उत्तराखंड के चमोली जिले में हुए भीषण हेलीकॉप्टर हादसे के बाद उड्डयन सुरक्षा मानकों और प्रशासनिक फैसलों की गंभीर समीक्षा शुरू हो गई है। ट्रांस एविएशन द्वारा संचालित इस उड़ान में एक पायलट और पांच यात्रियों सहित कुल 6 लोगों की जान चली गई। यह दुखद घटना ऐसे समय में हुई जब मौसम विभाग ने क्षेत्र में 48 घंटे का ऑरेंज अलर्ट जारी किया हुआ था और ऊंचे पहाड़ी इलाकों में तेज बर्फबारी दर्ज की जा रही थी। प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद उड़ान की मंजूरी मिलने से नियामक निगरानी पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।
दुर्घटनास्थल पर तकनीकी विशेषज्ञों की पड़ताल और ब्लैक बॉक्स की तलाश
हादसे के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए नागर विमानन महानिदेशालय यानी डीजीसीए (DGCA) और विमान दुर्घटना अन्वेषण ब्यूरो यानी एएआईबी (AAIB) के विशेषज्ञ शनिवार को मौके पर पहुंचे। चमोली जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ मिलकर टीमों ने आसपास के बेहद दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों का गहन मुआयना किया। जांचकर्ताओं का प्राथमिक उद्देश्य किसी भी यांत्रिक खराबी या प्रणालीगत विफलता के सुराग जुटाना है।
हालांकि, दुर्घटनास्थल की छानबीन के बावजूद अब तक विमान का ब्लैक बॉक्स बरामद नहीं किया जा सका है। ब्लैक बॉक्स का डेटा उड़ान के अंतिम क्षणों की तकनीकी स्थिति और कॉकपिट की बातचीत को समझने के लिए सबसे अहम माना जाता है। विमानन जानकारों का स्पष्ट कहना है कि जब तक यह उपकरण नहीं मिलता और इसका डेटा डिकोड नहीं होता, तब तक हादसे की वास्तविक वजहों को पूरी तरह से साबित करना बेहद मुश्किल होगा।
यूकाडा प्रशासन की ओर से दी गई सफाई
खराब मौसम के बीच परिचालन की अनुमति देने को लेकर उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण यानी यूकाडा (UCADA) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रतीक जैन भी सवालों का सामना कर रहे हैं। प्रतीक जैन ने चमोली में खुद मौके पर मौजूद रहकर स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने परिचालन को सही ठहराते हुए कहा कि उड़ान भरने से पहले मौसम की लगातार निगरानी की जा रही थी।
प्रतीक जैन का कहना है कि प्रतिकूल मौसम को देखते हुए ही सुबह से दोपहर 12 बजे तक किसी भी हेलीकॉप्टर को उड़ान भरने की मंजूरी नहीं दी गई थी। उनके अनुसार, जब दोपहर बाद मौसम में थोड़ा सुधार देखा गया, केवल तभी परिचालन की अनुमति जारी की गई थी। इसके बावजूद, जमीन पर मौजूद भारी बर्फबारी और मौसम विभाग की औपचारिक चेतावनी के कारण इस निर्णय पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
जिम्मेदारी तय करने और सुरक्षा नियमों को सख्त करने की मांग
इस हादसे के बाद तीर्थयात्रियों की सुरक्षा और व्यावसायिक दबावों के बीच संतुलन को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। स्थानीय स्तर पर यह चिंता जताई जा रही है कि क्या खराब परिस्थितियों में उड़ानों को अनुमति देने में जरूरी एहतियात बरती गई थी। ब्लैक बॉक्स की बरामदगी और जांच एजेंसियों की अंतिम रिपोर्ट आने तक कई पहलुओं पर जांच केंद्रित रहेगी, जबकि प्रशासन से भविष्य में ऐसे जोखिम भरे फैसलों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की उम्मीद की जा रही है।



















