रायपुर में बीमारी ठीक करने के बहाने महिला से 15 तोला सोना और नकदी ऐंठी, 3 फर्जी साधु फरारदिल्ली के झारखंड भवन में लिफ्ट अटकने से पूर्व सांसद घूरन राम के परिवार के 6 सदस्य हुए अचेत, परिसर में फूटा गुस्सावृश्चिक राशिफल 1 अक्टूबर: आर्थिक फैसलों में बरतें संयम, रिश्तों में धैर्य और सुनने की आदत से बनेगी बातअक्टूबर की शुरुआत में 19 किलो वाला कमर्शियल गैस सिलेंडर हुआ महंगा, जानिए प्रमुख शहरों में नए दामअजय देवगन की दृश्यम 3 के कलाकारों का मेहनताना आया सामने, मुख्य अभिनेता से तब्बू को मिली सात गुना कम रकमसर्दियों में रंग-बिरंगे फूलों से महकेगा घर, अक्टूबर के महीने में गमलों में लगाएं ये सात खास किस्मेंकम सामग्री में घर पर बनाएं छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लाल भाजी और आलू की सूखी सब्जीप्रशांत महासागर में अल नीनो के उभार से कमजोर पड़ा मानसून, 2001 के बाद दर्ज हुई चौथी सबसे सूखी स्थितिबिना फ्राई किए ओवन में बनाएं सुपर क्रिस्पी चिकन श्नाइटल, रसदार स्वाद और कम तेल का आसान तरीकाकिसान के बेटे डॉ. भागचंद बधाल का RAS से IAS कैडर में हुआ प्रमोशन, सरकारी स्कूल से शुरू हुआ था सफर
जिला अदालतों के जजों को मिलेगा दो साल ज्यादा काम करने का मौका, सुप्रीम कोर्ट ने सात राज्यों को दी हरी झंडीभारत
5 सित॰ 2026, 3:23 pm (26 दिन पहले)· 3

जिला अदालतों के जजों को मिलेगा दो साल ज्यादा काम करने का मौका, सुप्रीम कोर्ट ने सात राज्यों को दी हरी झंडी

सुप्रीम कोर्ट ने सात राज्यों में जिला अदालतों के न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति उम्र 60 से बढ़ाकर 62 साल करने की मंजूरी दे दी है, लेकिन यह विस्तार हाई कोर्ट के प्रदर्शन आकलन के बाद ही मिलेगा।

देश की जिला अदालतों में बरसों से सेवा दे रहे न्यायिक अधिकारियों के लिए काम करने की उम्र दो साल और बढ़ाने का रास्ता अब साफ हो गया है। सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद सात राज्यों में जिला अदालतों के जजों की सेवानिवृत्ति उम्र 60 साल से बढ़ाकर 62 साल की जा सकेगी, हालांकि यह सुविधा हर अधिकारी को अपने आप नहीं मिलेगी।

किन सात राज्यों को मिली मंजूरी

छत्तीसगढ़, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, सिक्किम, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल ने इस प्रस्ताव पर अपनी रजामंदी दे दी है। इन राज्यों को सुप्रीम कोर्ट ने अब निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने न्यायिक सेवा नियमों में जरूरी बदलाव करें, ताकि उम्र सीमा बढ़ाने वाला यह प्रावधान कानूनी तौर पर लागू हो सके। कोर्ट ने कहा है कि यह संशोधन जल्द से जल्द और मुमकिन हो तो दो महीने के भीतर पूरा कर लिया जाए, ताकि इसका फायदा अधिकारियों को समय रहते मिल सके।

ये भी पढ़ें

60 पूरे होते ही अपने आप एक्सटेंशन नहीं

इस आदेश में सबसे जरूरी बात यह है कि 60 साल की उम्र पूरी करने वाले किसी भी न्यायिक अधिकारी को दो साल का विस्तार अपने आप हासिल नहीं हो जाएगा। जिन राज्यों में यह नियम लागू होगा, वहां की हाई कोर्ट पहले उस अधिकारी के काम, उसकी काबिलियत और अब तक के प्रदर्शन को बारीकी से परखेगी। इस मूल्यांकन में खरा उतरने वाले अधिकारी को ही 62 साल तक सेवा में बने रहने की इजाजत मिलेगी। यानी उम्र बढ़ाने के इस फैसले के साथ जवाबदेही और कार्यक्षमता की शर्त भी जुड़ी हुई है, यह सिर्फ उम्र का आंकड़ा बदलने वाला आदेश नहीं है।

रिटायर हो चुके अधिकारियों के लिए वापसी का विकल्प

यह पूरा मामला अखिल भारतीय न्यायाधीश संघ बनाम भारत संघ नाम की याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने यह अहम आदेश सुनाया। कोर्ट ने अपने आदेश में एक और राहत जोड़ी है, जो न्यायिक अधिकारी 31 मार्च 2026 को या उसके बाद 60 साल की उम्र में रिटायर हो चुके हैं, वे चाहें तो कुछ शर्तों के साथ दोबारा सेवा में लौट सकते हैं। इसके लिए शर्त यह है कि रिटायरमेंट के बाद उन्होंने केंद्र सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन कोई और नौकरी या फायदे वाला कोई पद स्वीकार न किया हो। अगर ऐसे अधिकारी दोबारा सेवा में लौटते हैं, तो उन्हें वेतन, वरिष्ठता और सेवा की निरंतरता से जुड़े फायदे भी दिए जा सकते हैं। हालांकि इस पर अंतिम फैसला भी संबंधित हाई कोर्ट के आकलन पर ही निर्भर करेगा, और वापसी चाहने वाले अधिकारियों को पहले मिल चुके सेवानिवृत्ति के फायदे सरकार को लौटाने होंगे।

