भारतीय रेलवे के इतिहास में रविवार का दिन एक नए अध्याय के रूप में दर्ज हुआ, जब गुजरात के अहमदाबाद स्थित साबरमती रेलवे स्टेशन से देश की पहली तरलीकृत प्राकृतिक गैस यानी एलएनजी से चलने वाली ट्रेन को आधिकारिक तौर पर रवाना किया गया। देश के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस विशेष ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर उन्होंने अपने संबोधन में इस पहल को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम करार दिया, जो भारतीय रेलवे को स्वच्छ और हरित ऊर्जा के विकल्पों की ओर अग्रसर करने में मील का पत्थर साबित होगा। कार्यक्रम के दौरान केवल इस अनूठी ट्रेन का ही शुभारंभ नहीं किया गया, बल्कि साबरमती क्षेत्र में रेलवे से जुड़ी कई अन्य महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी संपन्न हुआ।
साबरमती की ऐतिहासिक भूमि और गांधी के विचारों का स्मरण
संबोधन की शुरुआत करते हुए अमित शाह ने उस ऐतिहासिक भूमि के महत्व को रेखांकित किया जिस पर यह कार्यक्रम आयोजित हो रहा था। उन्होंने श्रोताओं को याद दिलाया कि यह वही साबरमती की पावन धरती है जहां राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने सत्याग्रह, सादा जीवन जीने के संदेश, ग्रामीण विकास और खादी के प्रसार जैसे महान विचारों को धरातल पर उतारकर प्रयोग के तौर पर आगे बढ़ाया था। शाह ने इस बात पर जोर दिया कि आज उसी ऐतिहासिक स्थान से देश के परिवहन और रेलवे नेटवर्क को आधुनिक तकनीक और पर्यावरण संरक्षण के नए आयाम दिए जा रहे हैं। उनके अनुसार, आज जिन कई नई पहलों का श्रीगणेश हुआ है, उनमें से कुछ परियोजनाएं सीधे तौर पर यात्रियों के सफर को सुगम बनाने से जुड़ी हैं, जबकि अन्य पहलें सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने और पर्यावरण की रक्षा करने के उद्देश्य से तैयार की गई हैं।
गुजरा दौर याद कर बताया साबरमती स्टेशन का बदलाव
अमित शाह ने अपने पुराने संस्मरणों को साझा करते हुए साबरमती रेलवे स्टेशन के कायापलट की कहानी बयां की। उन्होंने पुराने दौर को याद करते हुए बताया कि 1980 के दशक का वह भी समय था जब यात्रियों को स्टेशन परिसर से बाहर निकलकर रिक्शा पकड़ने के लिए करीब दो किलोमीटर तक पैदल सफर तय करना पड़ता था। वक्त के साथ हालात किस कदर बदले हैं, इसका जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वही साबरमती स्टेशन आज देश के आधुनिक और भव्य परिवहन नेटवर्क का एक बेहद महत्वपूर्ण और जीवंत हिस्सा बन चुका है। आज इस क्षेत्र को मेट्रो रेल सेवा, अत्याधुनिक राज्य परिवहन बस स्टैंड और भविष्य की महत्वाकांक्षी हाई-स्पीड रेल सेवा तक की बेहतरीन कनेक्टिविटी हासिल हो चुकी है, जिससे आम नागरिकों का सफर बेहद आसान हो गया है।
साढ़े चौदह सौ करोड़ से अधिक की रेलवे परियोजनाओं का पिटारा
साबरमती रेलवे स्टेशन और उसके आसपास के इलाकों के विकास के लिए भारी-भरकम निवेश किया जा रहा है। अमित शाह ने जानकारी दी कि इस पूरे इलाके में लगभग 1,472 करोड़ रुपये की लागत वाली विभिन्न रेलवे परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया जा रहा है। इन तमाम विकास कार्यों का मुख्य उद्देश्य यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं में विस्तार करना, सुरक्षा के इंतज़ामों को और अधिक मजबूत करना तथा परिवहन की कनेक्टिविटी को निर्बाध बनाना है। सरकार का प्रयास है कि देश के नागरिकों को विश्व स्तरीय रेलवे ढांचा मिले, जिससे न केवल उनका समय बचे बल्कि यात्रा का अनुभव भी सुखद और सुरक्षित हो सके।
डीजल की खपत में भारी कमी और विद्युतीकरण का लक्ष्य
