अभिषेक बनर्जी के आवास के बाहर हंगामा, सांसद ने लगाया छह महीने में सातवीं बार हमले का आरोपजगदलपुर के पटाखा बाजार में सजी नई वैरायटी, इस दिवाली हैरान कर देगी आवाजवोडाफोन आइडिया का नया प्लान, मात्र 35 रुपये में दो ओटीटी ऐप्स और डेटामूलांक 5 राशिफल 7 नवंबर 2026: मीठी बातचीत से जीतेंगे लोगों का दिल, रिश्तों में बनेगा बेहतरीन तालमेलजमशेदपुर के विशाल शर्मा ने साइकिल को बनाया चलती-फिरती दुकान, रोजाना कमाते हैं इतने रुपयेअलवर में फिटनेस और वन्यजीव संरक्षण का अनूठा संगम, रणदीप हुड्डा ने की टाइगर मैराथन की शुरुआतजम्मू-कश्मीर में ड्रग्स के खिलाफ बड़ा एक्शन, 1711 किलो नशीले पदार्थ जब्त और 1941 गिरफ्तारगाजियाबाद की वसुंधरा पुलिस चौकी में जोरदार धमाका, डिलीवरी बॉय घायलमूलांक 6 राशिफल 7 नवंबर 2026: रिश्तों की हकीकत और उम्मीदों के टूटने का दिनकानपुर के पब के बाहर खूनी संघर्ष, कांच की बोतल से सिर फोड़ा और ताबड़तोड़ थप्पड़ बरसाए
जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस में आंतरिक बगावत, 25 विधायकों ने अल्टीमेटम देकर मांगा नया मंत्रिमंडलभारत
1 नव॰ 2026, 10:40 pm (6 दिन पहले)· 0

जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस में आंतरिक बगावत, 25 विधायकों ने अल्टीमेटम देकर मांगा नया मंत्रिमंडल

जम्मू-कश्मीर में उमर अब्दुल्ला सरकार के सामने बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा हो गया है, जहाँ नेशनल कॉन्फ्रेंस के 25 विधायकों ने मंत्रिमंडल में फेरबदल और सलाहकार को हटाने के लिए 14 दिन का समय दिया है।

जम्मू-कश्मीर की निर्वाचित सरकार अपने ही खेमे के भीतर उठे असंतोष के चलते भारी राजनीतिक दबाव में घिर गई है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की अगुवाई वाली नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर आंतरिक मतभेद खुलकर सतह पर आ गए हैं, जहाँ पार्टी के 25 विधायकों ने नेतृत्व के सामने कड़ी माँगें रखते हुए 14 दिनों की मोहलत तय कर दी है। इन असंतुष्ट विधायकों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित अवधि के भीतर उनकी शर्तों पर अमल नहीं हुआ, तो वे सीधे राजभवन जाकर सरकार को दिए गए विधायी समर्थन को वापस लेने की औपचारिक प्रक्रिया प्रारंभ करने से पीछे नहीं हटेंगे।

मंत्रिमंडल फेरबदल और सलाहकार को हटाने की कड़ी माँगें

विधायकों के इस बागी समूह द्वारा पेश की गई माँगों की सूची में सत्ता प्रतिष्ठान के मौजूदा ढांचे में आमूलचूल बदलाव की बात कही गई है। नाराज विधायकों का प्रमुख आग्रह है कि वर्तमान में कार्यरत मंत्रियों को अगले 14 दिनों के भीतर उनके संबंधित विभागों और पदभारों से पूरी तरह मुक्त कर दिया जाए। इसके अलावा, मुख्यमंत्री के सलाहकार को भी उनके पद से तत्काल प्रभाव से विदा करने की स्पष्ट माँग रखी गई है।

