अंबिकापुर में कांग्रेस मंडल अध्यक्ष गुरप्रीत सिद्धू को डाक के माध्यम से भेजे गए एक पत्र के जरिए जान से मारने की धमकी दी गई है। यह पत्र 29 अक्टूबर को उनके पास पहुंचा, जिसमें सनसनीखेज दावा किया गया है कि उनकी हत्या की योजना जेल की चारदीवारी के भीतर बनाई जा रही है। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि इस वारदात को अंजाम देने के लिए झारखंड, उत्तर प्रदेश और हरियाणा के शूटरों से संपर्क साधा गया है। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए कांग्रेस नेता ने फौरन पुलिस अधीक्षक से मिलकर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी और लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिस पर पुलिस विभाग ने जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है।
दो महीने पहले भी हुआ था जानलेवा हमला
गुरप्रीत सिद्धू पर इससे पहले भी हिंसक हमला हो चुका है। 29 अगस्त की तारीख को दर्रीपारा स्थित उनके आवास के समीप उन पर जानलेवा हमला किया गया था। उस हमले के ठीक दो महीने बाद अब 29 अक्टूबर को यह धमकी भरा पत्र सामने आया है। इस पत्र के मिलने के बाद कांग्रेस नेता ने पुलिस अधीक्षक राजेश अग्रवाल से मुलाकात की और अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की। पुलिस अधीक्षक ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अधीनस्थों को त्वरित जांच के कड़े निर्देश दिए हैं।
गुमनाम पत्र और लिफाफे पर दर्ज नाम
प्राप्त जानकारी के अनुसार, भेजे गए पत्र के भीतर प्रेषक का नाम दर्ज नहीं है, लेकिन लिफाफे के ऊपर एक नाम लिखा हुआ मिला है। पत्र के प्रारूप में इसे गुप्त मुखबिर की सूचना की तरह प्रस्तुत किया गया है। पत्र में विस्तार से लिखा गया है कि जेल के अंदर बंद आरोपियों ने अंतरराज्यीय शूटरों के साथ सांठगांठ की है और इस काम के लिए बड़ी रकम का लेन-देन भी हुआ है। अंबिकापुर पुलिस अब पत्र की लिखावट, डाक विभाग की मुहर और लिफाफे पर लिखे नाम के आधार पर स्रोत का पता लगाने में जुटी हुई है।
कांग्रेस नेता ने लगाया पुरानी रंजिश का आरोप
गुरप्रीत सिद्धू ने इस पूरे मामले के पीछे एक संगठित गिरोह का हाथ होने का आरोप लगाया है। उन्होंने पूर्व के हमले का जिक्र करते हुए कहा कि उस वारदात के पीछे प्रकाश साहू की भूमिका थी, जिसके बाद सुनील साहू समेत अन्य आरोपियों को जेल भेजा गया था। सिद्धू के अनुसार, पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि जेल में बंद सुनील साहू और उसके साथियों ने बाहरी राज्यों के शूटरों के साथ हाथ मिलाया है।
“जो लोग मेरी हत्या करवाना चाहते हैं, उनका एक संगठित गिरोह है। उसके मुखिया ने ही यह काम किया है। प्रकाश साहू पिछले डेढ़ साल से मेरे पीछे पड़ा हुआ है।”
कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि यह विवाद करीब डेढ़ साल पुराना है, जब प्रकाश साहू का बेटा एक प्राथमिकी (FIR) में नामजद हुआ था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके खिलाफ एक नाबालिग बच्चे का इस्तेमाल कर झूठी एफआईआर दर्ज करवाई गई थी, और संबंधित पक्ष बार-बार सार्वजनिक मंचों पर यह दावा करता रहा है कि उन्होंने नाबालिग के साथ मारपीट की थी।
पुलिस प्रशासन का रुख और जांच की दिशा
इस पूरे मामले को लेकर सरगुजा के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) रितेश चौधरी ने आधिकारिक बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गुरप्रीत सिद्धू की ओर से एक लिखित शिकायत प्राप्त हुई है और पुलिस प्रशासन सभी संभावित पहलुओं पर गहनता से छानबीन कर रहा है।
“एक शिकायत प्राप्त हुई है, जिस पर जांच की जा रही है। जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनसे अवगत करा दिया जाएगा। हम सभी पहलुओं पर जांच करेंगे।”
जब एएसपी से कांग्रेस नेता से जुड़े पिछले विवादों और पूर्व के मामलों के संदर्भ में पूछा गया, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि वे पूर्व के आपराधिक मामले हैं, जिन पर पहले ही अपराध दर्ज किया जा चुका है और उनकी कानूनी विवेचना निरंतर जारी है। फिलहाल पुलिस टीम धमकी भरे पत्र, उसमें शामिल दावों और जेल कनेक्शन की कड़ियों को जोड़ने में लगी हुई है।
























