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हर मंगलवार सांसदों संग संवाद का नया मंच बना प्रधानमंत्री का मंगल मिलनभारत
17 सित॰ 2026, 12:38 pm (6 घंटे पहले)· 0

हर मंगलवार सांसदों संग संवाद का नया मंच बना प्रधानमंत्री का मंगल मिलन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर मंगलवार सांसदों के साथ अनौपचारिक संवाद के लिए मंगल मिलन का आयोजन करते हैं, जिसमें जमीनी मुद्दों और युवाओं से जुड़ाव पर मंथन होता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली और बातचीत के तौर-तरीकों में एक खास व्यवस्था शामिल है, जिसे मंगल मिलन के नाम से जाना जाता है। यह कोई तयशुदा सरकारी औपचारिकता वाली बैठक नहीं है, बल्कि हर हफ्ते मंगलवार के दिन सांसदों के साथ सीधे संपर्क साधने की एक अनौपचारिक व्यवस्था है। इस चौपाल का मकसद नए भारत के निर्माण से जुड़े विचारों पर चर्चा करना और देश के नीतिगत रोडमैप को जमीनी हकीकत से जोड़ना है। सबका कल्याण और मंगल हो, इसी भावना को केंद्र में रखकर इस पूरी प्रक्रिया को तैयार किया गया है, ताकि संसद सदस्यों और शीर्ष नेतृत्व के बीच सीधा और पारदर्शी तालमेल बना रहे।

युवाओं और छात्रों से सीधा जुड़ाव बनाने की सोच

इस संवाद मंच की पृष्ठभूमि को लेकर भारतीय जनता पार्टी के सांसद मनोज तिवारी ने जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि इस व्यवस्था की बुनियाद युवाओं और विद्यार्थियों को सीधे प्रशासनिक और सरकारी कदमों से जोड़ने के इरादे से रखी गई थी। सबसे पहली बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने मौजूद सांसदों से अपील की थी कि वे अपने-अपने इलाकों में युवा पीढ़ी से लगातार संवाद बनाए रखें। इसके साथ ही छात्रों के बीच जागरूकता बढ़ाने और कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा ले रहे भारतीय खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाने के लिए भी जनप्रतिनिधियों को विशेष रूप से प्रेरित किया गया था। इस मंच के जरिए सांसदों को केवल राजनीति तक सीमित न रहकर समाज के बुनियादी वर्गों के बीच सक्रिय रहने का संदेश दिया गया।

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जमीनी चुनौतियों से लेकर नए विचारों पर खुला मंथन

सांसद बांसुरी स्वराज के अनुसार यह एक ऐसा मंच है जहां किसी भी औपचारिकता के बिना बात रखी जा सकती है। बैठक में हर सांसद अपने क्षेत्र की वास्तविक कठिनाइयों और रोजमर्रा की समस्याओं को सामने रखता है। इसके साथ ही भविष्य की योजनाओं और नए विचारों पर प्रधानमंत्री के साथ विस्तार से चर्चा होती है। बांसुरी स्वराज का कहना है कि प्रधानमंत्री इस मंच का उपयोग हर जरूरी पहलू को समझने और जनप्रतिनिधियों को आम जनता के करीब ले जाने के लिए करते हैं। यहां होने वाली बातचीत केवल शब्दों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि वे सुझाव आगे चलकर असल योजनाओं और जमीनी कामकाज के रूप में तब्दील होते हैं।

सवाल-जवाब

मंगल मिलन क्या है?
यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सांसदों के बीच हर मंगलवार को होने वाली एक अनौपचारिक बैठक है, जिसमें देश के विकास और जनहित से जुड़े मुद्दों पर खुली चर्चा होती है।
मंगल मिलन की शुरुआत किस सोच के साथ हुई थी?
सांसद मनोज तिवारी के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य युवाओं और छात्रों को सरकारी प्रयासों और राष्ट्रीय कार्यक्रमों से सीधे जोड़ना था।
पहली बैठक में प्रधानमंत्री ने सांसदों को क्या निर्देश दिए थे?
प्रधानमंत्री ने सांसदों से युवाओं से संवाद बढ़ाने, छात्रों को जागरूक करने और कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाने का आह्वान किया था।
बांसुरी स्वराज ने मंगल मिलन के बारे में क्या बताया?
सांसद बांसुरी स्वराज ने बताया कि इस मंच पर जमीनी चुनौतियों से लेकर नए विचारों पर खुली चर्चा होती है और ये बातचीत असल कामकाज में बदलती है।
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टिप्पणियाँ 4

