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हिमाचल प्रदेश के लाहौल स्पीति में ड्रिलबुरी पहाड़ी पर बर्फबारी का कहर, दो महिला श्रद्धालुओं की मौत और कई घायलहिमाचल प्रदेश
17 सित॰ 2026, 3:02 pm (5 दिन पहले)· 0

हिमाचल प्रदेश के लाहौल स्पीति में ड्रिलबुरी पहाड़ी पर बर्फबारी का कहर, दो महिला श्रद्धालुओं की मौत और कई घायल

हिमाचल प्रदेश के लाहौल स्पीति स्थित ड्रिलबुरी पहाड़ी की परिक्रमा के दौरान अचानक हुई भारी बर्फबारी से दो महिला श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि बच्चों और बुजुर्गों समेत पांच से छह लोग घायल हो गए हैं।

हिमाचल प्रदेश के लाहौल स्पीति जिले में एक धार्मिक यात्रा के दौरान मौसम अचानक बिगड़ गया, जिसके चलते दो महिला श्रद्धालुओं की जान चली गई। लाहौल घाटी में स्थित पवित्र ड्रिलबुरी पहाड़ी की परिक्रमा करने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे हुए थे, लेकिन इसी दौरान गुरुवार सुबह अचानक भारी बर्फबारी शुरू हो गई, जिससे श्रद्धालुओं के लिए गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गई।

इस अप्रत्याशित बर्फबारी के कारण हुए हादसों में दो महिलाओं की मौत हो गई। इसके अलावा, इस धार्मिक यात्रा के दौरान बर्फ पर पैर फिसलने, अत्यधिक ऊंचाई पर होने वाली स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों यानी हाई एल्टीट्यूड सिकनेस और हाइपोथर्मिया की चपेट में आने से पांच से छह श्रद्धालु घायल भी हुए हैं। इन घायलों में बुजुर्ग और छोटे बच्चे भी शामिल हैं, जिन्हें तुरंत राहत पहुंचाते हुए केलांग अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज किया जा रहा है।

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डॉक्टरों ने दी जानकारी और अस्पताल में चल रहा इलाज

क्षेत्रीय अस्पताल की वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सुषमा ने इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि ड्रिलबुरी परिक्रमा के दौरान जान गंवाने वाली दोनों महिला श्रद्धालुओं के शवों को अस्पताल लाया गया है। दोनों शवों का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है, और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों की पूरी स्थिति और स्पष्ट रूप से सामने आ सकेगी।

घटना के तुरंत बाद स्थानीय प्रशासन और बचाव दलों ने सक्रियता दिखाते हुए घायलों को उपचार के लिए क्षेत्रीय अस्पताल केलांग पहुंचाया। अस्पताल में डॉक्टरों की देखरेख में सभी घायलों का इलाज जारी है और उनकी स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

हजारों की संख्या में पहुंचे थे श्रद्धालु और घाटी में अन्य जगहों पर भी हिमपात

डॉ. सुषमा ने आगे बताया कि परिक्रमा से लौटने वाले कई श्रद्धालु बर्फबारी की वजह से गंभीर रूप से चोटिल हो गए हैं। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ठंड और बर्फीली हवाओं के बीच चलने के कारण कई लोगों में हाई एल्टीट्यूड सिकनेस के स्पष्ट लक्षण देखने को मिले हैं, जबकि कुछ लोग बर्फीले रास्तों पर फिसलने के कारण घायल हुए हैं। जानकारी के अनुसार, इस धार्मिक परिक्रमा में शामिल होने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे।

गौरतलब है कि गुरुवार को लाहौल स्पीति समेत हिमाचल प्रदेश के कई अन्य ऊंचाई वाले इलाकों में भी मौसम ने करवट ली और हिमपात हुआ। लाहौल घाटी के बारालाचा, शिंकुला और रोहतांग दर्रे जैसे प्रसिद्ध स्थानों पर भी बर्फबारी दर्ज की गई है। इसके अलावा मनाली की ऊंची चोटियों पर भी बर्फ की चादर बिछ गई है, जिससे पूरे क्षेत्र में ठंड का जोरदार आगाज हो गया है।

