पीतल नगरी में खास मसालों और मक्खन के साथ परोसी जाती है मुरादाबादी मूंग दालतुला राशिफल 25 सितंबर 2026: राहु और मंगल के प्रभाव से करियर में आएगी गति, वित्तीय संतुलन और रिश्तों पर दें ध्यानशी जिनपिंग के स्वागत में व्हाइट हाउस का शाही मेन्यू, फ्रेंच स्वाद के साथ परोसे गए खास व्यंजनराजस्थान के तीन बड़े शहरों में महापौर चुनने की जंग, जयपुर में भाजपा और कांग्रेस आमने-सामनेकश्मीरी गेट के पास ई-रिक्शा रोककर लूटपाट, चाकू के वार से युवक की जान गई और दो जख्मीछत और बालकनी पर सब्जियां उगाते समय न करें केमिकल का छिड़काव, पूसा विशेषज्ञ ने सुझाए जैविक खाद के आसान उपायवृश्चिक राशिफल 25 सितंबर 2026: 12वें भाव में शुक्र जगाएगा सुख-सुविधाओं की चाहत, बजट और सेहत का रखें ध्यानपंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर योगी आदित्यनाथ ने दी श्रद्धांजलि, अंत्योदय और एकात्म मानववाद के विचार को किया यादजीनियस एक्ट के तहत स्टेबलकॉइन के सख्त नियमों पर फेडरल रिजर्व ने मांगी जनता से रायदैनिक राशिफल 25 सितंबर 2026: कुंभ में चंद्रमा और राहु की युति से ग्रहण योग, जानें सभी 12 राशियों का हाल
झारखंड के दिग्गज सुखदेव भगत बने छत्तीसगढ़ कांग्रेस के नए कर्ता-धर्ताछत्तीसगढ़
6 सित॰ 2026, 3:11 am (19 दिन पहले)· 2

झारखंड के दिग्गज सुखदेव भगत बने छत्तीसगढ़ कांग्रेस के नए कर्ता-धर्ता

कांग्रेस ने झारखंड के वरिष्ठ नेता और लोहरदगा सांसद सुखदेव भगत को छत्तीसगढ़ कांग्रेस का नया प्रभारी बनाया है, उन्होंने सचिन पायलट की जगह ली है।

कांग्रेस पार्टी ने छत्तीसगढ़ में संगठन को लेकर बड़ा फैसला लिया है और झारखंड के वरिष्ठ नेता सुखदेव भगत को प्रदेश का नया प्रभारी बनाया है। उन्होंने सचिन पायलट की जगह ली है, जिसके बाद प्रदेश कांग्रेस के गलियारों में सरगर्मी बढ़ गई है।

नए प्रभारी की नियुक्ति के बाद माना जा रहा है कि बूथ स्तर से लेकर संगठन तक बड़े फेरबदल देखने को मिल सकते हैं। संभावना जताई जा रही है कि सुखदेव भगत जल्द ही छत्तीसगढ़ का दौरा करेंगे और वहां वरिष्ठ नेताओं व पदाधिकारियों के साथ लगातार बैठकें करेंगे, ताकि संगठन की जमीनी हकीकत को करीब से समझा जा सके। पार्टी के भीतर यह भी माना जा रहा है कि एक अनुभवी नेता को यह जिम्मेदारी देकर कांग्रेस छत्तीसगढ़ इकाई को नई दिशा और नई ऊर्जा देना चाहती है।

ये भी पढ़ें

कौन हैं सुखदेव भगत?

सुखदेव भगत झारखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं और विधायक भी रहे हैं। फिलहाल वह लोहरदगा से सांसद हैं। राजनीति में कदम रखने से पहले वह प्रशासनिक सेवा में थे, यानी उन्हें प्रशासन और संगठन दोनों का ही व्यावहारिक अनुभव है। यही अनुभव अब उन्हें छत्तीसगढ़ जैसे बड़े राज्य की जिम्मेदारी संभालने में काम आ सकता है। अब देखना दिलचस्प होगा कि वह अपने इस लंबे तजुर्बे के दम पर छत्तीसगढ़ कांग्रेस में नई जान फूंकने में कितना कामयाब होते हैं।

