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झुमके के शहर की वो ऐतिहासिक विरासत जिसने विदेशों तक बनाई पहचान, जानिए बदलते मौसम में कैसे राहत देता है बरेली का सूरमाउत्तर प्रदेश
11 जुल॰ 2026, 6:44 pm (63 दिन पहले)· 2

झुमके के शहर की वो ऐतिहासिक विरासत जिसने विदेशों तक बनाई पहचान, जानिए बदलते मौसम में कैसे राहत देता है बरेली का सूरमा

बरेली का पारंपरिक सुरमा न केवल अपनी सदियों पुरानी विरासत के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि मानसून के मौसम में आंखों की सामान्य समस्याओं से राहत दिलाने में भी मददगार साबित हो रहा है।

बरेली का जिक्र होते ही लोगों के जेहन में अक्सर यहां के मशहूर झुमके की याद ताजा हो जाती है, लेकिन इस ऐतिहासिक शहर की एक और ऐसी प्राचीन पहचान है जो पीढ़ियों से लोगों की आंखों को संवारती आ रही है। हम बात कर रहे हैं यहां के पारंपरिक सूरमे की, जिसकी ख्याति सिर्फ भारत के अलग-अलग हिस्सों में ही नहीं, बल्कि सात समंदर पार विदेशों तक फैली हुई है। विशेष रूप से जब मानसून की दस्तक होती है और उमस भरे इस मौसम में आंखों से जुड़ी परेशानियां तेजी से बढ़ने लगती हैं, तब लोग अपनी आंखों की सुरक्षा और देखभाल के लिए इस पारंपरिक उत्पाद का रुख करने लगते हैं। हालांकि, इसके इस्तेमाल के साथ-साथ यह समझना भी बेहद जरूरी है कि गंभीर संक्रमण की स्थिति में डॉक्टरों की वैज्ञानिक सलाह लेना ही सबसे सुरक्षित माध्यम है।

पीढ़ियों की धरोहर और सूरमा बनाने की गुप्त कला

बरेली के ऐतिहासिक बड़ा बाज़ार इलाके में स्थित कादरी सुरमा एंड कंपनी के संचालक जुनैद अहमद कादरी इस पुश्तैनी हुनर पर गहराई से प्रकाश डालते हैं। उनका कहना है कि सूरमा बनाने का यह हुनर उनके परिवार में कई पीढ़ियों से एक अनमोल विरासत के रूप में चला आ रहा है। यह कोई साधारण व्यापार नहीं है जिसे कोई भी व्यक्ति बिना तैयारी के रातों-रात शुरू कर दे। इस अनूठी कला में महारत हासिल करने के लिए कई वर्षों के गहन अनुभव, पारंपरिक ज्ञान और पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित होने वाले विशेष नुस्खों की आवश्यकता होती है। यही वजह है कि इस कलात्मक और औषधीय निर्माण को हर कोई आसानी से नहीं अपना सकता और इसके शुद्ध निर्माण के लिए बहुत बारीकी और संयम की आवश्यकता होती है।

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बरसात के मौसम में आंखों की समस्याएं और सावधानी

मौसम में बदलाव और विशेषकर मानसून के दौरान वातावरण में अत्यधिक नमी आ जाती है। जुनैद अहमद कादरी के अनुसार, हवा में प्रदूषण, दूषित पानी और अत्यधिक उमस के चलते इस दौरान आंखों में कई तरह के संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है। इस उमस भरे मौसम में लोगों को कंजंक्टिवाइटिस यानी आई फ्लू, आंखों पर होने वाली गुहेरी (स्टाई), असहनीय जलन, लगातार खुजली होना, आंखों का लाल हो जाना और सूखापन जैसी विविध समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे नाजुक समय में आंखों की साफ-सफाई को प्राथमिकता देना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही संक्रमित व्यक्तियों के सीधे संपर्क में आने से बचना चाहिए और यदि आंखों की तकलीफ अधिक बढ़ जाए तो तुरंत किसी योग्य नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क स्थापित करना चाहिए।

