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हिमाचल ड्रोन मामले में छात्र गंभीर साइबर जालसाजी का शिकार, सीबीआई जांच की उठी मांगहिमाचल प्रदेश
2 नव॰ 2026, 8:39 am (4 दिन पहले)· 0

हिमाचल ड्रोन मामले में छात्र गंभीर साइबर जालसाजी का शिकार, सीबीआई जांच की उठी मांग

राजकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज हमीरपुर के छात्र सर्वेश शर्मा के ड्रोन प्रोजेक्ट फर्जीवाड़े और हॉस्टल से गिरने के मामले में निष्पक्ष पड़ताल के लिए सीबीआई जांच की पैरवी की गई है।

हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर स्थित राजकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज में कंप्यूटर इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे छात्र सर्वेश शर्मा के साथ हुए फर्जीवाड़े और उसके बाद हॉस्टल की तीसरी मंजिल से संदिग्ध परिस्थितियों में गिरने की घटना ने तूल पकड़ लिया है। इस पूरे मामले में छात्र के गंभीर साइबर जालसाजी का शिकार होने की बात सामने आने के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से विस्तृत और निष्पक्ष पड़ताल कराने की मांग उठाई गई है। वर्तमान में घायल छात्र चंडीगढ़ स्थित पीजीआई अस्पताल में उपचाराधीन है, जहां राज्य के तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने पहुंचकर उसकी सेहत की जानकारी ली और उसके जल्द स्वस्थ होने की कामना की।

छात्रों के प्रोजेक्ट्स को निशाना बना रहे साइबर अपराधी

तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने अस्पताल में पीड़ित छात्र से मुलाकात के दौरान कहा कि सर्वेश शर्मा गंभीर साइबर अपराध के जाल में फंसे हैं और इस पूरे प्रकरण की गहराई से जांच होनी बेहद आवश्यक है। आमतौर पर डिजिटल दुनिया में साइबर अपराध के जरिए आर्थिक धोखाधड़ी, बैंक खातों में सेंधमारी और आम लोगों की रकम हड़पने के मामले देखने को मिलते रहे हैं। हालांकि, किसी होनहार विद्यार्थी के शैक्षणिक एवं तकनीकी प्रोजेक्ट को निशाना बनाकर इस स्तर का फर्जीवाड़ा रचा जाना बेहद चिंताजनक और गंभीर विषय बन चुका है।

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सीबीआई को जांच सौंपने और केंद्र से कड़े कदम उठाने की अपील

पूरे घटनाक्रम की परतें खोलने और पर्दे के पीछे छिपे असली दोषियों की जवाबदेही तय करने के लिए मामले को केंद्रीय जांच ब्यूरो को सौंपने का सुझाव दिया गया है। राजेश धर्माणी का मानना है कि केवल केंद्रीय स्तर की स्वतंत्र जांच एजेंसी ही इस जटिल डिजिटल नेटवर्क की तह तक पहुंच सकती है। इसके साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि बदलते दौर में साइबर अपराध के इस नए और खतरनाक स्वरूप को गंभीरता से लिया जाए।

छात्रों की बौद्धिक संपदा और शोध कार्यों की सुरक्षा पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को मिलकर एक ठोस रणनीति तैयार करनी चाहिए। शैक्षणिक संस्थानों में विद्यार्थियों की तकनीकी परियोजनाओं, नवाचारों और शैक्षणिक प्रयासों को ऑनलाइन ठगों से सुरक्षित रखने के लिए कड़े निगरानी तंत्र की जरूरत है। डिजिटल युग में बढ़ते जोखिमों को देखते हुए साइबर सुरक्षा से जुड़े कानूनों और जांच प्रणाली को इतना सुदृढ़ बनाया जाना चाहिए ताकि भविष्य में किसी अन्य युवा शोधकर्ता या विद्यार्थी को इस मानसिक और शारीरिक आघात से न गुजरना पड़े।

साढ़े तीन करोड़ की फंडिंग का दावा और संदिग्ध हादसा

इस पूरे विवाद की शुरुआत राजकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज हमीरपुर (बडू) के छात्र सर्वेश शर्मा द्वारा 23 सितंबर 2026 को किए गए एक दावे के साथ हुई थी। छात्र ने घोषणा की थी कि उसे भारतीय सेना के लिए उन्नत ड्रोन विकसित करने के उद्देश्य से साढ़े तीन करोड़ रुपये की भारी-भरकम फंडिंग मंजूर हुई है। इस खबर ने स्थानीय स्तर पर खूब सुर्खियां बटोरी थीं।

