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जेएनयू ने मणिपुर सांसद बिमोल अकोइजाम को प्रोफेसर पद से किया बर्खास्त, 11 छात्राओं ने लगाए थे गंभीर आरोपमणिपुर
9 अक्तू॰ 2026, 6:50 pm (18 दिन पहले)· 1

जेएनयू ने मणिपुर सांसद बिमोल अकोइजाम को प्रोफेसर पद से किया बर्खास्त, 11 छात्राओं ने लगाए थे गंभीर आरोप

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय ने आंतरिक समिति की जांच के बाद मणिपुर से कांग्रेस सांसद प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजाम को सेवा से तुरंत प्रभाव से बर्खास्त कर दिया है। ग्यारह छात्राओं ने उनके खिलाफ यौन उत्पीड़न और अनुचित आचरण की शिकायतें दर्ज कराई थीं।

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज के सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ सोशल सिस्टम्स से जुड़े प्रोफेसर और मणिपुर से कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकोइजाम को सेवा से तुरंत प्रभाव से बर्खास्त करने का कड़ा फैसला लिया है। यह अनुशासनात्मक कदम विश्वविद्यालय की आंतरिक समिति द्वारा की गई उस विस्तृत जांच के बाद उठाया गया है, जो संस्थान की 11 छात्राओं द्वारा दर्ज कराई गई यौन उत्पीड़न की शिकायतों के आधार पर शुरू की गई थी।

जांच समिति की सिफारिश और विश्वविद्यालय का औपचारिक आदेश

विश्वविद्यालय की कुलपति शांतिश्री डी पंडित के हस्ताक्षर से 9 अक्टूबर को जारी आधिकारिक आदेश में इस निर्णय की पूरी रूपरेखा स्पष्ट की गई है। प्रशासनिक आदेश के अनुसार, सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ सोशल सिस्टम्स के प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजाम के खिलाफ छात्राओं के आरोपों की औपचारिक जांच विश्वविद्यालय की आंतरिक समिति को सौंपी गई थी। समिति ने पूरे मामले के तथ्यों की बारीकी से पड़ताल करने के बाद प्रोफेसर को बड़ा दंड दिए जाने की ठोस सिफारिश विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष पेश की।

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आदेश में रेखांकित किया गया है कि सभी उपलब्ध साक्ष्यों, परिस्थितियों और आंतरिक समिति की अंतिम रिपोर्ट पर विचार करते हुए पूरी वैधानिक प्रक्रिया का पालन किया गया। इसके बाद ही प्रोफेसर को विश्वविद्यालय की सेवा से तत्काल प्रभाव से बर्खास्त करने का अंतिम फैसला अमल में लाया गया।

सेवा नियमों और कानूनी प्रावधानों के तहत सख्त कार्रवाई

कार्रवाई के वैधानिक आधार को स्पष्ट करते हुए आदेश में उल्लेख किया गया कि आंतरिक समिति के निष्कर्षों के तहत सेवा नियमों के विशिष्ट प्रावधानों को लागू किया गया। इसमें यूजीसी संदर्भ संख्या एफ.91-1/2013 (टीएफजीएस)/10(1) के तहत कार्रवाई की गई, जो यौन उत्पीड़न के मामलों में दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कड़े अनुशासनात्मक कदम उठाने को अनिवार्य बनाती है।

इसके साथ ही सेंट्रल सिविल सर्विसेज (वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील) नियमावली के नियम 11(ix) को लागू किया गया है। सीसीएस (सीसीए) नियमों का यह विशेष नियम सेवा से बर्खास्तगी का स्पष्ट प्रावधान करता है, जिसके तहत संबंधित व्यक्ति को भविष्य में किसी भी सरकारी रोजगार के लिए सामान्य रूप से अयोग्य भी ठहराया जाता है।

छात्राओं द्वारा लगाए गए अनुचित आचरण के आरोप

विश्वविद्यालय के आधिकारिक आदेश ने पुष्टि की है कि यह कठोर कार्रवाई ग्यारह महिला छात्राओं की ओर से सामने आई शिकायतों के बाद हुई है। छात्राओं ने आरोप लगाया था कि प्रोफेसर ने कक्षा के दौरान बेहद अनुचित टिप्पणियां की थीं। इसके अलावा अनौपचारिक आयोजनों में असहज करने वाले प्रयास करने तथा अकादमिक बातचीत के दौरान मर्यादाहीन व्यवहार करने के गंभीर आरोप भी जांच के दौरान सामने रखे गए थे। विश्वविद्यालय के नए आदेश के साथ यह निष्कासन तत्काल प्रभावी हो चुका है।

सवाल-जवाब

जेएनयू ने किस प्रोफेसर के खिलाफ बर्खास्तगी की कार्रवाई की है?
विश्वविद्यालय ने स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज के सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ सोशल सिस्टम्स से जुड़े प्रोफेसर और मणिपुर से कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकोइजाम को बर्खास्त किया है।
प्रोफेसर के खिलाफ क्या आरोप लगाए गए थे?
ग्यारह छात्राओं ने उन पर कक्षा में अनुचित टिप्पणियां करने, आयोजनों में असहज प्रयास करने और अकादमिक संवाद के दौरान दुर्व्यवहार के आरोप लगाए थे।
कार्रवाई का आदेश कब जारी किया गया और इस पर किसके हस्ताक्षर हैं?
यह आदेश 9 अक्टूबर को जारी किया गया, जिस पर विश्वविद्यालय की कुलपति शांतिश्री डी पंडित के हस्ताक्षर हैं।
इस कार्रवाई के लिए किन नियमों का सहारा लिया गया?
विश्वविद्यालय ने यूजीसी संदर्भ संख्या एफ.91-1/2013 (टीएफजीएस)/10(1) और सीसीएस (सीसीए) नियमावली के नियम 11(ix) के तहत बर्खास्तगी का आदेश दिया।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Li Wei@li-wei·17 दिन पहले

कुलपति शांतिश्री डी पंडित के हस्ताक्षर से 9 अक्टूबर का यह आदेश सचमुच चौंकाने वाला है। जब एक सांसद पर इस तरह के गंभीर आरोप साबित होते हैं, तो पद की गरिमा तार-तार हो जाती है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·17 दिन पहले

कुलपति के हस्ताक्षर वाले उस 9 अक्टूबर के आदेश पर नजर पड़ी, ग्यारह छात्राओं की हिम्मत वाकई बड़ी है।

Nyra Kaif@nyra-kaif·17 दिन पहले

अ अर्जुन, छात्राओं की हिम्मत की बात तो ठीक है, पर इतने गंभीर मामलों में जांच पूरी होने में इतना वक्त क्यों लग जाता है?

Rohan Verma@rohan-verma·17 दिन पहले

एक सांसद और प्रोफेसर होकर ऐसा बर्ताव करना बेहद शर्मनाक है। जेएनयू प्रशासन ने सही कदम उठाया है कि 11 छात्राओं की शिकायतों पर तुरंत जांच कर बर्खास्तगी का फैसला लिया।

Ravikash Gupta@ravikash·17 दिन पहले

रोहन भाई, जेएनयू ने फैसला तो ले लिया है, पर इतनी बड़ी कार्रवाई इतनी चुपचाप कैसे हो गई? कोई तो पेंच होगा जो बाहर नहीं आया।

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