सस्ते विकल्पों से लेकर प्रीमियम श्रेणियों तक का सफर

इस पारंपरिक उद्योग में रोजगार की भी अपार संभावनाएं छिपी हुई हैं। जो लोग अपने स्थानीय बाजारों या दुकानों पर सुरमा बेचने का व्यवसाय करना चाहते हैं, वे थोक दर पर कादरी सुरमा एंड कंपनी से विभिन्न प्रकार के सुरमा मंगवा सकते हैं। ग्राहकों की विविध आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए कंपनी के पास ममीरा नंबर 500 और 555 स्पेशल जैसे कई नामी सूरमे उपलब्ध हैं। इसके अलावा, पारंपरिक काजल, सुरमे का पेस्ट और खुला सूरमा भी ग्राहकों की पसंद के अनुसार प्रदान किया जाता है। कीमत के मोर्चे पर यह उत्पाद हर वर्ग के लिए सुलभ है, जहां रोजाना उपयोग में आने वाला साधारण सुरमा मात्र 5 रुपये की शुरुआती कीमत पर मिल जाता है, वहीं औषधीय और उच्च गुणवत्ता वाले प्रीमियम सूरमे की कीमत 200 रुपये से लेकर 400 रुपये तक जाती है।

पारंपरिक उपयोग और चिकित्सकीय सीमाएं

सदियों पुरानी इस परंपरा के फायदों पर बात करते हुए जुनैद अहमद कादरी का कहना है कि रोजाना नियम से सुरमा लगाने वाले कई लोग आंखों की सामान्य जलन, चुभन और हल्की-फुल्की असहजता से राहत मिलने का दावा करते हैं। हालांकि, वे इस बात पर भी विशेष जोर देते हैं कि आंखों की गंभीर बीमारियों में केवल सुरमे के भरोसे नहीं रहा जा सकता। यदि आंखों में तेज और असहनीय दर्द हो, लगातार लालिमा बनी रहे, मवाद या कीचड़ आने लगे, या फिर धुंधला दिखाई देने जैसे गंभीर लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत बिना किसी देरी के नेत्र रोग विशेषज्ञ से मिलकर जांच करानी चाहिए। पारंपरिक घरेलू उत्पाद आंखों को ठंडक प्रदान करने में मददगार साबित हो सकते हैं, लेकिन वे आधुनिक चिकित्सा पद्धति या डॉक्टरों के वैज्ञानिक उपचार का विकल्प कभी नहीं हो सकते।

सवाल-जवाब

बरेली के सूरमे की क्या विशेषता है?
बरेली का सूरमा एक ऐतिहासिक और पारंपरिक उत्पाद है जिसे पीढ़ियों से विशेष नुस्खों से तैयार किया जा रहा है। इसकी शुद्धता और प्रभावशीलता के कारण यह देश के साथ-साथ विदेशों में भी प्रसिद्ध है।
मानसून में आंखों को कौन सी आम समस्याएं प्रभावित करती हैं?
इस मौसम में अत्यधिक नमी और प्रदूषण के कारण लोगों को कंजंक्टिवाइटिस (आई फ्लू), गुहेरी (स्टाई), आंखों में जलन, लगातार खुजली, लालपन और सूखापन जैसी परेशानियां हो सकती हैं।
कादरी सुरमा एंड कंपनी द्वारा किस प्रकार के उत्पाद बेचे जाते हैं?
कंपनी ममीरा नंबर 500, 555 स्पेशल, काजल, सुरमे का पेस्ट और खुला सुरमा जैसी विभिन्न श्रेणियां प्रदान करती है।
बरेली के सूरमे की कीमत क्या है?
साधारण उपयोग वाले बुनियादी सुरमे की शुरुआती कीमत मात्र 5 रुपये है, जबकि उच्च गुणवत्ता वाले प्रीमियम सूरमे की कीमत 200 रुपये से लेकर 400 रुपये तक जाती है।
क्या गंभीर आंखों के संक्रमण में केवल सुरमे का इस्तेमाल सुरक्षित है?
नहीं, सुरमा केवल सामान्य जलन या हल्की असहजता में आराम दे सकता है। गंभीर लक्षण जैसे तेज दर्द, मवाद या धुंधला दिखने पर तुरंत नेत्र रोग विशेषज्ञ से परामर्श करना चाहिए।
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