कॉपी सीधे (दस्ती) सौंपने के निर्देश दिए हैं।

हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

यूट्यूबर गुलशन पाहुजा ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था, जिसमें उन्हें जजों और पूरी न्यायिक व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाने के कारण आपराधिक अवमानना का दोषी करार दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान पाहुजा के वकील ने पीठ के सामने यह तर्क रखा कि उनके मुवक्किल इस मामले में पहले ही लगभग 48 दिन हिरासत में बिता चुके हैं। वकील की दलीलों को सुनने और मामले के तथ्यों पर गौर करने के बाद शीर्ष अदालत ने 6 महीने की अवमानना सजा पर रोक लगाते हुए उनकी रिहाई का रास्ता साफ कर दिया।

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मई में हाईकोर्ट ने सुनाया था सजा का आदेश

इस कानूनी विवाद की शुरुआत तब हुई थी जब दिल्ली हाईकोर्ट ने यूट्यूबर के आचरण को लेकर स्वतः संज्ञान लेते हुए अवमानना की कार्रवाई शुरू की थी। मई के महीने में जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डुडेजा की पीठ ने गुलशन पाहुजा को आपराधिक अवमानना का दोषी ठहराया था। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया था कि पाहुजा ने अपने कृत्य पर किसी भी तरह का पछतावा नहीं दिखाया है, जिसके बाद उन्हें 6 महीने की जेल की सजा सुनाई गई थी और हिरासत में भेज दिया गया था।

अदालत के भीतर न्यायिक प्रणाली पर उठाए थे सवाल

दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाहुजा के व्यवहार पर सख्त टिप्पणी की थी। अदालत के अनुसार, जब मामले की सुनवाई चल रही थी, तब भी उन्होंने न्यायिक व्यवस्था के खिलाफ आपत्तिजनक बयानबाजी जारी रखी। उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि उन्हें भारतीय अदालतों से न्याय मिलने की कोई उम्मीद नहीं बची है। इसके अलावा, उन्होंने अदालतों की कार्यप्रणाली और कथित मनमर्जी की तुलना तानाशाही से भी कर दी थी। हाईकोर्ट ने इन टिप्पणियों को अवमानना माना था, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के नए आदेश से पाहुजा को बड़ी कानूनी राहत मिल गई है।

सवाल-जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने यूट्यूबर गुलशन पाहुजा को क्या राहत दी है?
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा पाहुजा को दी गई 6 महीने की जेल की सजा पर रोक लगा दी है और उन्हें तुरंत रिहा करने का आदेश दिया है।
गुलशन पाहुजा कितने दिन जेल या हिरासत में बिता चुके हैं?
पाहुजा के वकील के अनुसार, वह इस मामले में पहले ही लगभग 48 दिन हिरासत में बिता चुके हैं।
दिल्ली हाईकोर्ट ने पाहुजा को किस मामले में सजा सुनाई थी?
हाईकोर्ट ने जजों और न्यायिक व्यवस्था पर आरोप लगाने के लिए स्वतः संज्ञान लेते हुए उन्हें आपराधिक अवमानना का दोषी ठहराया था।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की बेंच में कौन-कौन से जज शामिल थे?
सुप्रीम कोर्ट में यह आदेश जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की खंडपीठ ने जारी किया।
दिल्ली हाईकोर्ट की किस बेंच ने पाहुजा को सजा दी थी और क्या टिप्पणी की थी?
मई में जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डुडेजा की बेंच ने सजा सुनाई थी, और कहा था कि पाहुजा ने अपने कृत्य पर कोई पछतावा नहीं दिखाया तथा अदालतों की तुलना तानाशाही से की।
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