राजस्थान के विभिन्न जिलों में नगरीय निकाय चुनावों को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है और टिकट बंटवारे को लेकर सत्तारूढ़ व विपक्षी दलों में घमासान मचा हुआ है। नामांकन के आखिरी दिन तक प्रत्याशियों के चयन को लेकर तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाई है, जिससे कई जगहों पर बगावत और असंतोष के सुर फूट पड़े हैं। राजनीतिक दलों के सामने अधिकृत उम्मीदवारों को मैदान में उतारने के साथ-साथ नाराज कार्यकर्ताओं और दावेदारों को मनाने की दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है। कई जिलों में टिकट न मिलने से आहत नेताओं ने पार्टी पदों से इस्तीफे दे दिए हैं तो कुछ ने दूसरे दलों का दामन थाम लिया है।
बीकानेर और धौलपुर में टिकट का सस्पेंस और बगावत का डर
बीकानेर में निकाय चुनाव के अंतर्गत महापौर पद के लिए दावेदारी को लेकर खींचतान काफी तेज हो चुकी है। कांग्रेस की तुलना में बीजेपी के भीतर महापौर पद के दावेदारों की संख्या काफी ज्यादा है, जहां करीब 10 चेहरे इस दौड़ में शामिल बताए जा रहे हैं, जबकि कांग्रेस खेमे में 2 से 3 प्रमुख नाम चर्चाओं में हैं। अत्यधिक दावेदार होने के कारण वार्ड स्तर पर टिकट वितरण को लेकर भारी रस्साकशी चल रही है। इसी तरह धौलपुर में भी नामांकन की अंतिम तिथि पर दोनों ही प्रमुख दलों में टिकट को लेकर असमंजस बरकरार रहा। अंतिम समय तक संभावित प्रत्याशियों के नामों पर मंथन चलता रहा और बगावत के अंदेशे के चलते पार्टियों ने अपने अधिकृत उम्मीदवारों के नाम सार्वजनिक करने से परहेज किया। टिकट से वंचित रहने वाले कई दावेदारों ने निर्दलीय रूप से चुनाव मैदान में उतरने की पूरी तैयारी कर रखी है।
गोपनीयता और फोन के जरिए निर्देश
बगावत और विरोध प्रदर्शन के डर से बीकानेर और बूंदी समेत कई अन्य इलाकों में बीजेपी और कांग्रेस ने अपने अधिकृत प्रत्याशियों की सूचियों को सार्वजनिक करने से दूरी बनाए रखी। दलों की ओर से संभावित उम्मीदवारों को केवल फोन कॉल के माध्यम से ही नामांकन दाखिल करने के निर्देश दिए गए। इस स्थिति के बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर फर्जी और संभावित सूचियों का दौर तेजी से चला, जिससे मतदाताओं और कार्यकर्ताओं के बीच भारी भ्रम की स्थिति पैदा हो गई। बूंदी नगर परिषद चुनाव के दौरान भी कुछ ऐसा ही हाल रहा जहाँ अंतिम दिन तक पत्ते नहीं खोले गए और पदाधिकारियों ने मोबाइल फोन के जरिए ही दावेदारों को नामांकन प्रक्रिया पूरी करने के आदेश दिए। कई जगहों पर उम्मीदवारों को पार्टी के आधिकारिक सिंबल का अंतिम समय तक इंतजार करना पड़ा।
बीकानेर और राजसमंद में नामांकन का अंतिम दिन
बीकानेर में नामांकन प्रक्रिया के आखिरी दिन प्रशासनिक अमले के सामने व्यवस्था बनाए रखने की बड़ी चुनौती रही क्योंकि नामांकन केंद्रों पर भारी भीड़ उमड़ी। पूर्व महापौर सुशीला कंवर और महावीर रांका समेत दोनों दलों के कई प्रमुख चेहरों ने पर्चे दाखिल किए। राजसमंद जिले में भी 31 अगस्त की अंतिम तारीख तक सूचियों को सार्वजनिक नहीं किया गया और दलों ने अपने उम्मीदवारों को सीधे सिंबल देकर रिटर्निंग अधिकारी के समक्ष नामांकन दाखिल करवाया। गोपनीय रणनीतियों के सहारे दलों ने विरोध और बगावत के जोखिम को टालने की कोशिश की, जिससे कार्यकर्ताओं में अंतिम क्षणों तक संशय बना रहा।