ये भी पढ़ें

विधायकों का तर्क है कि सरकार के कामकाज और नई नियुक्तियों में पूरी पारदर्शिता और योग्यता को सर्वोपरि आधार बनाया जाना चाहिए। उनका स्पष्ट कहना है कि नई कैबिनेट के गठन का निर्णय किसी चुनिंदा या संकीर्ण समूह के इशारे पर तय करने के बजाय समूचे विधायक दल के सदस्यों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श करके ही लिया जाना आवश्यक है। यह कदम सीधे तौर पर शीर्ष नेतृत्व और मुख्यमंत्री की मौजूदा कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। यदि संगठन का शीर्ष नेतृत्व इन माँगों के सामने झुकता है, तो प्रदेश में बड़े पैमाने पर प्रशासनिक और राजनीतिक फेरबदल तय माना जा रहा है।

आर्टिकल 370 और 35A के वादों पर पार्टी पर सवाल

मंत्रालयों में फेरबदल की जिद के साथ-साथ असंतुष्ट विधायकों ने नेशनल कॉन्फ्रेंस की मूल विचारधारा और चुनावी वादों के क्रियान्वयन को लेकर भी गहरा रोष प्रकट किया है। विधायकों ने सरकार पर दबाव बनाया है कि वह जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 और आर्टिकल 35A की बहाली के एजेंडे को लेकर केंद्र सरकार के समक्ष अधिक मुखर और सक्रिय भूमिका निभाए।

इन जन प्रतिनिधियों का कहना है कि विधानसभा चुनावों के दौरान जनता से जो संवैधानिक अधिकार और विशेष सुरक्षा कवच लौटाने का वादा किया गया था, उसे पूरा करने की दिशा में मौजूदा सरकार ढीला रवैया दिखा रही है। विधायकों का आरोप है कि केंद्र की भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार के सामने इन बुनियादी और संवेदनशील विषयों को पूरी दृढ़ता के साथ नहीं उठाया जा रहा है। असंतुष्ट खेमे ने साफ किया है कि वे इन वैचारिक बिंदुओं पर किसी भी तरह के राजनीतिक समझौते के पक्ष में नहीं हैं और पार्टी को जनता के प्रति अपनी जवाबदेही निभानी ही होगी।

राजभवन जाने की चेतावनी और विधानसभा का शक्ति संतुलन

असंतोष जता रहे विधायकों ने स्पष्ट रुख अख्तियार करते हुए अल्टीमेटम दिया है कि तय सीमा में निर्णय न होने पर वे उपराज्यपाल के पास राजभवन जाकर समर्थन वापसी का पत्र सौंपेंगे। यह घटनाक्रम जम्मू-कश्मीर विधानसभा के संख्याबल को देखते हुए उमर अब्दुल्ला प्रशासन के लिए बेहद संवेदनशील साबित हो सकता है।

कुल 90 सीटों वाली जम्मू-कश्मीर विधानसभा में नेशनल कॉन्फ्रेंस के पास 41 विधायक हैं। ऐसे समीकरणों में यदि 25 विधायक अलग राह चुनते हैं या सरकार से अपना समर्थन औपचारिक तौर पर वापस लेते हैं, तो सत्तारूढ़ दल की तकनीकी और राजनीतिक स्थिति अत्यंत नाजुक हो जाएगी। भले ही सरकार को कुछ निर्दलीय या अन्य बाहरी सदस्यों का सहयोग प्राप्त हो, लेकिन अपनी ही पार्टी के इतने बड़े धड़े की बगावत के बाद सदन के पटल पर स्पष्ट बहुमत साबित करना शासन के लिए एक असाधारण चुनौती बन जाएगा। हालांकि अभी यह देखना बाकी है कि क्या यह महज दबाव बनाने का राजनीतिक पैंतरा है या विधायक वास्तव में राजभवन का दरवाजा खटखटाएंगे।

सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी के इस्तीफे से बढ़ा दबाव

नेशनल कॉन्फ्रेंस के लिए यह संकट केवल विधानसभा सदस्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि पार्टी के प्रमुख सांसदों की ओर से भी मोर्चा खोल दिया गया है। श्रीनगर संसदीय क्षेत्र से लोकसभा सदस्य आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने पार्टी और संसद की सदस्यता छोड़ने की सार्वजनिक घोषणा कर दी है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वह 3 नवंबर को नेशनल कॉन्फ्रेंस की प्राथमिक सदस्यता और लोकसभा सांसद के पद से औपचारिक तौर पर अपना त्यागपत्र दे देंगे।

