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हिमाचल में ड्रोन प्रोजेक्ट पर 3.5 करोड़ की फर्जी फंडिंग का भंडाफोड़, बिना जांच छात्र को राज्यपाल से दिलवाया सम्मानहिमाचल प्रदेश
30 अक्तू॰ 2026, 10:27 am (7 दिन पहले)· 2

हिमाचल में ड्रोन प्रोजेक्ट पर 3.5 करोड़ की फर्जी फंडिंग का भंडाफोड़, बिना जांच छात्र को राज्यपाल से दिलवाया सम्मान

हमीरपुर पॉलिटेक्निक के छात्र सर्वेश शर्मा के साथ रक्षा ड्रोन के नाम पर साइबर धोखाधड़ी सामने आई है, जहां संस्थान और प्रशासन ने दावों की जांच किए बिना राज्यपाल से सम्मान भी दिलवा दिया था।

हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर स्थित सरकारी बहुतकनीकी संस्थान बडू में कंप्यूटर इंजीनियरिंग के पांचवें सेमेस्टर में पढ़ने वाले छात्र सर्वेश शर्मा एक बड़े साइबर फ्रॉड का शिकार बन गए हैं। इस पूरे प्रकरण में संस्थान के अधिकारियों और जिला स्तर के प्रशासनिक तंत्र की गंभीर लापरवाही उजागर हुई है, जिन्होंने दावों की बुनियादी पड़ताल किए बिना छात्र का सम्मान तक करवा दिया था। छात्र को यह झांसा दिया गया था कि रक्षा नवाचार पहल के तहत उनके ड्रोन मॉडल के लिए साढ़े तीन करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता स्वीकृत की गई है। इस फर्जी स्वीकृति पत्र के बाद मामला उस वक्त पूरी तरह पलट गया जब संबंधित रक्षा संगठन ने ऐसे किसी भी अनुदान को सिरे से नकार दिया। इसी बीच छात्र अपने हॉस्टल भवन से संदिग्ध हालत में नीचे गिरकर गंभीर रूप से चोटिल हो गए और उनका इलाज चंडीगढ़ स्थित अस्पताल में जारी है।

फर्जी दस्तावेजों और रक्षा मुहर से रची गई साजिश

जांच में यह बात सामने आई है कि जालसाजों ने बेहद शातिर तरीके से छात्र को अपने जाल में फंसाया। छात्र को डिजिटल माध्यमों से ऐसे कागजात भेजे गए जिन पर सेना के आधिकारिक चिह्न और मुहरें लगी हुई थीं। इन पत्रों में दावा किया गया था कि सेना के उपयोग हेतु विकसित किए जा रहे ड्रोन प्रोजेक्ट को रक्षा नवाचार संगठन से जुड़ी योजना के तहत 3.5 करोड़ रुपये का बड़ा फंड आवंटित हुआ है। जब यह दस्तावेज रक्षा नवाचार संगठन के संज्ञान में आए तो अधिकारियों ने तुरंत संस्थान से संपर्क साधा और स्पष्ट किया कि उनकी तरफ से ऐसी कोई वित्तीय मंजूरी कभी जारी ही नहीं हुई। अब जांच एजेंसियां इस बात की कड़ियां जोड़ रही हैं कि यह फर्जी संदेश किस गिरोह ने तैयार किए और छात्र तक कैसे पहुंचाए। इसके अलावा छात्र को पूर्व में आईआईटी रुड़की से मिले नकद पुरस्कार के पैसों के दुरुपयोग के कोण को भी खंगाला जा रहा है।

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सत्यापन के बिना जश्न और राज्यपाल से सम्मान

इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू संस्थान के प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन का गैर-जिम्मेदाराना रवैया रहा। बिना किसी आधिकारिक रिकॉर्ड या विभाग से सीधे पुष्टि किए, 23 सितंबर को संस्थान ने सार्वजनिक सूचना जारी कर दी। इसमें संस्थान के मुखिया और अध्यापकों के साथ छात्र की तस्वीरें प्रचारित की गईं। हद तो तब हो गई जब हमीरपुर के उपायुक्त कार्यालय और प्रशासनिक तंत्र ने भी दस्तावेजों की सत्यता जांचने की जहमत नहीं उठाई और छात्र को राज्यपाल कविंद्र गुप्ता के हाथों औपचारिक तौर पर सम्मानित तक करवा दिया गया। एक सामान्य ईमेल या पत्र की पुष्टि किए बिना इतने बड़े मंच पर पुरस्कार दिलवाने की चूक ने अब कई अधिकारियों को जवाबदेही के कटघरे में खड़ा कर दिया है।

हॉस्टल से संदिग्ध पतन और अस्पताल में उपचार

फर्जीवाड़े का सच सामने आने के बाद छात्र हॉस्टल की तीसरी मंजिल से रहस्यमयी परिस्थितियों में नीचे गिर पड़े, जिससे वह बुरी तरह जख्मी हो गए। स्थानीय हमीरपुर मेडिकल कॉलेज में प्राथमिक देखभाल के पश्चात उन्हें बुधवार 27 अक्तूबर को बेहतर चिकित्सा के लिए पीजीआई चंडीगढ़ स्थानांतरित किया गया। वहां उनके जबड़े की गंभीर चोट का ऑपरेशन निर्धारित है। इस बीच इंटरनेट मीडिया पर छात्र के संबंध में भ्रामक और दुखद अफवाहें भी तैरने लगी थीं। हमीरपुर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार उपाध्याय ने स्थिति स्पष्ट करते हुए आमजन से अपील की कि वे भ्रामक सूचनाओं पर भरोसा न करें और झूठे दावे साझा न करें। पुलिस अधिकारी ने पुष्टि की कि छात्र जीवित हैं और उपचाराधीन हैं, साथ ही प्रारंभिक आकलन में यह मामला विशुद्ध रूप से साइबर धोखाधड़ी का प्रतीत होता है।

