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जापान में शैफाली वर्मा ने ठोका पहला टी20 शतक, रोहतक में दादा संतलाल की आंखों से छलके खुशी के आंसूहरियाणा
21 सित॰ 2026, 1:43 pm (18 घंटे पहले)· 0

जापान में शैफाली वर्मा ने ठोका पहला टी20 शतक, रोहतक में दादा संतलाल की आंखों से छलके खुशी के आंसू

एशियन गेम्स 2026 के सेमीफाइनल में बांग्लादेश के खिलाफ शैफाली वर्मा ने 49 गेंदों में नाबाद 100 रन बनाए, जिसके बाद रोहतक में उनके दादा संतलाल भावुक हो उठे।

जापान की धरती पर आयोजित हो रहे एशियन गेम्स 2026 के सेमीफाइनल मुकाबले में भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने बांग्लादेश को धूल चटा दी। इस मैच में भारतीय सलामी बल्लेबाज शैफाली वर्मा ने विस्फोटक अंदाज में खेलते हुए अपने अंतरराष्ट्रीय टी20 करियर का पहला शतक जड़ा। शैफाली की इस ऐतिहासिक पारी के बाद हरियाणा के रोहतक स्थित उनके घर में जश्न और भावुकता का माहौल देखा गया। घर पर अकेले बैठकर मैच देख रहे उनके दादा संतलाल वर्मा अपनी पोती के इस मुकाम को देखकर भावुक हो गए और उनकी आंखों से खुशी के आंसू निकल पड़े।

रोहतक में अकेले बैठकर दादा ने देखा पूरा मुकाबला

शैफाली के दादा संतलाल वर्मा ने बताया कि जब यह मुकाबला चल रहा था, तब वह घर पर बिल्कुल अकेले थे। परिवार के बाकी सदस्य, जिनमें शैफाली के माता-पिता भी शामिल हैं, गणेश विसर्जन के सिलसिले में हरिद्वार गए हुए थे। संतलाल ने टेलीविजन के सामने बैठकर शुरू से लेकर अंत तक पूरा मैच देखा। जैसे ही शैफाली ने अपना शतक पूरा किया, उनके दादा की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने बताया कि वह लंबे अरसे से इस पल का इंतजार कर रहे थे कि उनकी पोती अंतरराष्ट्रीय टी20 क्रिकेट में तीन अंकों का आंकड़ा छुए।

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नर्वस नाइंटीज की कसक हुई दूर

संतलाल वर्मा के अनुसार शैफाली इससे पहले कई मौकों पर शतक के बेहद करीब पहुंचकर चूक गई थीं, लेकिन इस बार उन्होंने कोई गलती नहीं की और बेहद संयम व आक्रामकता के साथ शानदार शतकीय पारी खेली। उन्होंने अपनी पुरानी बातचीत को याद करते हुए बताया कि शैफाली जब भी खेल के बाद घर लौटती है, तो हमेशा कहती है कि दादाजी, वह देश के लिए बेहतरीन खेल दिखाएगी और भारत का गौरव बढ़ाएगी। शैफाली की कड़ी मेहनत पर गर्व जताते हुए उन्होंने विश्वास जताया कि वह आने वाले समय में भी भारतीय टीम के लिए इसी तरह मैच जिताऊ प्रदर्शन जारी रखेगी।

स्मृति मंधाना को पछाड़कर बनाया नया रिकॉर्ड

बांग्लादेश के खिलाफ खेले गए इस सेमीफाइनल मुकाबले में शैफाली वर्मा ने सिर्फ 49 गेंदों का सामना करते हुए नाबाद 100 रनों की तूफानी पारी खेली। अपनी इस पारी के दौरान उन्होंने जोरदार छक्के भी लगाए। इन छक्कों के दम पर शैफाली अब भारतीय महिला टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के इतिहास में सबसे ज्यादा छक्के लगाने वाली बल्लेबाज बन गई हैं। उनके नाम अब टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में कुल 104 छक्के दर्ज हो चुके हैं। इस शानदार मुकाम पर पहुंचते हुए उन्होंने अपनी साथी खिलाड़ी स्मृति मंधाना का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया है।

