नदी के किनारे लावारिस हालत में मिली थी माया: 19 अप्रैल 2025 को केरल के मलयट्टूर डिवीजन में एक नदी के पास नवजात हथिनी बेहद असहाय स्थिति में पाई गई थी, जिसे उसका झुंड पीछे छोड़ गया था। मातृ स्नेह और पोषण के अभाव में यह छोटी सी हथिनी अत्यंत कमजोर और निर्जलित हो चुकी थी। केरल वन विभाग के डॉक्टर बिनॉय सी. बाबू और उनके दल ने इस बेसहारा जीव का रेस्क्यू किया, जिसके बाद चौबीसों घंटे उसकी देखरेख की गई और प्यार से उसका नाम माया रखा गया।
खेलते समय हुआ गंभीर हादसा और चोट
सब कुछ सामान्य रूप से चल रहा था, लेकिन जुलाई 2026 के दौरान खेल-खेल में फिसलने के कारण माया के कंधे में गहरी चोट आ गई। लगातार फिजियोथेरेपी कराने और जरूरी सप्लीमेंट्स देने के बावजूद उसकी हड्डियां लगातार कमजोर होती चली गईं। इस दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना ने माया के जीवन को पूरी तरह से बदल कर रख दिया और उसके स्वास्थ्य लाभ की प्रक्रिया में एक बहुत बड़ी बाधा उत्पन्न कर दी।
बिस्तर पर आ गई बेजुबान और बिगड़ी हालत
अक्टूबर 2026 का अंत आते-आते इस मासूम हथिनी की शारीरिक स्थिति इतनी अधिक खराब हो गई कि उसके दोनों आगे के पैरों की हड्डियां टूट गईं। पैरों के इन गंभीर फ्रैक्चर के साथ-साथ उसे छाती में संक्रमण भी जकड़ लिया, जिसके कारण उसका उठना-बैठना और चलना-फिरना पूरी तरह बंद हो गया। वह बिस्तर पर आ गई और उसकी जिंदगी पर गहरा संकट मंडराने लगा, जिससे पशु प्रेमियों और अधिकारियों की चिंता बढ़ गई।
विशेषज्ञों की देखरेख में बनी नई उम्मीद
माया की इस अत्यंत नाजुक स्थिति को देखते हुए केरल के चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन ने तुरंत देश के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों से परामर्श किया। पद्मश्री डॉक्टर कुशल कुंवर शर्मा और वनतारा के मुख्य डॉक्टर यदुराज खड़पेकर ने उसकी तमाम मेडिकल रिपोर्ट्स का बारीकी से अध्ययन किया। डॉक्टरों की इस विशेष चिकित्सीय टीम ने परीक्षण के बाद माया को उचित उपचार प्रदान करके उसे फिर से स्वस्थ करने की एक नई आशा बंधाई।
वनतारा ने संभाली कमान और किया एयरलिफ्ट
जब स्थानीय स्तर पर उपचार चुनौतीपूर्ण साबित होने लगा, तब अनंत अंबानी के नेतृत्व में संचालित वनतारा संगठन ने माया के इलाज की पूरी जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली। 5 नवंबर को एक विशेष एयरलिफ्ट के माध्यम से उसे केरल से निकालकर गुजरात के जामनगर में स्थित वनतारा के अत्याधुनिक अस्पताल में स्थानांतरित करने का बड़ा निर्णय लिया गया। इस बचाव अभियान ने यह स्पष्ट कर दिया कि किसी बेजुबान प्राणी की रक्षा के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे।
हवाई सफर के दौरान मिला निरंतर समर्थन
हवा में सफर के दौरान माया को किसी भी प्रकार की घबराहट या परेशानी का सामना न करना पड़े, इसके लिए वनतारा के पशु चिकित्सकों के साथ उसके पुराने देखभालकर्ता निखिल बाबू पूरे मार्ग में उसके साथ रहे। केरल से जामनगर की इस लंबी उड़ान के दौरान माया को जीवनरक्षक प्रणाली और गहन देखभाल मुहैया कराई गई, ताकि उसकी पूरी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। जाने-पहचाने चेहरों का साथ मिलने से माया को मानसिक संबल प्राप्त हुआ।
जामनगर में मिल रही विश्वस्तरीय चिकित्सा
जामनगर स्थित वनतारा परिसर में माया को हाइड्रोलिक लिफ्ट, उन्नत डायग्नोस्टिक्स, दर्द प्रबंधन और हाइड्रोथेरेपी जैसी अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। वनतारा की विशेषज्ञ टीम लगातार चौबीसों घंटे उसके स्वास्थ्य पर नजर बनाए हुए है। पूरी तरह से स्वस्थ होने के पश्चात माया को वापस केरल के अभयारण्यम केंद्र में भेज दिया जाएगा। वर्तमान में पूरा देश इस मासूम हथिनी के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना कर रहा है।
