सवाल-जवाब

यह घटना किस स्थान पर हुई है?
यह घटना हिमाचल प्रदेश के लाहौल स्पीति जिले में ड्रिलबुरी पहाड़ी पर हुई।
इस हादसे में कितने लोगों की मौत हुई है?
बर्फबारी के दौरान हुई इस दुर्घटना में दो महिला श्रद्धालुओं की मौत हो गई है।
कितने लोग घायल हुए हैं और उनका इलाज कहां चल रहा है?
इस घटना में पांच से छह श्रद्धालु घायल हुए हैं, जिनका इलाज केलांग अस्पताल में चल रहा है।
घायलों को किस प्रकार की स्वास्थ्य समस्याएं हुई थीं?
घायलों को बर्फ पर फिसलने से चोटें लगी हैं और कई लोगों में हाई एल्टीट्यूड सिकनेस व हाइपोथर्मिया के लक्षण पाए गए हैं।
हिमाचल प्रदेश में किन अन्य जगहों पर बर्फबारी दर्ज की गई है?
लाहौल घाटी के बारालाचा, शिंकुला और रोहतांग के अलावा मनाली की ऊंची चोटियों पर भी हिमपात हुआ है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Ravikash Gupta@ravikash·3 दिन पहले

यह दुखद घटना दर्शाती है कि हिमालयी क्षेत्रों में अचानक बदलते मौसम और बढ़ती प्राकृतिक अनिश्चितताओं का पर्यटन, स्थानीय अर्थव्यवस्था और तीर्थाटन पर कितना गहरा प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे, आपदा प्रबंधन और त्वरित चेतावनी प्रणालियों को अधिक मजबूत करना अनिवार्य हो गया है, ताकि इस प्रकार के जलवायु-प्रेरित जोखिमों से बचा जा सके।

Arjun Mehta@arjun-mehta·3 दिन पहले

हिमालयी राज्यों में तीर्थाटन और उच्च तुंगता वाले पर्यटन मार्गों पर बढ़ती भीड़ के बीच आपदा प्रबंधन और मौसम की पूर्व चेतावनी प्रणालियों का अभाव एक गंभीर नीतिगत चूक को उजागर करता है। जब तक सरकारें और स्थानीय प्रशासन ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों में रियल-टाइम मॉनिटरिंग, संचार नेटवर्क और चिकित्सा शिविरों को दुरुस्त नहीं करेंगे, तब तक जलवायु परिवर्तन और चरम मौसम के कारण होने वाली ऐसी त्रासदियों से नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना असंभव बना रहेगा।

Rohan Verma@rohan-verma·4 दिन पहले

यह घटना पर्वतीय क्षेत्रों में आयोजित होने वाली धार्मिक यात्राओं के दौरान मौसम के अचानक बदलाव से उत्पन्न होने वाले गंभीर जोखिमों को उजागर करती है। ड्रिलबुरी पहाड़ी जैसी कठिन भौगोलिक स्थिति में हजारों श्रद्धालुओं का जुटना और बिना पुख्ता आपदा प्रबंधन के ऐसी यात्राओं का संचालन भविष्य के लिए एक बड़ा सबक है। अत्यधिक ऊंचाई और हाइपोथर्मिया से निपटने के लिए प्रशासन को भविष्य में तीर्थयात्रियों के लिए स्वास्थ्य जांच और मौसम चेतावनी तंत्र को अनिवार्य करना चाहिए।

Karan Malhotra@karan-malhotra·4 दिन पहले

यह हादसा पर्वतीय क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन और तीर्थयात्रा विनियमन की गंभीर खामियों को उजागर करता है। जब हजारों की संख्या में श्रद्धालु उच्च तुंगता वाले दुर्गम क्षेत्रों में जाते हैं, तो स्थानीय प्रशासन और आयोजकों की यह कानूनी जिम्मेदारी होती है कि वे मौसम की सटीक चेतावनियों के आधार पर आवाजाही नियंत्रित करें। इस मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद प्रशासनिक लापरवाही और सुरक्षा मानकों के उल्लंघन को लेकर कानूनी पहलुओं की गहन जाँच की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोका जा सके।

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