खिताब जीतने की मजबूत उम्मीद

भारतीय महिला टीम के समग्र खेल पर बात करते हुए संतलाल वर्मा ने कहा कि टीम के खिलाड़ियों ने बल्लेबाजी के साथ-साथ गेंदबाजी और फील्डिंग तीनों ही विभागों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। किसी भी बड़े टूर्नामेंट को जीतने के लिए तीनों क्षेत्रों में ऐसा ही संतुलन जरूरी होता है। टीम के इस शानदार खेल को देखते हुए उन्होंने पूरी उम्मीद जताई कि भारतीय महिला टीम इस बार एशियन गेम्स की ट्रॉफी जीतकर ही वतन लौटेगी।

सवाल-जवाब

शैफाली वर्मा ने एशियन गेम्स 2026 में किसके खिलाफ शतक बनाया?
शैफाली वर्मा ने जापान में चल रहे एशियन गेम्स 2026 के सेमीफाइनल में बांग्लादेश के खिलाफ शतक जड़ा।
शैफाली वर्मा ने शतक पूरा करने के लिए कितनी गेंदें खेलीं?
उन्होंने 49 गेंदों में नाबाद 100 रन बनाकर अपने अंतरराष्ट्रीय टी20 करियर का पहला शतक पूरा किया।
रोहतक में मैच के समय शैफाली के दादा अकेले क्यों थे?
शैफाली के माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्य गणेश विसर्जन के लिए हरिद्वार गए हुए थे, इसलिए उनके दादा संतलाल घर पर अकेले थे।
टी20 अंतरराष्ट्रीय में भारत के लिए सबसे ज्यादा छक्के लगाने का रिकॉर्ड अब किसके नाम है?
अब यह रिकॉर्ड शैफाली वर्मा के नाम है, जिन्होंने कुल 104 छक्के लगाकर स्मृति मंधाना को पीछे छोड़ दिया है।
शैफाली के शतक के बाद उनके दादा संतलाल वर्मा की क्या प्रतिक्रिया थी?
मैच पूरा देखने के बाद उनके दादा भावुक हो गए और खुशी के मारे उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Meera Joshi@meera-joshi·10 घंटे पहले

अकेले बैठकर ऐसा ऐतिहासिक पल देखना और दादाजी की आँखों में खुशी के आँसू आ जाना दिल को छू लेने वाला है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·10 घंटे पहले

अकेले मैच देखने वाली बात पर थोड़ा शक है, आज के दौर में रिश्तेदार फोन पर तुरंत अपडेट दे ही देते हैं।

Ravikash Gupta@ravikash·10 घंटे पहले

अरे अर्जुन भाई, फोन हो या न हो, अकेले टीवी के सामने बैठकर मैच देखने का मज़ा ही अलग है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·17 घंटे पहले

हालांकि यह खेल जगत की एक प्रेरणादायक सफलता की कहानी है, लेकिन इस पूरी घटना से सार्वजनिक भावना और पारिवारिक सुरक्षा के एक अलग पहलू पर भी रोशनी पड़ती है। जब पूरा परिवार गणेश विसर्जन के लिए हरिद्वार गया था, तब बुजुर्ग दादा का घर में अकेले रहना और इस ऐतिहासिक लम्हे का गवाह बनना यह दर्शाता है कि कैसे बड़े आयोजनों के दौरान परिवार की अनुपस्थिति में बुजुर्गों की सुरक्षा का मुद्दा अक्सर पीछे छूट जाता है। ऐसे आयोजनों और उत्सवों के बीच वरिष्ठ नागरिकों की व्यक्तिगत सुरक्षा सुनिश्चित करना समाज और परिवार दोनों की एक बड़ी जिम्मेदारी बनी रहनी चाहिए।

Rohan Verma@rohan-verma·17 घंटे पहले

यह भावनात्मक क्षण जहाँ एक तरफ़ खेल के मैदान पर ऐतिहासिक सफलता और रिकॉर्ड तोड़ उपलब्धि को दर्शाता है, वहीं दूसरी तरफ़ बड़े त्योहारों और आयोजनों के समय घरों में अकेले रहने वाले वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा के सामाजिक पहलू को भी सामने लाता है। जब परिवार के सदस्य धार्मिक अनुष्ठानों या यात्राओं के चलते बाहर होते हैं, तब घर पर मौजूद बुजुर्गों की देखभाल और संरक्षा की प्राथमिकता पर समाज को गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है, ताकि ऐसे खास मौकों पर जश्न की खुशियाँ किसी भी तरह की अनहोनी से प्रभावित न हों।

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