हालांकि यह कामयाबी कुछ ही समय में बड़े विवाद में तब्दील हो गई जब 27 अक्तूबर को भारतीय सेना ने आधिकारिक रूप से सर्वेश शर्मा के दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए उसे फर्जी करार दे दिया। सेना की ओर से स्पष्टीकरण आने के बाद उसी दिन संदिग्ध हालात में सर्वेश अपने कॉलेज हॉस्टल की तीसरी मंजिल से नीचे गिर पड़े और गंभीर रूप से घायल हो गए। प्राथमिक उपचार के बाद उनकी नाजुक हालत को देखते हुए उन्हें बेहतर इलाज के लिए पीजीआई चंडीगढ़ रेफर किया गया, जहां उनका उपचार जारी है।

सवाल-जवाब

सर्वेश शर्मा कौन हैं और वे कहां अध्ययनरत हैं?
सर्वेश शर्मा राजकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज हमीरपुर (बडू) में कंप्यूटर इंजीनियरिंग के छात्र हैं।
सर्वेश शर्मा ने ड्रोन प्रोजेक्ट को लेकर क्या दावा किया था?
उन्होंने 23 सितंबर 2026 को दावा किया था कि उन्हें सेना की ओर से ड्रोन बनाने के लिए साढ़े तीन करोड़ रुपये की फंडिंग मिली है।
भारतीय सेना ने इस दावे पर क्या रुख अपनाया?
भारतीय सेना ने 27 अक्तूबर को छात्र के इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे फर्जी करार दिया।
सर्वेश शर्मा के साथ क्या दुर्घटना हुई और वे कहां भर्ती हैं?
दावा खारिज होने वाले दिन ही वे कॉलेज हॉस्टल की तीसरी मंजिल से संदिग्ध हालात में गिर गए थे और गंभीर हालत में पीजीआई चंडीगढ़ में भर्ती हैं।
तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने क्या मांग की है?
उन्होंने कहा कि छात्र साइबर धोखाधड़ी का शिकार हुआ है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए इसे सीबीआई को सौंपने पर विचार होना चाहिए।
मंत्री ने केंद्र सरकार से किस प्रकार के कदम उठाने की अपील की है?
उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्रालय और आईटी मंत्रालय से विद्यार्थियों के तकनीकी प्रोजेक्ट्स को साइबर अपराध से बचाने हेतु ठोस नीति और निगरानी तंत्र बनाने की मांग की है।
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टिप्पणियाँ 5

Aisha Khan@aisha-khan·4 दिन पहले

यार, ये साइबर ठग अब छात्रों के प्रोजेक्ट और फंडिंग के चक्कर में भी पड़ने लगे हैं, सोचकर ही डर लगता है। सर्वेश के साथ जो हुआ वो बहुत डरावना है, भगवान करे वो जल्दी ठीक हो जाए। पर समझ नहीं आता कि आखिर इन ठगों को इतनी सटीक जानकारी मिलती कैसे है कि कौन छात्र क्या बना रहा है?

Ravikash Gupta@ravikash·4 दिन पहले

छात्रों के प्रोजेक्ट्स को इस तरह के डिजिटल फ्रॉड का निशाना बनाया जाना हैरान करने वाला है। सीबीआई जांच से ही इस मामले का सच सामने आ पाएगा।

Arjun Mehta@arjun-mehta·4 दिन पहले

रविकेश, आपकी बात सही है लेकिन साढ़े तीन करोड़ की फंडिंग का वो दावा आखिर किसने और क्यों किया था, इसका सच सामने कैसे आएगा?

Rohan Verma@rohan-verma·4 दिन पहले

छात्र के साथ जो हुआ वह वाकई डरावना है। आजकल साइबर ठगों के हाथ इतने लंबे हो गए हैं कि अब वे बच्चों के प्रोजेक्ट्स तक को निशाना बना रहे हैं। उम्मीद है सीबीआई जांच से असली सच सामने आएगा और बच्चे को न्याय मिलेगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·4 दिन पहले

रोहन भाई, बिल्कुल सही कहा आपने। साइबर सेल के कई मामलों में मैंने देखा है कि ठग अब नए-नए पैंतरे अपना रहे हैं, पर इस तरह किसी छात्र के प्रोजेक्ट को निशाना बनाना वाकई चौंकाने वाला है।

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