खाली पदों की दिक्कत बनी फैसले की बड़ी वजह

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह बात खुलकर स्वीकार की कि देश की जिला न्यायपालिका में अभी भी बड़ी तादाद में पद खाली पड़े हैं। नई भर्तियां पूरी होने में लंबा वक्त लगता है, और भर्ती प्रक्रिया खत्म होने के बाद भी अक्सर सारे स्वीकृत पद भर नहीं पाते। ऐसे हालात में अनुभवी अधिकारियों को दो साल और सेवा में बनाए रखने से जिला अदालतों में जजों की कमी की समस्या को कुछ हद तक तुरंत राहत मिल सकती है, जबकि नई भर्तियां अपनी रफ्तार से चलती रहेंगी।

ज्यादातर हाई कोर्ट के पक्ष में, दो राज्य अलग रुख पर

इस प्रस्ताव पर देश के ज्यादातर हाई कोर्ट ने सहमति जताई। इलाहाबाद, कलकत्ता, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, पटना, राजस्थान, सिक्किम और त्रिपुरा हाई कोर्ट के अलावा पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने भी न्यायिक अधिकारियों की उम्र सीमा 62 साल किए जाने का समर्थन किया। दूसरी ओर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड ने फिलहाल मौजूदा 60 साल की उम्र सीमा को ही बनाए रखने का रुख अपनाया है।

बाकी बचे राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को सुप्रीम कोर्ट ने दो हफ्ते का वक्त दिया है, ताकि वे इस मसले पर अपनी स्थिति पर नए सिरे से विचार कर सकें। इन सभी से अनुपालन रिपोर्ट भी मांगी गई है, जिससे कोर्ट को यह पता चल सके कि किस राज्य ने क्या कदम उठाया। मामले पर अगली सुनवाई 1 अक्टूबर तय की गई है।

तीन सदस्यीय बेंच ने सुनाया आदेश

यह आदेश तीन सदस्यीय बेंच ने दिया, जिसमें मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के साथ जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल रहे। सुनवाई के दौरान बेंच ने एक दिलचस्प तथ्य भी याद दिलाया, न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति उम्र में आखिरी बार बदलाव साल 1992 में हुआ था। यानी करीब तीन दशक से ज्यादा समय बाद अब यह उम्र सीमा फिर से बढ़ने जा रही है, बशर्ते संबंधित राज्य अपने नियमों में तय समय पर संशोधन कर लें।

सवाल-जवाब

सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से किन राज्यों को फायदा होगा?
छत्तीसगढ़, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, सिक्किम, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल को, क्योंकि इन्होंने ही रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने के प्रस्ताव पर सहमति दी है।
क्या 60 साल की उम्र पूरी करते ही सभी जजों को दो साल का एक्सटेंशन मिल जाएगा?
नहीं, संबंधित हाई कोर्ट उनकी योग्यता और प्रदर्शन का आकलन करने के बाद ही यह तय करेगा।
क्या रिटायर हो चुके अधिकारी वापस सेवा में आ सकते हैं?
हां, जो अधिकारी 31 मार्च 2026 को या उसके बाद 60 साल की उम्र में रिटायर हुए हैं, वे कुछ शर्तों के साथ लौट सकते हैं।
वापसी चाहने वाले अधिकारियों के लिए शर्त क्या है?
उन्होंने रिटायरमेंट के बाद केंद्र या किसी राज्य सरकार के अधीन कोई और नौकरी या फायदे वाला पद स्वीकार न किया हो।
किन हाई कोर्ट ने रिटायरमेंट उम्र 62 साल करने का समर्थन नहीं किया?
उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड ने फिलहाल 60 साल की उम्र सीमा ही बनाए रखने का रुख अपनाया।
इस मामले की अगली सुनवाई कब होगी?
1 अक्टूबर को।
न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति उम्र आखिरी बार कब बढ़ाई गई थी?
साल 1992 में।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·25 दिन पहले

यह फैसला न्यायपालिका में रिक्तियों से निपटने का एक व्यावहारिक कदम है, लेकिन इसके साथ ही उच्च न्यायालयों पर प्रदर्शन मूल्यांकन की बड़ी जिम्मेदारी भी आ गई है। यदि यह आकलन प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष नहीं रही, तो इससे प्रशासनिक जटिलताएं बढ़ सकती हैं। आगे यह देखना होगा कि अन्य राज्य इस व्यवस्था को कैसे अपनाते हैं।

Ravikash Gupta@ravikash·25 दिन पहले

यह फैसला न केवल जिला न्यायपालिका में मैनपावर के संकट को कम करेगा, बल्कि कॉर्पोरेट और वित्तीय मामलों के मुकदमों के त्वरित निपटान में भी मदद करेगा। जब अनुभवी न्यायाधीश अतिरिक्त दो साल सेवा में रहेंगे, तो कारोबारी विवादों और कमर्शियल लिटिगेशन की पेंडेंसी घटेगी, जिससे देश के कारोबारी माहौल और निवेश के मोर्चे पर सकारात्मक असर देखने को मिलेगा। हालांकि, हाई कोर्ट्स के लिए यह मूल्यांकन प्रक्रिया कार्यकुशलता और निष्पक्षता की एक बड़ी कसौटी होगी।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp