छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में विकास कार्यों में वित्तीय हेराफेरी और निर्माण में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ जिला प्रशासन ने बेहद सख्त रुख अपनाया है. चेकडैम निर्माण परियोजनाओं में घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल और काम का गलत आंकलन कर अधिक मूल्यांकन करने की शिकायतें सामने आने के बाद यह प्रशासनिक कार्रवाई की गई है. जांच रिपोर्ट में कमियां उजागर होते ही अधिकारियों ने कड़ा कदम उठाते हुए यह स्पष्ट संदेश दिया है कि सरकारी योजनाओं में जनता के पैसे का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
तकनीकी सहायक की संविदा बर्खास्त, अन्य कर्मियों पर जुर्माना
प्रशासनिक जांच में निर्माण कार्य के मूल्यांकन और तकनीकी मानकों में गंभीर खामियां प्रमाणित होने के बाद तकनीकी सहायक रोहित कुमार की संविदा सेवाएं 30 अक्टूबर को तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गईं. इसके साथ ही गड़बड़ी में शामिल पाए गए दो अन्य तकनीकी सहायकों अविनाश भारती और कृपाशंकर गुप्ता की जवाबदेही भी तय की गई है. प्रशासन ने इन दोनों तकनीकी सहायकों पर अनुशासनहीनता और लापरवाही के चलते एक-एक हजार रुपये का आर्थिक दंड लगाया है.
9.13 लाख रुपये की वित्तीय वसूली और 17 परियोजनाओं के भुगतान पर रोक
जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर जिला प्रशासन ने गड़बड़ी के एवज में संबंधित दोषी पक्ष से 9.13 लाख रुपये की शासकीय वसूली का आदेश जारी किया है. जब तक संपूर्ण मामलों की विस्तृत जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक कुल 17 चेकडैम निर्माण कार्यों के सरकारी भुगतान पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है. भुगतान रोके गए इन कार्यों में ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग के अधीन आने वाले 12 कार्य और राजपुर जनपद पंचायत क्षेत्र के तहत चल रहे 5 कार्य शामिल हैं.
कार्यपालन अभियंता, एसडीओ और जनपद सीईओ को कारण बताओ नोटिस
इस पूरे मामले में निचले स्तर के कर्मचारियों के साथ-साथ निगरानी रखने वाले वरिष्ठ विभागीय अधिकारियों पर भी जिम्मेदारी तय की गई है. कार्य में लापरवाही और पर्यवेक्षण में ढिलाई बरतने को लेकर कार्यपालन अभियंता, एसडीओ और जनपद सीईओ सहित संबंधित उच्चाधिकारियों को औपचारिक कारण बताओ नोटिस थमाया गया है. प्रशासन ने इन अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा है कि निर्माण के दौरान ऐसी भारी अनियमितताएं उनकी नजर से कैसे चूक गईं.
पारदर्शिता और गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं
मुख्य कार्यपालन अधिकारी आशुतोष चतुर्वेदी ने बताया कि प्राप्त शिकायतों पर बिना किसी देरी के संज्ञान लेते हुए स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई गई थी. उन्होंने बताया कि जांच के दौरान जब निर्माण में तय मानकों की अनदेखी और अधिक मूल्यांकन का मामला सिद्ध हुआ, तो नियमों के अनुरूप संविदा समाप्ति, वसूली और अर्थदंड की कार्रवाई अमल में लाई गई. उन्होंने यह भी दोहराया कि जिले भर में चल रहे सभी विकास कार्यों में पूरी पारदर्शिता और उच्च गुणवत्ता बनाए रखना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है.



















