भारतीय वायुसेना के सबसे बड़े बहुराष्ट्रीय युद्धाभ्यास का दूसरा चरण राजस्थान के जोधपुर में आरंभ हो चुका है। इस आयोजन में विभिन्न देशों के सैन्य विमान भारतीय वायुक्षेत्र में अपनी ताकत का प्रदर्शन कर रहे हैं। इस मेगा ड्रिल का उद्देश्य मित्र देशों के बीच आपसी तालमेल को मजबूत करना और साझा सामरिक अनुभवों का आदान-प्रदान करना है। अभ्यास के दौरान विभिन्न देशों के सैन्य विमान एक साथ उड़ान भर रहे हैं, जिससे पायलटों को संयुक्त अभियानों का व्यावहारिक अनुभव मिल रहा है।
विभिन्न देशों की भागीदारी और सैन्य ताकत
इस मेगा एक्सरसाइज में कुल आठ देशों की वायुसेनाएं सक्रिय रूप से शामिल हैं, जिनमें भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, फ्रांस, जर्मनी, श्रीलंका और बांग्लादेश के सैन्य बल अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे हैं। रक्षा मंत्रालय के अनुसार इस आयोजन का दायरा काफी व्यापक है, जिसमें केवल लड़ाकू विमान ही नहीं बल्कि सैन्य परिवहन विमान और हवा में ईंधन भरने वाले टैंकर भी शामिल हैं। अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने जोधपुर पहुंचकर विभिन्न वायुसेनाओं के बीच आपसी समन्वय और तालमेल का जायजा लिया। इसके अलावा फ्रांसीसी वायु एवं अंतरिक्ष बल के उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल डोमिनिक टार्डिफ ने एक्सरसाइज डायरेक्टर एयर वाइस मार्शल राज ठाकुर के साथ विस्तृत चर्चा की।
शामिल प्रमुख विमान और उनकी भूमिका
इस युद्धाभ्यास में दुनिया के सबसे आधुनिक और उन्नत लड़ाकू विमान अपनी क्षमता दिखा रहे हैं। विदेशी विमानों की सूची में एफ-35 लाइटनिंग सेकंड, राफेल और एफ-16 जैसे बेहतरीन फाइटर जेट शामिल हैं। इसके अतिरिक्त परिवहन और रसद सहायता के लिए ए400एम, एमआरटीटी, सी-130, सी-130जे और केसी-30ए जैसे विमान भी इस अभ्यास का अहम हिस्सा हैं। इनमें से कुछ विमान जहां आक्रामक कॉम्बैट मिशन के लिए डिजाइन किए गए हैं, वहीं अन्य विमान सैनिकों और सैन्य उपकरणों की ढुलाई तथा हवाई गोताखोरी के दौरान विमानों में ईंधन भरने के कार्य को अंजाम दे रहे हैं।
ऑपरेशनल तालमेल और संयुक्त प्रशिक्षण
इस युद्धाभ्यास का मुख्य जोर केवल विमानों को एक साथ उड़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि आधुनिक हवाई युद्ध के दौर में विभिन्न देशों की वायुसेनाओं के बीच सटीक समन्वय बिठाना है। इस दिशा में एयरक्राफ्ट क्रू, मिशन प्लानिंग विशेषज्ञ और ऑपरेशनल सपोर्ट स्टाफ मिलकर काम कर रहे हैं। सभी दल इंटरऑपरेबिलिटी, एयर सेफ्टी, ऑपरेशनल प्रोसीजर्स और आपसी अनुभवों को साझा करने पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। इस साझा प्रयास से सभी भाग लेने वाले देशों को एक-दूसरे की तकनीकी क्षमताओं और कार्यप्रणाली को गहराई से समझने का अवसर मिल रहा है, जबकि कई अन्य मित्र देशों के प्रतिनिधि इसमें पर्यवेक्षक के तौर पर उपस्थित हैं।
सांस्कृतिक गतिविधियां और अन्य कार्यक्रम
इस बार के आयोजन को केवल सैन्य उड़ानों तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसमें कई अन्य सह-गतिविधियों को भी शामिल किया गया है। विदेशी मेहमानों के लिए एक विशेष सेमिनार, भारतीय रक्षा और एविएशन इंडस्ट्री के दौरन, सेखों मैराथन, ऐतिहासिक धरोहरों का भ्रमण और योग सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। इन आयोजनों का उद्देश्य विदेशी सैन्य प्रतिनिधियों को भारत की संस्कृति और रक्षा उत्पादन क्षमताओं से अवगत कराना है, जिससे विभिन्न देशों के सैनिकों के बीच व्यक्तिगत संबंध और आपसी विश्वास को भी बढ़ावा मिल सके।
पूर्व संस्करण और भविष्य की दिशा
इस प्रतिष्ठित बहुराष्ट्रीय अभ्यास का पहला संस्करण वर्ष 2024 में आयोजित किया गया था, जिसके बाद अब इसके दूसरे संस्करण के माध्यम से भारतीय वायुसेना वैश्विक स्तर पर अपनी पेशेवर साझीदारी को और मजबूत कर रही है। वर्तमान अभ्यास इस बात का प्रमाण है कि भारत क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा साझीदारों के साथ मिलकर संयुक्त अभियानों की तैयारी को लगातार सुदृढ़ कर रहा है। फाइटर जेट्स, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और एरियल रिफ्यूलिंग क्षमताओं के इस अनूठे संगम से भविष्य के संयुक्त अभियानों में आपसी समझ को एक नई दिशा मिलेगी।

















