नेपाल में आई भीषण बाढ़ की वजह से सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है और हजारों लोग अब भी लापता हैं, जिनकी तलाश में राहत और बचाव अभियान लगातार चलाए जा रहे हैं। पानी के साथ आए मलबे और भारी चट्टानों ने त्रिशुली इलाके में भारी तबाही मचाई है। इसी इलाके के त्रिभुवन स्कूल ने भी इस भयंकर आपदा का सामना किया, लेकिन वहां तैनात एक प्रिंसिपल की बहादुरी और त्वरित सूझबूझ के चलते 900 छात्र सुरक्षित बच निकले। इस महाप्रलय के पांच दिन बीत जाने के बाद भी स्कूल के प्रिंसिपल राजेंद्र उस भयानक मंजर को याद करके सिहर उठते हैं। उन्होंने इस खौफनाक दिन की पूरी दास्तां साझा की है।
त्रिभुवन त्रिशुली सीनियर सेकेंडरी स्कूल में कुल 1643 बच्चे अध्ययन करते हैं। घटना वाले दिन यानी 26 तारीख को प्रिंसिपल और शिक्षकों के साथ 900 बच्चे स्कूल परिसर में मौजूद थे। पानी का तेज बहाव आया और मात्र 30 सेकंड के भीतर इन्होंने मौत को बेहद करीब से मात दी।
महज 10 मिनट में सुरक्षित निकाले गए 900 बच्चे
त्रिभुवन स्कूल के प्रिंसिपल राजेंद्र दुबान ने घटना को याद करते हुए बताया कि हादसे के वक्त वह अपनी क्लासरूम के भीतर थे। उन्हें उनके दोस्तों के जरिए जानकारी मिली कि ऊपर की तरफ से पानी के साथ भारी मलबा बहता हुआ आ रहा है। सूचना मिलते ही उन्होंने बिना एक पल गंवाए तुरंत स्कूल को खाली कराने का अहम फैसला लिया। सभी छात्र-छात्राओं को फौरन स्कूल बसों में बैठाकर सुरक्षित ऊपर वाले हिस्से की ओर रवाना कर दिया गया। उन्होंने यह पूरा बचाव कार्य महज 10 मिनट के भीतर अंजाम दिया, जबकि उस समय स्कूल में 900 बच्चे मौजूद थे। इसके बाद सभी शिक्षक और अन्य स्टाफ के सदस्य भी सुरक्षित बाहर निकल आए। इसी सतर्कता के कारण सभी की जान बच गई।
बाढ़ के पानी में जमींदोज हुआ स्कूल और इलाका
जब बाढ़ का विकराल पानी स्कूल तक पहुंचा तो उसने अपने रास्ते में आने वाली हर चीज को तहस-नहस कर दिया। स्कूल के आस-पास बनी हुई इमारतें पूरी तरह से ढह गईं। अगर समय रहते स्कूल को खाली नहीं कराया गया होता, तो एक भी छात्र की जान बचाना असंभव था। त्रिशुली बाजार अब पूरी तरह से नेस्तनाबूद हो चुका है। स्कूल भी पूरी तरह तबाह हो चुका है, पुल टूट चुके हैं और पूरा क्षेत्र कभी भी अपने पुराने स्वरूप में वापस नहीं लौट पाएगा। बुनियादी और मूलभूत सुविधाओं को दोबारा खड़ा करने में भी लंबा समय लगेगा।
कपड़ा व्यापारी का परिवार और कारोबार तबाह
त्रिशुली में घरों को खाली तो करवा लिया गया है, लेकिन हालात अभी भी बद से बदतर बने हुए हैं, क्योंकि पानी का बहाव अगर फिर बढ़ा तो स्थिति और बिगड़ सकती है। नेपाल का त्रिशुली बाजार पूरी तरह वीरान पड़ा हुआ है। करोड़ों रुपये का व्यापार करने वाले गारमेंट ट्रेडर अशोक चौरसिया ने बताया कि उनका सब कुछ इस मलबे में हमेशा के लिए दफन हो गया है। उनके पास पहनने के लिए अपने कपड़े तक नहीं बचे हैं, और वे दूसरों से मांगकर कपड़े पहनने को मजबूर हैं। इस भयानक त्रासदी में उनके परिवार के दो सदस्यों की भी जान चली गई है। अशोक चौरसिया ने बताया कि त्रिशुली बाजार में बड़ी संख्या में भारतीय भी रहते थे। यहाँ करीब 60 से ज्यादा भारतीय परिवार निवास करते थे, लेकिन अब वहाँ केवल क्षतिग्रस्त मकान और खंडहर बन चुकी दुकानें ही नजर आती हैं।
बलिया के अशोक की दिल दहलाने वाली आपबीती
अशोक कुमार चौरसिया ने अपनी कहानी साझा करते हुए बताया कि वे मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के रसड़ा गांव के रहने वाले हैं। लगभग 44 साल पहले उनका परिवार काठमांडू आया था और उन्होंने आज से 20 साल पहले त्रिशुली में अपनी दुकान खोली थी। तब से उनका कारोबार सुचारू रूप से चल रहा था। जब बाढ़ का पानी आया तो उसने मात्र 20 मिनट में 100 किलोमीटर का सफर तय कर लिया, जिससे उन्हें संभलने या भागने का कोई मौका ही नहीं मिला। उस दिन सुबह उनकी दुकान खुल चुकी थी और वे समय पर सामान समेटकर अंदर नहीं रख पाए थे। जब पुलिस ने लाउडस्पीकर से अलर्ट जारी किया, तो वे किसी तरह अपनी बाइक निकालकर पत्नी और बच्चों के साथ ऊपरी इलाके की तरफ निकल गए। अगर वे समय पर अपनी बाइक नहीं निकाल पाते, तो उनकी मौत भी निश्चित थी। अशोक ने बताया कि उनकी चार दुकानें और चार बड़े गोदाम थे, इसके अलावा कई वाहन भी थे। इस आपदा में उन्हें 45 करोड़ रुपये से ज्यादा का भारी नुकसान हुआ है। उन्होंने अपने परिवार के दो सदस्यों को सुरक्षित भारत वापस भेज दिया है, जबकि वे खुद इस समय दूसरों से मांगकर कपड़े पहनने और भोजन करने को विवश हैं।



















