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हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की 10 गारंटियों के चार साल पूरे होने पर सुधीर शर्मा का तंज, बताया चतुर्वार्षिक श्राद्धहिमाचल प्रदेश
1 सित॰ 2026, 1:55 pm (67 दिन पहले)· 4

हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की 10 गारंटियों के चार साल पूरे होने पर सुधीर शर्मा का तंज, बताया चतुर्वार्षिक श्राद्ध

हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव से चार साल पहले कांग्रेस द्वारा दी गई 10 गारंटियों को लेकर भाजपा विधायक सुधीर शर्मा ने सरकार पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने इन वादों को गारंटियों का चतुर्वार्षिक श्राद्ध करार देते हुए रोजगार, आउटसोर्स भर्तियों और अन्य मुद्दों पर तीखे सवाल उठाए हैं।

शिमला में साल 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले 31 अगस्त के दिन कांग्रेस की तरफ से 10 गारंटियों का ऐलान किया गया था। अब इन वादों के चार साल पूरे होने पर भारतीय जनता पार्टी के विधायक सुधीर शर्मा ने प्रदेश सरकार पर कड़ा प्रहार किया है। सुधीर शर्मा ने इन गारंटियों पर कटाक्ष करते हुए इसे गारंटियों का चतुर्वार्षिक श्राद्ध बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव जीतने से पहले और सत्ता संभालने के बाद जनता के साथ बड़े-बड़े दावे किए गए थे, लेकिन चार साल बीत जाने के बाद भी जमीनी स्तर पर ज्यादातर गारंटियां गायब हैं।

गारंटियों के ऐलान और वादों की याद

विधानसभा परिसर में पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत के दौरान सुधीर शर्मा ने याद दिलाया कि 31 अगस्त 2022 को शिमला में छत्तीसगढ़ के तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कांग्रेस की 10 प्रमुख गारंटियों का एलान किया था। उन्होंने कहा कि इन गारंटियों को चार साल का समय पूरा हो चुका है, इसलिए अब कांग्रेस को जनता को यह हिसाब देना चाहिए कि इनमें से कितनी गारंटियां वास्तव में पूरी की गई हैं। सुधीर शर्मा ने मुख्य रूप से रोजगार के वादे का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार ने पहली ही कैबिनेट बैठक में एक लाख सरकारी नौकरियां देने का वादा किया था, लेकिन युवाओं को उस पैमाने पर रोजगार नहीं मिला। उन्होंने सरकार पर युवाओं के साथ खुला धोखा करने का आरोप लगाया।

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आउटसोर्स भर्तियों और वेतन पर सवाल

भाजपा विधायक ने प्रदेश में चल रही आउटसोर्स भर्तियों को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि अलग-अलग सरकारी विभागों में आउटसोर्स के जरिए नियुक्तियां धड़ल्ले से की जा रही हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर प्रदेश में कुल कितनी आउटसोर्स कंपनियां सक्रिय हैं और वे किसके नाम पर पंजीकृत हैं, लेकिन विधानसभा में इन सवालों के स्पष्ट जवाब देने से बचा जा रहा है। सुधीर शर्मा ने आउटसोर्स कर्मचारियों के वेतन में भारी अंतर पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने दावा किया कि पीजीआई में लगभग 90 हजार रुपये महीने के वेतन पर हिम केयर फैसिलिटेटर रखे गए हैं, जबकि डॉक्टरों की भर्ती आउटसोर्स के जरिए महज 34 हजार रुपये के वेतन पर की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सदन के अंदर और बाहर जरूरी सूचनाएं छिपा रही है।

सदन में सवालों के जवाब न मिलने का आरोप

सुधीर शर्मा ने यह भी आरोप लगाया कि विधानसभा के भीतर उनके द्वारा उठाए गए सवालों के संतोषजनक जवाब नहीं दिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि कई बार उनके सवाल सूची से हटा दिए जाते हैं या यह कहकर टाल दिया जाता है कि जानकारी जुटाई जा रही है। उन्होंने हैरानी जताई कि जो जानकारियां आरटीआई के माध्यम से आसानी से मिल जाती हैं, उन्हीं सवालों के जवाब विधानसभा के पटल पर नहीं दिए जाते हैं।

