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जयपुर समेत देशभर में चीनी के दाम 50% तक उछले, त्योहारी सीजन से पहले बिगड़ा रसोई और मिठाइयों का बजटराजस्थान
28 अग॰ 2026, 7:09 am (28 दिन पहले)· 3

जयपुर समेत देशभर में चीनी के दाम 50% तक उछले, त्योहारी सीजन से पहले बिगड़ा रसोई और मिठाइयों का बजट

देशभर में चीनी की कीमतों में 40 से 50 प्रतिशत तक का अचानक उछाल आया है, जिससे पैकिंग वाली चीनी 65 से 70 रुपये प्रति किलो बिक रही है। जयपुर में मंडी टैक्स और त्योहारी मांग के चलते मिठाइयों और घरेलू बजट पर भारी दबाव बन गया है।

आगामी त्योहारी सीजन की आहट के साथ ही देश भर में चीनी की आसमान छूती कीमतों ने आम आदमी की चिंता बढ़ा दी है। हरियाली तीज के बाद शुरू होने वाले त्योहारों की तैयारी के बीच चीनी के दाम में 40 से 50 फीसदी तक की अभूतपूर्व बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस अचानक आई तेजी के कारण जहां आम परिवारों का रसोई बजट पूरी तरह गड़बड़ा गया है, वहीं मिठास घोलने वाले बाजारों में भी भारी मंदी और अनिश्चितता का माहौल है। आम तौर पर 45 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास बिकने वाली चीनी कई जगहों पर पैकिंग के साथ 65 से 70 रुपये प्रति किलोग्राम की रिकॉर्ड दर पर बेची जा रही है।

थोक व्यापारियों की बढ़ी चिंता और मंडी टैक्स का असर

चीनी के भाव में आए इस अचानक और बेतहाशा उछाल ने देश के बड़े चीनी कारोबारियों को भी हैरान कर दिया है। व्यापारिक हलकों में इस स्तर की मूल्य वृद्धि को अप्रत्याशित माना जा रहा है। राजस्थान शुगर ट्रेड एसोसिएशन के अध्यक्ष सत्यनारायण के अनुसार, चीनी के बाजार में कीमतों का इस स्तर तक पहुंचना पहली बार देखा गया है। इसके अलावा, राजस्थान के स्थानीय बाजार में कीमतों के अत्यधिक बढ़ने का एक प्रमुख कारण राज्य में लागू मंडी टैक्स भी है। यह टैक्स देश के अन्य राज्यों में नहीं लगाया जाता, जिसके चलते राजस्थान में चीनी के भाव अन्य क्षेत्रों की तुलना में अधिक हो गए हैं।

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मिठाई कारोबार और पारंपरिक विक्रेताओं पर दोहरी मार

कीमतों की इस मार से मिठाई विक्रेता, बूरा-बताशे और पारंपरिक मीठे पकवान बेचने वाले व्यापारी बेहद परेशान हैं। त्योहारी मांग से अच्छी बिक्री की उम्मीद लगाए बैठे दुकानदारों के सामने अब उत्पादों के दाम बढ़ाने की मजबूरी पैदा हो गई है। स्वीट्स शॉप का संचालन करने वाले नवीन चौधरी ने बताया कि चीनी महंगी होने से मिठाइयों की लागत बढ़ गई है, जिससे ग्राहकों पर दाम बढ़ाने का सीधा दबाव बन रहा है। वहीं बूरा, गुड़, मीठे मखाने और बताशे बेचने वाले छोटे व्यापारियों की ग्राहकी में भारी गिरावट आई है। इन वस्तुओं के भाव लगभग डेढ़ गुना तक बढ़ चुके हैं। जयपुर के प्रसिद्ध किशनपोल बाजार के मिठाई विक्रेता ओमप्रकाश शर्मा और बालासहाय जाट ने भी बढ़ती लागत पर गहरी चिंता जताई है।

घरेलू बजट पर दबाव और राहत की उम्मीद

त्योहारों के दौरान मिठाइयों और पकवानों की मांग सबसे अधिक होती है, लेकिन चीनी के कड़वे होते स्वाद ने आम जनता और गृहिणियों के उत्साह पर पानी फेर दिया है। रसोई संचालन में चीनी की बढ़ती कीमत का असर हर दिन के बजट पर पड़ रहा है। लगातार बढ़ती महंगाई को झेल रहे आम नागरिकों के लिए त्योहारों का खर्च संभालना एक बड़ी चुनौती बन गया है। इसके बावजूद, आम लोगों और व्यापारियों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में सरकार चीनी की कीमतों पर नियंत्रण पाने के लिए प्रभावी कदम उठाएगी, जिससे बाजार को स्थिरता और जनता को राहत मिल सकेगी।

सवाल-जवाब

जयपुर में चीनी के दाम कितने प्रतिशत तक बढ़े हैं?
जयपुर और आसपास के इलाकों में चीनी के दाम में 40 से 50 प्रतिशत तक का उछाल दर्ज किया गया है।
वर्तमान में पैक्ड चीनी किस भाव पर बिक रही है?
सामान्यतः 45 रुपये प्रति किलो बिकने वाली चीनी अब पैकिंग के साथ 65 से 70 रुपये प्रति किलोग्राम तक बेची जा रही है।
राजस्थान में चीनी महंगी होने की मुख्य वजह क्या बताई जा रही है?
व्यापारियों के अनुसार, राजस्थान में लागू मंडी टैक्स चीनी के अधिक दामों का मुख्य कारण है, जो देश के अन्य राज्यों में नहीं लगता।
चीनी महंगी होने से मिठाई बाजार पर क्या असर पड़ा है?
मिठाइयों के दाम बढ़ाने का दबाव बढ़ गया है और बूरा, बताशे तथा मीठे मखाने जैसी चीजों के भाव डेढ़ गुना तक बढ़ गए हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·27 दिन पहले

त्योहारी सीजन से ठीक पहले चीनी के दामों में पचास फीसदी तक का उछाल उपभोक्ता बाजारों के लिए गंभीर आर्थिक संकट पैदा कर रहा है। राजस्थान में लागू अतिरिक्त मंडी टैक्स का स्थानीय कीमतों पर जो असर पड़ा है, वह नीतिगत विसंगतियों को उजागर करता है। यदि प्रशासन ने थोक और खुदरा स्तर पर जमाखोरी और मूल्य नियंत्रण के लिए त्वरित कदम नहीं उठाए, तो इसका सीधा असर न केवल छोटे मिठाई विक्रेताओं के मुनाफे पर पड़ेगा बल्कि आम आदमी की त्योहारी खुशियाँ भी फीकी पड़ जाएंगी।

Karan Malhotra@karan-malhotra·27 दिन पहले

यह मूल्य वृद्धि केवल एक आर्थिक मुद्दा नहीं है, बल्कि इसके पीछे संभावित कालाबाजारी और जमाखोरी का एंगल भी हो सकता है, जिसकी गहराई से जाँच आवश्यक है। त्योहारी सीजन में मांग बढ़ने का फायदा उठाकर कृत्रिम किल्लत पैदा करने वाले बड़े सट्टेबाजों और जमाखोरों पर यदि समय रहते प्रशासनिक शिकंजा नहीं कसा गया, तो स्थिति बाजार व्यवस्था के लिए और अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाएगी।

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