देशभर में आयोजित होने वाली प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बहाल करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के शीर्ष प्रशासनिक ढांचे में व्यापक पुनर्गठन किया है। हाल की परीक्षाओं में सामने आईं गड़बड़ियों और पेपर लीक के गंभीर आरोपों के बीच परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए चार वरिष्ठ सिविल सेवा अधिकारियों को महत्वपूर्ण पदों पर तैनात किया गया है। सरकार की इस पहल का मुख्य उद्देश्य परीक्षा केंद्रों पर निगरानी तंत्र को अत्यधिक सख्त बनाना, प्रशासनिक खामियों को दूर करना और अभ्यर्थियों के डगमगाए विश्वास को पुनः स्थापित करना है। इसके साथ ही आम जनता, छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों की सीधी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए एक विस्तृत परामर्श अभियान भी आरंभ किया गया है।
वरिष्ठ नौकरशाहों को सौंपी गई प्रशासनिक जिम्मेदारी
प्रतियोगी परीक्षाओं के सुचारू एवं त्रुटिहीन संचालन के लिए केंद्र सरकार ने भारतीय प्रशासनिक सेवा, भारतीय पुलिस सेवा और भारतीय राजस्व सेवा के अनुभवी अधिकारियों पर भरोसा जताया है। उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत आईआरएस अधिकारी अंशुमान शर्मा को राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी में ज्वाइंट सेक्रेटरी के पद पर नियुक्त किया गया है। उनकी यह तैनाती पांच वर्ष की अवधि या अगले आदेश तक के लिए की गई है, जिसके तहत शुरुआती आदेश के अनुसार वे दो वर्ष तक एजेंसी में अपनी सेवाएं देंगे।
इसके अतिरिक्त, प्रशासनिक तंत्र को मजबूती देने के लिए आईपीएस अधिकारी रवि कुमार सिंह तथा आईएएस अधिकारी प्रसन्ना वेंकटेश वी को एजेंसी में डायरेक्टर का महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा गया है। वहीं 2016 बैच के आईआरएस अधिकारी अमित समदरिया को ज्वाइंट डायरेक्टर पद की जिम्मेदारी दी गई है। कार्मिक मंत्रालय ने प्रशासनिक तत्परता दिखाते हुए इन सभी नवनियुक्त अधिकारियों को तीन सप्ताह की समयावधि के भीतर अपना-अपना पदभार ग्रहण करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।
परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए जनता से मांगे सुझाव
परीक्षा संचालन में बुनियादी और दूरगामी सुधार लाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने एक उच्चस्तरीय टास्क फोर्स का गठन किया है। यह विशेष कमेटी देश भर के विद्यार्थियों, उनके अभिभावकों, अध्यापकों और प्रबुद्ध नागरिकों से परीक्षा प्रणाली को त्रुटिरहित बनाने के लिए प्रत्यक्ष सुझाव आमंत्रित कर रही है। सरकार का स्पष्ट मानना है कि संपूर्ण सुधार प्रक्रिया में जनसामान्य के व्यावहारिक अनुभवों और सुझावों का समावेश अत्यंत आवश्यक है।
यदि आपके पास प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और फुलप्रूफ बनाने से जुड़ा कोई व्यावहारिक विचार है, तो आप 13 सितंबर 2026 तक अपने बहुमूल्य सुझाव जमा करा सकते हैं। इसके लिए सरकार और एजेंसी ने बहुआयामी संचार माध्यम उपलब्ध कराए हैं। नागरिक अपने विचार व्हाट्सएप, आधिकारिक वेबसाइट, टोल-फ्री नंबर अथवा ईमेल के जरिए प्रेषित कर सकते हैं। सरकार ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि ये सुझाव हिंदी, अंग्रेजी या देश की किसी भी क्षेत्रीय भाषा में भेजे जा सकते हैं।
पेपर लीक विवाद और साख की बहाली
हाल के समय में नीट-यूजी जैसी देश की सबसे बड़ी और प्रतिष्ठित परीक्षाओं में पेपर लीक और विभिन्न प्रकार की अनियमितताओं के संगीन आरोप लगे थे। इन अप्रिय घटनाओं के कारण देश भर के लाखों अभ्यर्थियों तथा उनके परिजनों के मन में परीक्षा प्रणाली की निष्पक्षता को लेकर गहरी आशंकाएं पैदा हो गई थीं। इसके परिणामस्वरूप संपूर्ण व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन की मांग देशव्यापी स्तर पर जोर पकड़ रही थी।
संस्थान की साख पर लगे इस आघात से निपटने के लिए सरकार ने दोहरी रणनीति अपनाई है। एक तरफ जहां अनुभवी प्रशासनिक अधिकारियों की नई टीम को मोर्चे पर उतारा गया है, वहीं दूसरी तरफ आम जनता की सीधी भागीदारी के माध्यम से प्रणाली की हर तकनीकी एवं ढांचागत कमजोरी को समाप्त करने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार को विश्वास है कि इन निर्णायक कदमों से प्रतियोगी परीक्षाओं की साख और निष्पक्षता फिर से कायम हो सकेगी।





