सांसद रुहुल्लाह ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर सीधा हमला बोलते हुए कहा है कि संगठन अपनी ऐतिहासिक वैचारिक प्रतिबद्धताओं से भटक रहा है और चुनाव में जनता से किए गए वादों पर खरा उतरने में नाकाम रहा है। उन्होंने विशेष रूप से 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर के विशेष संवैधानिक दर्जे में किए गए ऐतिहासिक बदलावों को चुनौती देने के वादे का उल्लेख किया और कहा कि पार्टी इस मोर्चे पर अपेक्षित आक्रामकता और निष्ठा नहीं दिखा पा रही है। एक तरफ संसद सदस्य का इस्तीफा और दूसरी तरफ 25 विधायकों का खुला विद्रोह, इन दोनों घटनाक्रमों ने मिलकर राज्य की सत्ताधारी पार्टी को दोहरे संकट के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है।

सवाल-जवाब

नेशनल कॉन्फ्रेंस के नाराज विधायकों ने क्या अल्टीमेटम दिया है?
पार्टी के करीब 25 नाराज विधायकों ने नेतृत्व को अपनी माँगें पूरी करने के लिए 14 दिन की समयसीमा दी है।
बागी विधायकों की मुख्य माँगें क्या हैं?
विधायक मौजूदा मंत्रियों को पदों से हटाने, मुख्यमंत्री के सलाहकार की विदाई और नए सिरे से पारदर्शी तरीके से मंत्रिमंडल गठन की माँग कर रहे हैं।
यदि माँगें पूरी नहीं हुईं तो विधायकों ने क्या कदम उठाने की चेतावनी दी है?
विधायकों ने चेतावनी दी है कि तय समय में कार्रवाई न होने पर वे राजभवन जाकर सरकार से विधायी समर्थन वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करेंगे।
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में नेशनल कॉन्फ्रेंस की सीटों की स्थिति क्या है?
90 सदस्यीय विधानसभा में नेशनल कॉन्फ्रेंस के पास कुल 41 विधायक हैं।
सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने क्या घोषणा की है?
श्रीनगर सांसद रुहुल्लाह ने 3 नवंबर को नेशनल कॉन्फ्रेंस और लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने का ऐलान किया है।
विधायकों ने आर्टिकल 370 और 35A को लेकर क्या आपत्ति जताई है?
विधायकों का आरोप है कि सरकार चुनाव में किए गए वादे के अनुसार आर्टिकल 370 और 35A की बहाली का मुद्दा केंद्र के सामने मजबूती से नहीं उठा रही है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Rohan Gupta@rohan-gupta·5 दिन पहले

उमर सरकार के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई है। जब अपने ही विधायक 14 दिन का अल्टीमेटम दे दें, तो डिजिटल दौर में ऐसी अंदरूनीकलह की खबरें सोशल मीडिया पर सरकार की साख पलभर में गिरा देती हैं।

Arjun Mehta@arjun-mehta·5 दिन पहले

सरकार बने अभी कुछ ही दिन हुए और चौबीस विधायक अभी से आँखें दिखाने लगे, कमाल है!

Ravikash Gupta@ravikash·5 दिन पहले

अरे अर्जुन भाई, राजनीति इतनी सीधी कहाँ होती है। अंदरखाने कुछ तो बड़ा पक रहा होगा जो ये खुलकर सामने आ गए।

Karan Malhotra@karan-malhotra·5 दिन पहले

चौदह दिन में सरकार गिराने की धमकी लग तो बड़ी रही है, पर लगता नहीं कि इतनी जल्दी कोई विधायक पार्टी छोड़ेगा।

Rohan Verma@rohan-verma·5 दिन पहले

करण भाई, यूपी में भी विधायकों की नाराज़गी अक्सर ऐसे ही 14 दिन के अल्टीमेटम से शुरू होती है, पर यहाँ उमर साहब के लिए संभालना सच में भारी पड़ेगा।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp