घाटी और सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति भंग करने की नापाक कोशिशों के खिलाफ सुरक्षा बलों ने दो बड़े अभियानों में सफलता हासिल की है। जम्मू-कश्मीर के बारामूला और राजौरी जिलों में मुस्तैद जवानों ने हथियारों की खेप पहुंचाने और हमले करने की साजिश को नाकाम कर दिया। नियंत्रण रेखा के समीप भारतीय हवाई क्षेत्र में दाखिल हुए पाकिस्तानी ड्रोन को आधुनिक रक्षा प्रणाली से खदेड़ दिया गया, वहीं दूसरी ओर नाका जांच के दौरान दो विस्फोटक हथगोले बरामद कर एक संदिग्ध को हिरासत में लिया गया।
नौशेरा सेक्टर में हवाई घुसपैठ की कोशिश नाकाम
राजौरी जिले के नौशेरा इलाके में नियंत्रण रेखा के पास 27 और 28 अगस्त की मध्यरात्रि को संदिग्ध हलचल देखी गई। रुमलिधारा के करीब तीन पाकिस्तानी ड्रोन भारतीय सीमा के भीतर प्रवेश करने की कोशिश कर रहे थे। सरहद पर तैनात भारतीय थल सेना के सतर्क जवानों ने इन उड़ती हुई वस्तुओं को तुरंत पहचान लिया। बिना कोई समय गंवाए सेना ने अपने उच्च स्तरीय काउंटर-ड्रोन सिस्टम को सक्रिय कर दिया।
आधुनिक एंटी-ड्रोन तकनीक के प्रभाव में आते ही तीनों पाकिस्तानी ड्रोन वापस अपनी सीमा की तरफ भागने पर मजबूर हो गए। इस त्वरित कार्रवाई के तुरंत बाद सेना और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर सघन तलाशी अभियान शुरू किया। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि ड्रोन से कोई संदिग्ध सामग्री या हथियार भारतीय इलाके में न गिराए गए हों।
बारामूला में संयुक्त चेकिंग के दौरान हैंड ग्रेनेड बरामद
दूसरी कार्रवाई उत्तरी कश्मीर के बारामूला जिले में हुई। कुंजर पुलिस स्टेशन के अधीन आने वाले वुसान बांगिल इलाके में सुरक्षा बलों ने विशेष नाका लगाया था। इस जांच अभियान में कुंजर पुलिस, विशेष अभियान समूह (एसओजी), सीआरपीएफ की 176 बटालियन और 2 राष्ट्रीय राइफल्स के जवान संयुक्त रूप से शामिल थे।
वाहनों और राहगीरों की तलाशी के समय एक व्यक्ति ने सुरक्षा बलों को देखते ही मौके से भागने का प्रयास किया। हालांकि, चाक-चौबंद जवानों ने तेजी दिखाते हुए उसे तुरंत दबोच लिया। पकड़े गए व्यक्ति की पहचान कुंजर के हरदू अबूरा निवासी शाकिर नबी लोन के रूप में हुई है। तलाशी लेने पर उसके कब्जे से दो हैंड ग्रेनेड मिले। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ कुंजर थाने में प्राथमिकी दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।
ड्रोन तकनीक और ओवरग्राउंड वर्करों के नेटवर्क पर नकेल
आतंकी संगठन लंबे समय से जम्मू-कश्मीर में अशांति फैलाने के लिए सीमा पार से हथियार, कारतूस, नकदी और नशीले पदार्थों की आपूर्ति करने के लिए ड्रोन तकनीक का सहारा लेते रहे हैं। सीमा पार बैठे आका इन चीजों को भारतीय क्षेत्र में गिराते हैं, जिसे बाद में आतंकियों के ओवरग्राउंड वर्कर उठाकर सक्रिय आतंकवादियों तक पहुंचाते हैं।
इस बढ़ते खतरे को भांपते हुए नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर भारतीय सेना व बीएसएफ ने अत्यधिक आधुनिक एंटी-ड्रोन तकनीक तैनात की है। इस तरह के हाई-टेक सुरक्षा इंतजामों के कारण लगातार दुश्मनों की साजिशें विफल हो रही हैं और घुसपैठियों के नेटवर्क को तोड़ा जा रहा है।





















