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हिमाचल में ट्रांसफर नियमों में बड़ा फेरबदल करेगी सुक्खू सरकार, डिप्टी सीएम की अगुवाई में चार सदस्यीय कमेटी गठितहिमाचल प्रदेश
5 नव॰ 2026, 9:13 am (1 दिन पहले)· 1

हिमाचल में ट्रांसफर नियमों में बड़ा फेरबदल करेगी सुक्खू सरकार, डिप्टी सीएम की अगुवाई में चार सदस्यीय कमेटी गठित

हिमाचल प्रदेश सरकार ने व्यापक मार्गदर्शक सिद्धांत-2013 की समीक्षा के लिए उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री की अध्यक्षता में मंत्रियों की एक समिति बनाई है, जिससे हजारों कर्मचारियों के तबादले लटक गए हैं।

हिमाचल प्रदेश के विभिन्न विभागों में सेवारत कर्मियों के लिए अपने पसंदीदा स्थानों या गृह जिलों में जाने की राह अब और कठिन हो गई है। राज्य प्रशासन ने नियमित स्थानांतरण प्रक्रिया को खोलने के बजाय पूरे ढांचे में बुनियादी सुधार लाने की कवायद छेड़ दी है। पुरानी गाइडलाइन की पड़ताल कर नया खाका खींचने के मकसद से मंत्रिमंडल स्तर की एक चार सदस्यीय विशेष उप समिति का ऐलान कर दिया गया है। जब तक यह समिति अपनी रिपोर्ट तैयार करके पेश नहीं करती, तब तक स्थानांतरण की पुरानी फाइलों पर कोई फैसला होना मुश्किल नजर आ रहा है।

मुकेश अग्निहोत्री संभालेंगे समीक्षा समिति की कमान

सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से इस संदर्भ में औपचारिक आदेश जारी कर दिए गए हैं। नई व्यवस्था तय करने वाली इस उच्चस्तरीय समिति की बागडोर उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री को सौंपी गई है। उनके साथ कैबिनेट के तीन अन्य प्रमुख चेहरों को इसमें शामिल किया गया है, जिनमें कृषि मंत्री प्रो. चंद्र कुमार, राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी तथा नगर एवं ग्राम नियोजन मंत्री राजेश धर्माणी का नाम शामिल है। इसके अलावा कार्मिक विभाग के प्रधान सचिव इस पूरे पैनल में सदस्य सचिव का दायित्व निभाएंगे।

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यह समिति वर्ष 2013 के व्यापक मार्गदर्शक सिद्धांत (सीजीपी-2013) के एक-एक बिंदु को बारीकी से परखेगी। सरकार का प्राथमिक उद्देश्य स्थानांतरण की पूरी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, तर्कसंगत और जवाबदेह बनाना है, ताकि मनमाने ढंग से होने वाली सिफारिशी नियुक्तियों पर अंकुश लगाया जा सके। समिति अपनी विस्तृत सिफारिशें तैयार करके मंत्रिमंडल के समक्ष रखेगी, जिसके आधार पर भविष्य की नई कार्यप्रणाली को अंतिम रूप दिया जाएगा।

छह हजार से ज्यादा अर्जियां अटकीं, सिफारिशी चिट्ठियों पर भी संशय

सचिवालय के गलियारों में इस समय कर्मचारियों की 6 हजार से अधिक आवेदन फाइलें लंबित पड़ी हुई हैं। इनमें दूरदराज के इलाकों से गृह क्षेत्र लौटने के इच्छुक कर्मचारियों की निजी अर्जियों के अलावा विधायकों और मंत्रियों की ओर से लिखे गए औपचारिक डीओ नोट भी बड़ी संख्या में शामिल हैं। राज्य में सामान्य स्थानांतरण पर पूरी तरह रोक लागू है, हालांकि खाली पड़े पदों को भरने और कुछ अपरिहार्य प्रशासनिक जरूरतों के तहत ही चुनिंदा तबादले किए जा रहे हैं।

अब संशय इस बात को लेकर पैदा हो गया है कि सचिवालय में जमा इन हजारों पुरानी फाइलों को मौजूदा नियमों से सुलझाया जाएगा या फिर नई नीति लागू होने के बाद ही इन पर कोई कार्रवाई होगी। यदि प्रशासन ने नई व्यवस्था के अमल में आने तक इन फाइलों को रोके रखा, तो अपने घर के नजदीक जाने की आस लगाए बैठे कर्मियों की प्रतीक्षा कई महीने लंबी खिंच सकती है।

मंत्रिमंडल बैठक में उभरा था अंदरूनी असंतोष

नीति की दोबारा समीक्षा कराने का मुख्य कारण सत्ता के गलियारों में उपजी खींचतान और प्रशासनिक तालमेल का अभाव बताया जा रहा है। बीती 11 अक्तूबर को आयोजित राज्य मंत्रिमंडल की अहम बैठक के दौरान कृषि मंत्री प्रो. चंद्र कुमार ने खुलकर नाराजगी जताई थी। उन्होंने अपनी ही सरकार के कामकाज में बाहरी दखलंदाजी का मसला उठाया था।