नैनो यूरिया मामले और एसआईटी पर तंज

नैनो यूरिया के मुद्दे पर विधानसभा में हुए विवाद को लेकर भी सुधीर शर्मा ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सदन में यह मुद्दा उठाया गया था कि बागवानों को जबरन नैनो यूरिया लेने के निर्देश दिए जा रहे हैं, जबकि बाद में सरकार की तरफ से सफाई दी गई कि केंद्र सरकार की तरफ से ऐसा कोई आदेश या अधिसूचना जारी नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि जब यह बात स्पष्ट ही नहीं है कि बागवानों को नैनो यूरिया खरीदने के लिए कौन कह रहा है, तो इसकी उच्चस्तरीय जांच की मांग उठी है। इस पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि एसआईटी गठित करने में इस सरकार की बड़ी विशेषज्ञता है, इसलिए इस मामले की जांच के लिए भी एक एसआईटी बना देनी चाहिए।

राहुल गांधी के समर्थन में प्रदर्शन पर वार

राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के विरोध में कांग्रेस पार्टी की तरफ से किए गए प्रदर्शन पर भी सुधीर शर्मा ने करारा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को विपक्ष में रहकर आंदोलन करने की आदत नहीं है और सत्ता में रहते हुए भी विधानसभा के बाहर प्रदर्शन करके इस सरकार ने एक साल पहले से ही विपक्ष में बैठने की ट्रेनिंग शुरू कर दी है। सुधीर शर्मा ने तंज कसते हुए यह भी कहा कि विपक्ष की बेंच पर बैठने के लिए भी विधायकों की जरूरत पड़ती है, लेकिन आने वाले समय में जनता कांग्रेस के विधायकों को विपक्ष के लायक भी नहीं छोड़ेगी। गौरतलब है कि साल 2022 के चुनाव में सुधीर शर्मा ने कांग्रेस के टिकट पर ही चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी, लेकिन मुख्यमंत्री के साथ मतभेदों के चलते उन्होंने बाद में भाजपा का दामन थाम लिया था।

सवाल-जवाब

कांग्रेस की 10 गारंटियों की घोषणा शिमला में कब और किसने की थी?
कांग्रेस की 10 गारंटियों की घोषणा 31 अगस्त 2022 को शिमला में तत्कालीन छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने की थी।
सुधीर शर्मा ने कांग्रेस की गारंटियों को क्या नाम दिया है?
सुधीर शर्मा ने कांग्रेस की गारंटियों को 'गारंटियों का चतुर्वार्षिक श्राद्ध' करार दिया है।
सुधीर शर्मा ने रोजगार को लेकर सरकार पर क्या आरोप लगाया?
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने पहली ही कैबिनेट में एक लाख सरकारी नौकरियां देने का वादा किया था, लेकिन युवाओं को उस अनुपात में रोजगार नहीं मिला।
आउटसोर्स भर्तियों को लेकर क्या मुख्य सवाल उठाया गया?
सुधीर शर्मा ने पूछा कि प्रदेश में कितनी आउटसोर्स कंपनियां काम कर रही हैं और वे किसके नाम पर पंजीकृत हैं, तथा पीजीआई और डॉक्टरों के वेतन में भारी अंतर क्यों है।
नैनो यूरिया मामले में क्या विवाद सामने आया?
सदन में आरोप लगाया गया कि बागवानों को नैनो यूरिया लेने के लिए कहा जा रहा है, जबकि सरकार ने कहा कि केंद्र से ऐसी कोई अधिसूचना जारी नहीं हुई है।
सुधीर शर्मा वर्तमान में किस पार्टी से जुड़े हैं?
सुधीर शर्मा वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी के विधायक हैं, जिन्होंने 2022 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीता था।
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