नई दिल्ली में भारतीय निर्वाचन आयोग के कामकाज और कार्यप्रणाली को लेकर सर्वोच्च अदालत में एक नया कानूनी कदम उठाया गया है। राकेश कुमार सिंह उर्फ राकेश सिंह द्वारा दायर इस ताजा याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के निर्णयों और संस्था के रिकॉर्ड पर सवाल खड़े किए गए हैं। आवेदक ने मांग की है कि आयोग के पूरे कामकाज के तौर-तरीकों की गहन न्यायिक जांच या फिर विशेष जांच दल से पड़ताल कराई जानी चाहिए ताकि फैसलों में पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।
सामूहिक फैसलों के नियमों का उल्लंघन का आरोप
याचिकाकर्ता का मुख्य तर्क यह है कि बहु-सदस्यीय संस्था के रूप में निर्वाचन आयोग को प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग तय कानूनी प्रक्रियाओं के मुताबिक नहीं हो रहा है। इसमें संविधान के आर्टिकल 324 और वर्ष 2023 के अधिनियम की धारा 18 के तहत अनिवार्य सामूहिक निर्णय प्रक्रिया की अनदेखी करने का गंभीर आरोप लगाया गया है। याचिका में यह भी कहा गया है कि अधिनियम के प्रावधान स्पष्ट रूप से यह अपेक्षा करते हैं कि आयोग का संचालन यथासंभव आम सहमति से होना चाहिए। यदि सदस्यों के बीच मतभेद की स्थिति बनती है, तो उसे बहुमत के आधार पर तय किया जाना आवश्यक है, जिसका पालन नहीं किए जाने का दावा किया गया है।
फॉर्म-6 में बदलाव और विशेष गहन पुनरीक्षण पर रोक की मांग
इस कानूनी याचिका में जुलाई 2026 में फॉर्म-6 के भीतर किए गए संशोधनों के साथ-साथ अन्य विवादास्पद कार्रवाइयों को भी पूरी तरह से रद्द करने का आग्रह किया गया है। याचिका में अदालत से यह अपील की गई है कि विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत उठाए गए सभी कदमों, निर्णयों और निर्देशों को शुरुआती दौर से ही कानूनी रूप से अमान्य और शून्य घोषित कर दिया जाए। इसके अलावा, याचिकाकर्ता ने अदालत से अनुरोध किया है कि सभी संबंधित दस्तावेजों और रिकॉर्ड को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाए ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी को छिपाया न जा सके।
मुख्य चुनाव आयुक्त के कामकाज पर रोक लगाने की अपील
याचिका में अदालत के समक्ष यह भी गुहार लगाई गई है कि जब तक इस मामले की पूरी कानूनी सुनवाई पूरी नहीं हो जाती, तब तक फॉर्म-6 में किसी भी तरह के बड़े संशोधनों पर रोक लगाई जाए। साथ ही, याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त को इस मामले के लंबित रहने के दौरान अपने आधिकारिक कार्यों का निर्वहन करने से रोकने के लिए अंतरिम निर्देश देने की भी पुरजोर मांग उठाई गई है, जिससे प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही तय की जा सके।