2023 में मिली थी करारी हार

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को साल 2023 के विधानसभा चुनाव में बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा था। इस हार के बाद से पार्टी दोबारा प्रदेश में अपने पैरों पर खड़ा होने की कोशिश में जुटी है। आने वाले चुनावों को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस अभी से जमीनी स्तर पर रणनीति बनाने में जुट गई है। ऐसे में सुखदेव भगत की जिम्मेदारी होगी कि वह संगठन को फिर से सक्रिय करें और कार्यकर्ताओं के साथ सीधा संवाद बढ़ाएं, जिससे आने वाले चुनावों में पार्टी को इसका फायदा मिल सके।

2005 से शुरू हुआ सियासी सफर

सुखदेव भगत साल 2005 में कांग्रेस में शामिल हुए थे और उन्होंने लोहरदगा सीट से चुनाव लड़ा था। उस चुनाव में उन्होंने जीत दर्ज की और पहली बार झारखंड विधानसभा पहुंचे। इसके बाद हालांकि उनका राजनीतिक सफर आसान नहीं रहा, साल 2009 और 2014 के विधानसभा चुनाव में उन्हें लगातार हार का मुंह देखना पड़ा। लगातार दो चुनावों में मिली हार से उनके राजनीतिक करियर पर भी सवाल उठने लगे थे। लेकिन साल 2015 में लोहरदगा सीट पर हुए उपचुनाव ने उन्हें एक और मौका दिया और उन्होंने इस मौके को लपकते हुए फिर से जीत दर्ज की और विधानसभा पहुंचे।

बीजेपी में गए, फिर कांग्रेस में हुई वापसी

साल 2013 से 2017 तक सुखदेव भगत झारखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे। इसके बाद साल 2019 में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया, लेकिन इस बार भी उन्हें विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद साल 2022 में उन्होंने अपनी पुरानी पार्टी कांग्रेस में वापसी कर ली। कांग्रेस ने उनकी काबिलियत को देखते हुए उन्हें साल 2024 के लोकसभा चुनाव में लोहरदगा सीट से टिकट दिया और वह यह चुनाव जीतने में भी कामयाब रहे। इसके अलावा कांग्रेस पार्टी उन्हें पहले भी कई राज्यों का ऑब्जर्वर बना चुकी है, जिससे साफ है कि पार्टी हाईकमान उन्हें संगठनात्मक कामों में भरोसेमंद चेहरा मानता है।

सवाल-जवाब

सुखदेव भगत को छत्तीसगढ़ कांग्रेस का नया प्रभारी कब बनाया गया?
कांग्रेस ने हाल ही में सुखदेव भगत को छत्तीसगढ़ का नया प्रभारी नियुक्त किया है, उन्होंने सचिन पायलट की जगह ली है।
सुखदेव भगत अभी कहां से सांसद हैं?
वह फिलहाल झारखंड की लोहरदगा सीट से सांसद हैं।
सुखदेव भगत पहली बार विधायक कब बने थे?
वह पहली बार साल 2005 में लोहरदगा से चुनाव जीतकर झारखंड विधानसभा पहुंचे थे।
क्या सुखदेव भगत कभी बीजेपी में भी रहे हैं?
हां, वह साल 2019 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए थे, लेकिन साल 2022 में कांग्रेस में वापस लौट आए।
छत्तीसगढ़ कांग्रेस को नया प्रभारी क्यों दिया गया?
साल 2023 के विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद पार्टी को फिर से मजबूत करने के लिए यह बदलाव किया गया है।
सुखदेव भगत झारखंड कांग्रेस के अध्यक्ष कब रहे थे?
वह साल 2013 से 2017 तक झारखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रहे थे।
क्या सुखदेव भगत ने 2024 का लोकसभा चुनाव जीता था?
हां, कांग्रेस ने उन्हें 2024 के लोकसभा चुनाव में लोहरदगा सीट से टिकट दिया था और वह यह चुनाव जीत गए थे।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Carlos Mendoza@carlos-mendoza·19 दिन पहले