Ravikash Gupta@ravikash·5 घंटे पहले

शीर्ष नेतृत्व और जनप्रतिनिधियों के बीच ऐसा अनौपचारिक संवाद नीति-निर्माण की प्रक्रिया को अधिक व्यावहारिक और प्रभावी बनाता है। जब स्थानीय स्तर की प्रशासनिक बाधाएं और जन-आकांक्षाएं सीधे नीतिगत विमर्श का हिस्सा बनती हैं, तो इससे विकास योजनाओं के ज़मीनी क्रियान्वयन में तेजी आती है। युवाओं और क्षेत्रीय प्राथमिकताओं पर लगातार मंथन करने से न केवल जन कल्याणकारी योजनाओं की प्रभावशीलता बढ़ती है, बल्कि आने वाले समय में आर्थिक और सामाजिक नीतियों को स्थानीय जरूरतों के अनुसार ढालने में भी मदद मिलेगी।

Nyra Kaif@nyra-kaif·5 घंटे पहले

राजनीतिक संवाद की पुरानी औपचारिक कार्यशैली को बदलकर अनौपचारिक 'चौपाल' की संस्कृति अपनाना आधुनिक यूथ कल्चर और ट्रेंड्स के बेहद अनुकूल है। युवाओं से सीधा जुड़ाव और खेलों से लेकर रोजमर्रा के जीवन के मुद्दों पर बात करना नेतृत्व की पहुंच को अधिक प्रासंगिक और मानवीय बनाता है। जब जनप्रतिनिधि युवाओं और समाज के जमीनी ट्रेंड्स को समझते हैं, तो राजनीति दूर-दराज का प्रशासनिक काम न रहकर आम लोगों के दैनिक जीवन और जीवनशैली से सीधे जुड़ जाती है। यह दृष्टिकोण नई पीढ़ी में शासन के प्रति रुचि और जुड़ाव बढ़ाने में मददगार साबित होगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·5 घंटे पहले

सांसदों और शीर्ष नेतृत्व के बीच यह अनौपचारिक संवाद जनसुरक्षा और कानून-व्यवस्था के जमीनी मुद्दों को सीधे नीतिगत स्तर पर पहुँचाने का एक प्रभावी माध्यम बन सकता है। जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्रों में अपराध नियंत्रण, साइबर सुरक्षा और स्थानीय पुलिसिंग से जुड़ी व्यावहारिक चुनौतियों को करीब से देखते हैं। यदि ऐसे संवाद मंचों का उपयोग जमीनी स्तर की सुरक्षा समस्याओं और कानूनी सुधारों से जुड़े फीडबैक को सीधे शीर्ष स्तर तक पहुँचाने के लिए हो, तो इससे न केवल सार्वजनिक सुरक्षा ढाँचे को मजबूती मिलेगी बल्कि अपराध नियंत्रण के लिए अधिक व्यावहारिक नीतियाँ भी बन सकेंगी।

Arjun Mehta@arjun-mehta·5 घंटे पहले

करण की बात को आगे बढ़ाते हुए राजनीतिक और संसदीय शासन व्यवस्था के नजरिए से देखें तो 'मंगल मिलन' जैसा अनौपचारिक मंच शीर्ष नेतृत्व और सांसदों के बीच नीतिगत फीडबैक चक्र को छोटा करता है। संसदीय लोकतंत्र में अक्सर नीतियां केंद्र में बनती हैं, लेकिन उनका असर स्थानीय प्रशासनिक क्रियान्वयन पर निर्भर करता है। जब सांसद औपचारिक समितियों के लंबे इंतजार के बिना सीधे प्रधानमंत्री को जमीनी रुकावटों और जनभावनाओं से अवगत कराते हैं, तो नीतिगत सुधारों में गति आती है। यह व्यवस्था संसदीय जवाबदेही को मजबूत करने के साथ-साथ शासन में व्यावहारिक लचीलापन भी लाती है।

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