जयपुर और पाली में आखिरी समय की चुनावी हलचल
जयपुर में नगर निकाय चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने के अंतिम दिन जबरदस्त गहमागहमी देखने को मिली। प्रत्याशियों के पास पर्चे दाखिल करने के लिए केवल सीमित समय बचा था, जिसके चलते सुबह 10:30 बजे से दोपहर 3 बजे तक चलने वाली प्रक्रिया में खासी भीड़ जुटी। जयपुर में इस अंतिम दिन से पहले ही बड़ी संख्या में उम्मीदवार अपने नामांकन दाखिल कर चुके थे और आखिरी दिन यह आंकड़ा और बढ़ गया। पाली नगर निगम क्षेत्र में भी कमोबेश यही हालात रहे जहाँ प्रशासन के पास बड़ी संख्या में आवेदन पहुंचे और दोनों ही दलों ने बगावत के खतरे से बचने के लिए फोन के माध्यम से ही प्रत्याशियों को नामांकन भरने के निर्देश दिए। सिंबल फॉर्म सीधे तौर पर संबंधित अधिकारियों के पास जमा कराए गए।
नैनवा और अलवर में खुलकर सामने आया विरोध
बूंदी के नैनवा कस्बे में टिकट वितरण को लेकर पार्टी के भीतर का असंतोष सड़कों पर आ गया। वार्ड नंबर 4 से स्थानीय कार्यकर्ता को टिकट नहीं दिए जाने और किसी बाहरी व्यक्ति को उम्मीदवार बनाए जाने से समर्थकों में गहरा आक्रोश फैल गया। इस मामले में जब पार्टी के शहर अध्यक्ष बैठक में नहीं पहुंचे तो नाराज कार्यकर्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने रैली निकालकर शहर अध्यक्ष के आवास पर जमकर हंगामा किया तथा फैसले पर पुनर्विचार की मांग उठाई। अलवर नगर निगम चुनाव में भी टिकट सूची सामने आने के बाद अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई। विवेकानंद मंडल अध्यक्ष जितेंद्र सिंह राठौड़ ने पार्टी आलाकमान पर गंभीर आरोप लगाते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सालों से संगठन के लिए मेहनत करने वाले समर्पित कार्यकर्ताओं की अनदेखी करते हुए कांग्रेस पृष्ठभूमि के नेताओं को प्राथमिकता दी गई है। उनके अलावा केशव मंडल अध्यक्ष महेश निहलवानी ने भी टिकट वितरण से आहत होकर अपने पद से त्यागपत्र दे दिया।
झालावाड़ में सियासी समीकरणों में बदलाव
झालावाड़ की भवानीमंडी नगर पालिका चुनाव से ठीक पहले एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया, जिससे चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल गए। पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष रामलाल गुर्जर ने अपने परिवार के साथ कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली। उनके साथ उनकी पत्नी सुगना गुर्जर और बहू पिंकी गुर्जर ने भी कांग्रेस का दामन थाम लिया। निकाय चुनाव के ठीक पहले गुर्जर परिवार के इस पाला बदलने को बीजेपी के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है। चर्चा है कि यह फैसला भी टिकट वितरण के दौरान उपजी नाराजगी के बाद लिया गया। इस सियासी उलटफेर के बाद भवानीमंडी में मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है और कांग्रेस इसे अपने पक्ष में एक बड़े बदलाव के रूप में देख रही है।



















