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जयपुर के पवन कुमावत अगले हफ्ते किर्गिस्तान रवाना, देश के लिए गोल्ड जीतने का लक्ष्यराजस्थान
6 सित॰ 2026, 8:38 am (19 दिन पहले)· 4

जयपुर के पवन कुमावत अगले हफ्ते किर्गिस्तान रवाना, देश के लिए गोल्ड जीतने का लक्ष्य

जयपुर के पवन कुमावत 8 से 12 सितंबर तक किर्गिस्तान में होने वाली वर्ल्ड स्ट्रेंथ लिफ्टिंग चैंपियनशिप में भारत की तरफ से 68 किलो भार वर्ग में उतरेंगे और थाइलैंड के कांस्य के बाद अब गोल्ड मेडल पर निशाना साधेंगे।

जयपुर के लालचन्दपुरा इलाके में रहने वाले पवन कुमावत अगले हफ्ते किर्गिस्तान के लिए रवाना होने वाले हैं, जहां वे भारतीय टीम का हिस्सा बनकर वर्ल्ड स्ट्रेंथ लिफ्टिंग चैंपियनशिप में हिस्सा लेंगे। यह प्रतियोगिता 8 से 12 सितंबर तक आयोजित होगी और पवन का लक्ष्य इस बार पदक का रंग बदलकर देश के लिए गोल्ड मेडल जीतना है।

दिल्ली से किर्गिस्तान तक का सफर

राजस्थान स्ट्रेंथ लिफ्टिंग संघ के सचिव चन्द्रेश सोनी के मुताबिक, पवन 7 सितंबर को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से बाकी भारतीय खिलाड़ियों के साथ किर्गिस्तान रवाना होंगे। सीनियर वर्ग के 68 किलो भार वर्ग में उन्हें टीम में जगह मिली है, और वे सालों से इस खेल की बारीकियों पर मेहनत करते आ रहे हैं।

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सिक्किम के ट्रायल ने खोला रास्ता

पवन का किर्गिस्तान जाने का रास्ता सिक्किम में हुई सीनियर स्ट्रेंथ लिफ्टिंग चैंपियनशिप से होकर गुजरा। वहां हुए ट्रायल में शानदार प्रदर्शन के दम पर ही उनका चयन अंतरराष्ट्रीय टीम में हुआ। पवन के लिए यह मौका सिर्फ एक और प्रतियोगिता नहीं, बल्कि पिछले कई सालों की मेहनत का नतीजा है। इससे पहले भी वे भारत के लिए कई पदक अपने नाम कर चुके हैं, और अब किर्गिस्तान में उनकी नजर प्रदर्शन को एक पायदान ऊपर ले जाकर गोल्ड मेडल पर टिकी है।

कोच पुष्पेन्द्र सिंह राठौड़ की देखरेख में तैयारी

पवन की ट्रेनिंग कोच और मार्गदर्शक पुष्पेन्द्र सिंह राठौड़ की निगरानी में चल रही है। अभ्यास के दौरान खास ध्यान तकनीक और ताकत के दबाव को झेलने की क्षमता पर दिया जा रहा है, ताकि मुकाबले के दौरान पवन बेहतरीन लिफ्ट लगा सकें। पवन का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश की नुमाइंदगी करना गर्व की बात है और वे पूरी ताकत झोंककर तिरंगे का मान बढ़ाने की कोशिश करेंगे।

थाइलैंड में कांस्य पदक से मिला आत्मविश्वास

पवन की अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों की फेहरिस्त में जुलाई 2025 का थाइलैंड दौरा खास जगह रखता है। 16 से 19 जुलाई के बीच हुई वर्ल्ड स्ट्रेंथ लिफ्टिंग चैंपियनशिप में उन्होंने 76 किलो भार वर्ग की इनक्लाइन बेंच प्रेस स्पर्धा में 125 किलो वजन उठाकर कांस्य पदक जीता था। इस पदक ने उनके हौसले को नई ऊंचाई दी और उसके बाद से वे लगातार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अच्छा प्रदर्शन करते आए हैं।

