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जहानाबाद के किसान का जुड़ाव: 35 साल बाद भी खेतों में दौड़ रहा वही पुराना HMT ट्रैक्टर, जानिए 90 के दशक में कैसे होती थी खरीदबिहार
15 जून 2026, 9:24 am (90 दिन पहले)· 0

जहानाबाद के किसान का जुड़ाव: 35 साल बाद भी खेतों में दौड़ रहा वही पुराना HMT ट्रैक्टर, जानिए 90 के दशक में कैसे होती थी खरीद

जहानाबाद के किसान चंद्र शेखर का HMT ट्रैक्टर 35 साल बाद भी चालू है। उन्होंने बताया कि 90 के दशक में ट्रैक्टर खरीदना आज जैसा आसान नहीं था।

खेती-किसानी सदियों से हमारे देश की रीढ़ रही है, लेकिन इसका चेहरा वक्त के साथ पूरी तरह बदल गया। एक दौर वह था जब हल खींचने के लिए बैल, भैंस और इंसानी ताकत ही किसान का असली सहारा हुआ करती थी और हर काम पसीने से तय होता था। फिर आधुनिकता ने दस्तक दी और खेतों में बैलों की जगह ट्रैक्टर ने ले ली। आज हालत यह है कि जैसे खाद और बीज के बिना फसल नहीं उगाई जा सकती, वैसे ही ट्रैक्टर के बिना खेती की कल्पना भी मुश्किल है। खेती में इसकी भूमिका अब खाद-बीज जितनी ही अहम मानी जाती है।

आज आसान, पहले मुश्किल थी ट्रैक्टर की राह

मौजूदा दौर में ट्रैक्टर खरीदने पर सरकार किसानों की आर्थिक मदद करती है, जिससे यह काम पहले के मुकाबले काफी सरल हो गया है। लेकिन जरा उस समय की कल्पना कीजिए जब ट्रैक्टर बाजार में नया-नया आया था और गिने-चुने लोगों के पास ही दिखता था — तब इसे हासिल करना कितना टेढ़ा रहा होगा। इसी कहानी को समझने के लिए हमें 1991 के दौर में लौटना होगा। जहानाबाद जिले के किसान चंद्र शेखर आज भी 22 एकड़ जमीन पर खेती करते हैं और अपने खेतों में हर तरह की फसल उगाते हैं।

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दादा के जमाने से चली आ रही खेती

चंद्र शेखर TrendKia को बताते हैं कि उनके परिवार में खेती कोई नई बात नहीं, बल्कि दादा के समय से ही यही पेशा चला आ रहा है। आज वे खुद इसी से अपने परिवार का खर्च चला रहे हैं। हालांकि उन्हें इस बात का अफसोस है कि नई पीढ़ी अब खेती से दूरी बनाने लगी है। वे 1990 के दशक को याद करते हुए कहते हैं कि उस वक्त खेती ही आजीविका का सबसे बड़ा जरिया हुआ करती थी। उनके पिता को लगा कि इतनी बड़ी जमीन पर सिर्फ बैल और मजदूरों के बल पर खेती करना बेहद कठिन है, और तभी परिवार ने ट्रैक्टर खरीदने का फैसला किया। इसके बाद सवालों का सिलसिला शुरू हुआ — ट्रैक्टर की कीमत क्या है, उसका बॉडी पार्ट्स कहां तैयार होता है और आखिर यह मिलता कैसे है।

2 लाख में तैयार हुआ था ट्रैक्टर

चंद्र शेखर बताते हैं कि उनके ट्रैक्टर के घर आने की कहानी अपने आप में दिलचस्प है। उनके मुताबिक उस दौर में नियम ऐसा था कि ट्रैक्टर सिर्फ उन्हीं किसानों को मिल पाता था जिनके पास 22 एकड़ से ज्यादा जमीन होती थी। TrendKia इस नियम की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता, यह बात किसान के बताए अनुसार ही दर्ज की जा रही है। चंद्र शेखर के पास 22 एकड़ जमीन थी और उन्होंने HMT का एक ट्रैक्टर खरीदा। उस वक्त इंजन पार्ट्स की कीमत एक लाख 40 हजार रुपए थी, जबकि बॉडी पार्ट्स और बाकी सामान अलग से खरीदने और जुड़वाने में खर्च मिलाकर कुल करीब 2 लाख रुपए लगे। वे गर्व से कहते हैं कि इस ट्रैक्टर को आज 35 साल हो चुके हैं, फिर भी यह पूरी तरह सही-सलामत है और इसी से खेती का काम आज भी चल रहा है।

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