कृषि मंत्री ने बैठक में सीधा आरोप जड़ा था कि उनके हलके से जुड़े प्रशासनिक मसलों और मुलाजिमों के फेरबदल में उनकी राय को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा था कि एक युवा नेता अपनी मर्जी से कर्मचारियों के तबादले करवा रहा है। इस दौरान मंत्रियों ने स्थानांतरण से जुड़े अदालती आदेशों और कानूनी पहलुओं पर भी लंबी चर्चा की, जिसके बाद सरकार ने नीति की समग्र समीक्षा कराने का रास्ता चुना।

जनवरी में खुली थी खिड़की, अप्रैल में फिर लग गया था ताला

राज्य के कर्मचारियों के लिए इस वर्ष तबादलों का चक्र बेहद उतार-चढ़ाव भरा रहा है। पूर्व में लगी रोक को शासन ने 14 जनवरी को कुछ समय के लिए हटाया था, ताकि जरूरी फेरबदल किए जा सकें। हालांकि, कुछ ही महीनों बाद यानी 6 अप्रैल को सरकार ने सामान्य स्थानांतरण पर दोबारा पूर्ण प्रतिबंध लागू कर दिया।

इसके बाद 4 जून को प्रदेश के मुख्य सचिव ने लिखित निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया था कि तबादलों पर लगाई गई पाबंदी आगामी आदेशों तक निरंतर बनी रहेगी। उसी दिन से कर्मचारी संगठन पाबंदी हटने की तारीख का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन अब नई समिति के गठन ने यह साफ कर दिया है कि राहत मिलने से पहले नियमों की पूरी किताब दोबारा लिखी जाएगी।

सवाल-जवाब

हिमाचल प्रदेश में तबादला नीति की समीक्षा के लिए गठित समिति का प्रमुख कौन है?
इस चार सदस्यीय कैबिनेट सब कमेटी की अध्यक्षता राज्य के उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री कर रहे हैं।
इस कैबिनेट सब कमेटी में कौन-कौन से मंत्री शामिल किए गए हैं?
समिति में कृषि मंत्री प्रो. चंद्र कुमार, राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी और नगर एवं ग्राम नियोजन मंत्री राजेश धर्माणी बतौर सदस्य शामिल हैं।
वर्तमान में सरकार के पास कितने कर्मचारियों के तबादला आवेदन लंबित पड़े हैं?
सचिवालय में कर्मचारियों की निजी अर्जियों और विधायकों-मंत्रियों के डीओ नोट मिलाकर 6 हजार से अधिक आवेदन लंबित हैं।
हिमाचल प्रदेश में सामान्य तबादलों पर अंतिम बार रोक कब लगाई गई थी?
राज्य में 14 जनवरी को प्रतिबंध हटने के बाद सरकार ने 6 अप्रैल को दोबारा सामान्य तबादलों पर पूरी तरह रोक लगा दी थी।
तबादला नीति की समीक्षा का फैसला किस पुरानी व्यवस्था के तहत लिया गया है?
सरकार वर्ष 2013 में लागू किए गए व्यापक मार्गदर्शक सिद्धांत (सीजीपी-2013) के नियमों की समीक्षा कर रही है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Rohan Gupta@rohan-gupta·1 दिन पहले

मेरे जीजाजी भी हिमाचल में सरकारी नौकरी में हैं, पिछले छह महीनों से उनका ट्रांसफर रुका हुआ है। अब इस नई कमेटी के चक्कर में उनके घर आने की उम्मीद और आगे खिसक गई है।

Ravikash Gupta@ravikash·1 दिन पहले

ट्रांसफर रुकने से हज़ारों कर्मचारियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं, नई नीति का इंतज़ार लंबा लग रहा है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·1 दिन पहले

रविकेश जी, मुश्किलें तो बढ़ेंगी ही, पर छः हजार पुरानी फाइलें अटकी होने से लगता है कि नई नीति आने में अभी कई महीने और लग जाएंगे।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 दिन पहले

ट्रांसफर रुकने से कर्मचारियों की परेशानी और बढ़ जाएगी। छह हजार फाइलें अटकी पड़ी हैं, अब नई कमेटी के चक्कर में महीनों और इंतजार करना पड़ेगा।

Rohan Verma@rohan-verma·1 दिन पहले

करण भाई, आप बिल्कुल सही कह रहे हैं। मेरे एक रिश्तेदार पिछले छह महीने से शिमला सचिवालय के चक्कर काट रहे हैं, उनकी फाइल भी इसी चक्कर में अटकी होगी।

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