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जेएनयू ने 11 छात्राओं के यौन उत्पीड़न के आरोपी प्रोफेसर को सेवा से तत्काल किया बर्खास्तदिल्ली
9 अक्तू॰ 2026, 4:25 pm (21 दिन पहले)· 6

जेएनयू ने 11 छात्राओं के यौन उत्पीड़न के आरोपी प्रोफेसर को सेवा से तत्काल किया बर्खास्त

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय ने आंतरिक समिति की जांच और सर्विस नियमों के आधार पर यौन उत्पीड़न के दोषी पाए गए प्रोफेसर को तुरंत प्रभाव से निकाल दिया है।

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय प्रशासन ने 11 छात्राओं द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों की जांच पूरी होने के बाद संबंधित प्रोफेसर को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। विश्वविद्यालय की आंतरिक समिति द्वारा प्रस्तुत जांच निष्कर्षों और सेवा नियमों के तहत यह कड़ा प्रशासनिक कदम उठाया गया है। अधिकारियों ने सभी उपलब्ध साक्ष्यों, बयानों और जांच रिपोर्ट की समीक्षा करने के बाद प्रोफेसर को तत्काल प्रभाव से संस्थान से बाहर का रास्ता दिखाया है।

आंतरिक समिति की जांच और सेवा नियमों के तहत सख्त सिफारिश

छात्राओं की शिकायत पर संस्थान की आंतरिक समिति ने विस्तृत जांच प्रक्रिया संचालित की थी। समिति ने अपनी अंतिम रिपोर्ट में सेंट्रल सिविल सर्विसेज (क्लासिफिकेशन, कंट्रोल एंड अपील) रूल्स के नियम 11(ix) और विश्वविद्यालय के सर्विस नियमों का हवाला देते हुए आरोपी शिक्षक पर अधिकतम दंड लगाने की सिफारिश की। इस सिफारिश को स्वीकार करते हुए प्रशासन ने कड़ा फैसला लिया, जिससे यह साफ संदेश दिया जा सके कि शैक्षणिक परिसरों में इस तरह के आचरण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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मई महीने में दर्ज कराई गई थी शिकायत

इस पूरे प्रकरण की शुरुआत इसी वर्ष मई महीने में हुई थी, जब संस्थान की 11 छात्राओं ने एक साथ आगे आकर प्रोफेसर के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी। छात्राओं ने आंतरिक समिति के समक्ष यौन उत्पीड़न के विशिष्ट आरोप रखे थे। शिकायत दर्ज होने के कुछ ही समय बाद विश्वविद्यालय में लगभग 45 दिनों का ग्रीष्मकालीन अवकाश शुरू हो गया था, जिसके चलते परिसर की नियमित गतिविधियां अस्थायी रूप से थम गई थीं। इसके बाद जुलाई के मध्य में शैक्षणिक सत्र फिर से शुरू हुआ और कक्षाओं का संचालन दोबारा पटरी पर लौटा।

दिल्ली महिला आयोग की निगरानी और रिपोर्ट तलब

इस मामले में दिल्ली महिला आयोग ने भी कड़ा रुख अख्तियार किया था। आयोग ने आरोपों का स्वतः संज्ञान लेते हुए विश्वविद्यालय की कुलपति को नोटिस भेजा था और तीन दिनों के भीतर विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था। आयोग ने चिंता जताई थी कि मई में शिकायत दर्ज होने और कार्यवाही शुरू होने के बाद से संस्थान की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक पटल पर नहीं रखी गई थी। इसी कारण महिला आयोग ने कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम यानी पॉश एक्ट के तहत गठित समिति की कार्यवाही का पूरा ब्योरा तलब किया था, जिसके बाद इस पूरे मामले में अंतिम फैसला सामने आया।

सवाल-जवाब

जेएनयू प्रशासन ने प्रोफेसर के खिलाफ क्या कार्रवाई की है?
प्रशासन ने आंतरिक समिति की जांच रिपोर्ट के आधार पर आरोपी प्रोफेसर को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया है।
प्रोफेसर के खिलाफ कितने छात्रों ने शिकायत दर्ज कराई थी?
विश्वविद्यालय की 11 छात्राओं ने मिलकर प्रोफेसर के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई थी।
यह शिकायत किस महीने में दर्ज की गई थी?
छात्राओं ने इसी वर्ष मई महीने में आंतरिक समिति के समक्ष अपनी औपचारिक शिकायतें प्रस्तुत की थीं।
कार्रवाई किस नियम के तहत की गई है?
यह कार्रवाई विश्वविद्यालय के सर्विस नियमों और सेंट्रल सिविल सर्विसेज (क्लासिफिकेशन, कंट्रोल एंड अपील) रूल्स के नियम 11(ix) के तहत की गई है।
दिल्ली महिला आयोग ने इस मामले में क्या निर्देश दिए थे?
दिल्ली महिला आयोग ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए विश्वविद्यालय की कुलपति से पॉश एक्ट के तहत की गई कार्रवाई पर तीन दिन में रिपोर्ट मांगी थी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Sneha Kulkarni@sneha-kulkarni·20 दिन पहले

जब मैं कॉलेज के दिनों में थी, तब हमारे विभाग में भी ऐसा ही एक मामला सामने आया था। जब तक हिम्मत जुटाकर सबने आवाज उठाई, तब तक बहुत समय निकल चुका था। अच्छा हुआ अब सख्त कार्रवाई होने लगी है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·20 दिन पहले

देर से ही सही, पर कार्रवाई हुई यह ठीक है। हालांकि मई से लेकर अब तक की चुप्पी पर सवाल तो बनते ही हैं, अगर महिला आयोग दखल न देता तो शायद इतनी जल्दी बात आगे नहीं बढ़ती।

Priya Sharma@priya-sharma·20 दिन पहले

अर्जुन, आपकी बात बिल्कुल सही है। पर क्या सच में आयोग के दखल के बिना प्रशासन इस मामले को दबा देता?

Rohan Verma@rohan-verma·20 दिन पहले

मुझे वो दिन अच्छे से याद है जब कैंपस में इस प्रोफेसर के खिलाफ छात्राओं ने आवाज उठाई थी। डर के माहौल में इतनी हिम्मत जुटाना आसान नहीं होता।

Karan Malhotra@karan-malhotra·20 दिन पहले

रोहन, बिल्कुल सही कहा आपने। ग्यारह छात्राओं का एक साथ खड़े होना वाकई बहुत बड़ी हिम्मत की बात थी।

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