करियर की एक और बड़ी परीक्षा

किर्गिस्तान की चैंपियनशिप को पवन अपने करियर की एक और बड़ी चुनौती के तौर पर देख रहे हैं। थाइलैंड के कांस्य के बाद अब गोल्ड की तलाश में उतर रहे पवन पर सिर्फ राजस्थान ही नहीं, बल्कि देशभर के स्ट्रेंथ लिफ्टिंग प्रेमियों की निगाहें टिकी रहेंगी।

सवाल-जवाब

पवन कुमावत कौन हैं?
जयपुर के लालचन्दपुरा इलाके के रहने वाले स्ट्रेंथ लिफ्टर, जो भारतीय टीम का हिस्सा हैं।
किर्गिस्तान में चैंपियनशिप कब होगी?
यह वर्ल्ड स्ट्रेंथ लिफ्टिंग चैंपियनशिप 8 से 12 सितंबर तक आयोजित होगी।
पवन किस भार वर्ग में हिस्सा लेंगे?
वे सीनियर वर्ग के 68 किलो भार वर्ग में भारतीय टीम का हिस्सा हैं।
उनका चयन कैसे हुआ?
सिक्किम में हुई सीनियर स्ट्रेंथ लिफ्टिंग चैंपियनशिप के दौरान हुए ट्रायल के प्रदर्शन के आधार पर उनका चयन हुआ।
पवन कब रवाना होंगे?
वे 7 सितंबर को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से भारतीय टीम के साथ रवाना होंगे।
उनके कोच कौन हैं?
उनकी तैयारी कोच और मार्गदर्शक पुष्पेन्द्र सिंह राठौड़ की देखरेख में हो रही है।
पहले उन्होंने कौन सी उपलब्धि हासिल की थी?
जुलाई 2025 में थाइलैंड में हुई वर्ल्ड स्ट्रेंथ लिफ्टिंग चैंपियनशिप में 76 किलो भार वर्ग की इनक्लाइन बेंच प्रेस स्पर्धा में 125 किलो वजन उठाकर उन्होंने कांस्य पदक जीता था।
किर्गिस्तान में पवन का लक्ष्य क्या है?
अपने प्रदर्शन को और बेहतर करते हुए देश के लिए गोल्ड मेडल जीतना।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·18 दिन पहले

पवन कुमावत जैसे जमीनी स्तर के एथलीटों का छोटे शहरों से निकलकर वैश्विक मंच पर देश का प्रतिनिधित्व करना इस बात का प्रमाण है कि देश के अर्ध-शहरी और ग्रामीण इलाकों में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, बशर्ते उन्हें सही समय पर सही ट्रायल और कोचिंग मिले। थाईलैंड के कांस्य पदक के बाद किर्गिस्तान में 68 किलो भार वर्ग में उनका यह अभियान न केवल उनकी व्यक्तिगत दृढ़ता को दर्शाता है, बल्कि यह भी रेखांकित करता है कि यदि क्षेत्रीय संघ और स्थानीय स्तर पर खेल का बुनियादी ढांचा मजबूत हो, तो हमारे खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पोडियम पर शीर्ष स्थान हासिल करने की पूरी क्षमता रखते हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·18 दिन पहले

रोहन के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यह ध्यान देना महत्वपूर्ण है कि जब स्थानीय खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतते हैं, तो यह क्षेत्र में कानून-व्यवस्था और सामाजिक अनुशासन के सकारात्मक माहौल को भी मजबूत करता है। जयपुर के लालचन्दपुरा से किर्गिस्तान तक का यह सफर युवाओं में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है और उन्हें अपराध व असामाजिक गतिविधियों से दूर रखकर खेलों की ओर आकर्षित करता है। इस प्रकार की खेल सफलताएं सार्वजनिक सुरक्षा और युवाओं के सशक्तिकरण में अप्रत्यक्ष रूप से एक बड़ी भूमिका निभाती हैं।

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