छत्तीसगढ़ में सुखदेव भगत की नियुक्ति एक महत्वपूर्ण संगठनात्मक बदलाव है, खासकर 2023 की करारी हार के बाद। उनका प्रशासनिक और राजनीतिक अनुभव पार्टी को बूथ स्तर पर पुनर्जीवित करने में अहम साबित हो सकता है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि वह गुटबाजी से जूझ रहे संगठन में कैसे नई जान फूंकते हैं।

Arjun Mehta@arjun-mehta·19 दिन पहले

सचिन पायलट के स्थान पर सुखदेव भगत को छत्तीसगढ़ की कमान सौंपना कांग्रेस की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। 2023 की करारी हार के बाद पार्टी अब सिर्फ चमक-धमक की बजाय जमीनी पकड़ और प्रशासनिक अनुभव वाले नेताओं को आगे बढ़ा रही है। भगत की पृष्ठभूमि नौकरशाही से जुड़ी रही है और वे झारखंड में सांगठनिक उतार-चढ़ाव देख चुके हैं। ऐसे में छत्तीसगढ़ में बूथ स्तर से लेकर संगठन को पुनर्जीवित करने और गुटबाजी से जूझ रहे कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने की उनकी यह परीक्षा उनके राजनीतिक करियर का अगला बड़ा पड़ाव होगी।

Ravikash Gupta@ravikash·19 दिन पहले

सचिन पायलट की जगह सुखदेव भगत को लाना यह दर्शाता है कि पार्टी अब उच्च-प्रोफाइल चेहरों के बजाय राज्यों में प्रशासनिक रूप से मजबूत और जमीनी पकड़ रखने वाले नेतृत्व को प्राथमिकता दे रही है। 2023 के विधानसभा चुनाव में हार के बाद छत्तीसगढ़ में पार्टी की आर्थिक और राजनीतिक रणनीति को पटरी पर लाना और कार्यकर्ताओं में खोया हुआ विश्वास वापस जगाना एक बड़ी चुनौती होगी। भगत का नौकरशाही का पुराना अनुभव और सांगठनिक संघर्ष आने वाले दिनों में पार्टी के आंतरिक समीकरणों और चुनावी तैयारियों को किस दिशा में ले जाता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

Rohan Verma@rohan-verma·19 दिन पहले

सचिन पायलट की जगह सुखदेव भगत को छत्तीसगढ़ की कमान सौंपना कांग्रेस की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। एक तरफ जहाँ पार्टी को 2023 की करारी हार से उबरना है, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक पृष्ठभूमि वाले नेता से बूथ स्तर से लेकर संगठन तक कड़े अनुशासन और जमीनी पकड़ की उम्मीद की जा रही है। भगत का यह सफर बताता है कि पार्टी अब सियासी अनुभव और प्रशासनिक समझ को प्राथमिकता दे रही है, जिससे आगामी चुनावों में संगठनात्मक मोर्चे पर कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·19 दिन पहले

अपराध और विधि विशेषज्ञ के दृष्टिकोण से देखा जाए तो, जब कोई राजनीतिक दल प्रशासनिक पृष्ठभूमि से जुड़े किसी व्यक्ति को संगठन की कमान सौंपता है, तो उसका मुख्य उद्देश्य आंतरिक व्यवस्था, अनुशासन और निर्णय प्रक्रिया को चुस्त-दुरुस्त करना होता है। सुखदेव भगत का पूर्व प्रशासनिक सेवा का अनुभव छत्तीसगढ़ में पार्टी के भीतर आंतरिक कलह को थामने और नियमों के तहत संगठनात्मक कसावट लाने में कितना प्रभावी सिद्ध होता है, इस पर आने वाले समय में राजनीतिक विश्लेषकों की पैनी नजर रहेगी। 2023 की करारी हार के बाद पार्टी की साख और जनता के बीच सुरक्षा-व्यवस्था व विकास जैसे मुद्दों पर विश्वसनीयता बहाल करना एक बड़ी चुनौती होगी, जिसके लिए जमीनी स्तर पर प्रशासनिक दक्षता की सख्त आवश्यकता महसूस की जा रही है।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp