राजस्थान का भरतपुर शहर अपने गौरवशाली इतिहास और अभेद्य किलों के लिए दुनिया भर में अपनी एक अलग पहचान रखता है। इसी शहर के ठीक बीचों-बीच खड़ा लोहागढ़ का किला अपनी मजबूत वास्तुकला और जाट राजवंश की समृद्ध विरासत को आज भी संजोए हुए है। इस ऐतिहासिक दुर्ग के ऊपरी हिस्से में बने महल के अंदर एक बेहद खास और अनूठी निशानी मौजूद है। यह एक बड़ा लोहे का खंभा है, जिसे भरतपुर रियासत की शासन व्यवस्था और उसके राजाओं का जीता-जागता दस्तावेज माना जाता है।
महल के भीतर रखा यह लोहे का स्तंभ पहली नजर में भले ही एक साधारण खंभे जैसा दिखाई दे, लेकिन ऐतिहासिक दृष्टिकोण से इसका महत्व बहुत अधिक है। इस स्तंभ पर भरतपुर रियासत पर राज करने वाले राजपरिवार के मुख्य राजाओं के नाम बाकायदा उकेरे गए हैं। यह खंभा उस कालखंड की याद दिलाता है जब उत्तर भारत के राजनीतिक पटल पर भरतपुर रियासत का गहरा प्रभाव और दबदबा हुआ करता था।
पर्यटकों और इतिहास प्रेमियों का आकर्षण केंद्र
इस ऐतिहासिक दुर्ग का दीदार करने आने वाले देशी और विदेशी सैलानी तथा इतिहास में रुचि रखने वाले लोग इस स्तंभ को देखने जरूर पहुंचते हैं। यह खंभा पर्यटकों के बीच गहरी उत्सुकता और आकर्षण का मुख्य बिंदु बना हुआ है। जब लोग इस प्राचीन किले की भव्यता और मजबूती को देखने के बाद महल के ऊपरी तल पर पहुंचते हैं, तो इस स्तंभ पर खुदी नामावली के माध्यम से भरतपुर के राजवंश के क्रम और उसके स्वर्णिम अतीत को बहुत आसानी से समझ लेते हैं।
आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रामाणिक दस्तावेज
विशेषज्ञों और इतिहासकारों का मानना है कि यह लोहे का स्तंभ सिर्फ धातु का एक भारी टुकड़ा नहीं है, बल्कि यह भरतपुर रियासत की वंशावली और उसकी शासन प्रणाली की प्रामाणिकता को साबित करने वाला एक अहम सबूत है। इस किले की विशाल दीवारें, मजबूत प्राचीर और महल तो इस बात की गवाही देते ही हैं कि यह दुर्ग कभी जीता नहीं जा सका, साथ ही यह लोहे का खंभा नई पीढ़ी के लिए अपनी जड़ों और पूर्वजों के इतिहास से जुड़ने का एक बड़ा माध्यम भी है।



