कानूनी कार्रवाई और सामाजिक मदद

कानून प्रवर्तन एजेंसी ने इस षड्यंत्र को लेकर औपचारिक अभियोग पंजीकृत कर लिया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(2), 319 और 336(3) के अलावा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66C और 66D के तहत मुकदमा दर्ज किया है। जांच दल उस कमरे की भी पड़ताल कर चुके हैं जहां छात्र रहते थे, ताकि घटनाक्रम के हर पहलू का वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाया जा सके। दूसरी तरफ पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाने के लिए जनप्रतिनिधि भी आगे आए हैं। भोरंज क्षेत्र के विधायक सुरेश कुमार ने अस्पताल पहुंचकर छात्र का हाल जाना और परिजनों को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता सौंपी। इसी क्रम में सरकाघाट क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता चंद्र शर्मा ने भी चिकित्सा केंद्र पहुंचकर परिजनों से मुलाकात की और सहयोग का भरोसा दिया।

सवाल-जवाब

सर्वेश शर्मा कौन हैं और उनके साथ क्या घटना घटी?
सर्वेश हमीरपुर स्थित सरकारी बहुतकनीकी संस्थान बडू में कंप्यूटर इंजीनियरिंग के पांचवें सेमेस्टर के छात्र हैं, जो 3.5 करोड़ रुपये के रक्षा ड्रोन ग्रांट से जुड़े साइबर फ्रॉड के शिकार हुए हैं।
रक्षा अनुदान के दावे का सच क्या निकला?
डिफेंस इनोवेशन ऑर्गनाइजेशन ने स्पष्ट किया कि उन्होंने छात्र के ड्रोन प्रोजेक्ट के लिए ऐसी कोई ग्रांट मंजूर नहीं की थी और सभी संबंधित दस्तावेज फर्जी थे।
कॉलेज और जिला प्रशासन पर क्या आरोप हैं?
कॉलेज प्रबंधन और हमीरपुर प्रशासन ने बिना किसी आधिकारिक पुष्टि के छात्र के दावे को सच मान लिया, प्रेस नोट जारी किया और उसे राज्यपाल से सम्मानित करवा दिया।
छात्र की वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति कैसी है?
हॉस्टल की तीसरी मंजिल से संदिग्ध परिस्थितियों में गिरने के बाद सर्वेश घायल हो गए थे और फिलहाल पीजीआई चंडीगढ़ में उनके जबड़े की सर्जरी के लिए उपचार चल रहा है।
पुलिस ने इस मामले में क्या कानूनी कदम उठाए हैं?
हमीरपुर पुलिस ने बीएनएस की धारा 318(2), 319, 336(3) और आईटी एक्ट की धारा 66C व 66D के तहत साइबर धोखाधड़ी का आपराधिक मामला दर्ज किया है।
पीड़ित छात्र के परिवार को क्या आर्थिक सहायता मिली है?
भोरंज के विधायक सुरेश कुमार ने अस्पताल में परिजनों से मिलकर छात्र के इलाज के लिए 50 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान की है।
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टिप्पणियाँ 5

Ananya Iyer@ananya-iyer·7 दिन पहले

इतना बड़ा फ्रॉड हो गया और किसी ने एक फोन करके भी चेक नहीं किया कि साढ़े तीन करोड़ सच में आ रहे हैं या नहीं! छात्र को राज्यपाल से सम्मान भी दिलवा दिया और बाद में वो संदिग्ध हालत में गिर भी गया। पता नहीं उस बच्चे पर क्या गुजर रही होगी, क्या सच में साइबर ठगों ने उसे ऐसे जाल में फंसाया या इसके पीछे कुछ और ही कहानी है?

Arjun Mehta@arjun-mehta·7 दिन पहले

मुझे वो दिन याद आ गया जब एक युवा आविष्कारक से मिलने की बात थी और बाद में सब झूठा निकला था। कॉलेजियम प्रशासन की ऐसी लापरवाही देख कर डर लगता है कि कैसे बिना जांच के किसी को भी राज्यपाल के सामने खड़ा कर दिया।

Ravikash Gupta@ravikash·7 दिन पहले

अर्जुन, आप बिल्कुल सही कह रहे हैं। पर क्या किसी को भनक तक नहीं लगी कि फंड आया ही नहीं?

Karan Malhotra@karan-malhotra·7 दिन पहले

साढ़े तीन करोड़ के फर्जी फंड की इस बात में छात्र का राज्यपाल से सम्मान करवा देना प्रशासन की बहुत बड़ी लापरवाही है। क्या पुलिस को अभी तक उन जालसाजों का कोई सुराग मिला है जिन्होंने ये जाली कागजात भेजे थे?

Rohan Verma@rohan-verma·7 दिन पहले

करण भाई, प्रशासन की चूक तो साफ है, पर मुझे लगता है कि अकेले पुलिस को दोष देना ठीक नहीं है। जब कॉलेज ने ही बिना जांचे राज्यपाल से सम्मान करवा दिया, तो झांसा देने वालों तक पहुंचना पुलिस के लिए भी चुनौती होगा।

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