पर्यावरण के प्रति रेलवे की प्रतिबद्धता को आंकड़ों के जरिए समझाते हुए अमित शाह ने डीजल की खपत में आई ऐतिहासिक गिरावट का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2015-16 के दौरान भारतीय रेलवे में कुल मिलाकर लगभग 293 करोड़ लीटर डीजल की खपत होती थी, जो घटकर वर्ष 2024-25 में मात्र 108 करोड़ लीटर के आसपास रह गई है। सरकार की दूरदर्शी योजनाओं के तहत यह लक्ष्य निर्धारित किया गया है कि वर्ष 2030 तक भारतीय रेलवे में डीजल की खपत को पूरी तरह से शून्य पर लाया जाए। इस बड़े कदम के पीछे पर्यावरण को प्रदूषण मुक्त रखने की मंशा के साथ-साथ देश की भारी-भरकम विदेशी मुद्रा की बचत करना भी एक मुख्य उद्देश्य है। इसके अलावा, रेलवे के संपूर्ण विद्युतीकरण के मोर्चे पर प्रगति का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि देश में लगभग 99.6 प्रतिशत रेल नेटवर्क का विद्युतीकरण पूरा किया जा चुका है और शेष बचा हुआ थोड़ा सा कार्य भी बहुत जल्द पूरा कर लिया जाएगा।
एलएनजी के बाद हाइड्रोजन और अन्य हरित विकल्पों पर नजर
वैकल्पिक ऊर्जा के इस्तेमाल को आज के दौर की सबसे बड़ी जरूरत बताते हुए अमित शाह ने भविष्य की योजनाओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि एलएनजी ट्रेन के साथ-साथ अब देश में हाइड्रोजन ईंधन से संचालित होने वाली ट्रेनों पर भी तेजी से काम चल रहा है। हाइड्रोजन ट्रेन की शुरुआत के साथ ही भारत दुनिया के उन चुनिंदा और अग्रणी देशों की सूची में शामिल हो रहा है जो इस अत्याधुनिक तकनीक पर शोध और क्रियान्वयन कर रहे हैं। हालांकि, साबरमती के इस विशेष कार्यक्रम में जिस ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया, वह तरलीकृत प्राकृतिक गैस यानी एलएनजी पर आधारित थी, जिससे यह स्पष्ट होता है कि रेलवे एक साथ कई वैकल्पिक ईंधनों और तकनीकों को आजमाने की रणनीति पर काम कर रहा है।
एक ही इंजन में साठ करोड़ ट्रकों जैसी माल ढुलाई क्षमता
यात्री परिवहन के साथ-साथ माल ढुलाई के क्षेत्र में हो रहे तकनीकी चमत्कारों का जिक्र करते हुए शाह ने शक्तिशाली इंजनों का उदाहरण दिया। उन्होंने 1,200 हॉर्सपावर की जबरदस्त क्षमता वाले अत्याधुनिक ट्विन-सेक्शन इंजन का हवाला देते हुए बताया कि अकेले इस एक इंजन की माल ढुलाई की क्षमता करीब 600 ट्रकों के बराबर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पहले के समय में इतनी भारी मात्रा में माल एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने के लिए दो अलग-अलग लोकोमोटिव इंजनों की आवश्यकता पड़ती थी, लेकिन अब अकेले डब्ल्यूएजी-12 श्रेणी का इंजन इस जिम्मेदारी को पूरी क्षमता के साथ निभा रहा है। इसके साथ ही देश भर में डबल-डेकर मालगाड़ियों के सफल ट्रायल का भी उल्लेख किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य सीमित रेल पटरियों पर अधिक से अधिक सामान ढोने की क्षमता विकसित करना है ताकि व्यापारिक गतिविधियों को गति मिल सके।
दिल्ली-हावड़ा और दिल्ली-गुवाहाटी नेटवर्क पर विशेष जोर
देश के सबसे व्यस्त रेल मार्गों की क्षमता बढ़ाने के लिए सरकार किस तरह योजनाबद्ध तरीके से काम कर रही है, इसका ब्योरा भी साझा किया गया। अमित शाह ने बताया कि दिल्ली से हावड़ा और दिल्ली से गुवाहाटी के बीच फैले लगभग 11,000 किलोमीटर लंबे विशाल रेल नेटवर्क को चार-लेन क्षमता वाले उन्नत नेटवर्क में तब्दील करने की दिशा में तेजी से कार्य चल रहा है। उनके मुताबिक, इस भारी-भरकम विस्तार से भविष्य में बढ़ने वाले रेल यातायात के भारी दबाव को आसानी से संभाला जा सकेगा और देश के विभिन्न हिस्सों के बीच कनेक्टिविटी में अभूतपूर्व सुधार होगा। इन सब के अलावा डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, आधुनिक रैपिड रेल सेवाओं और अत्याधुनिक रेलवे स्टेशनों जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं ने मिलकर भारतीय रेलवे की पूरी कार्यक्षमता का कायाकल्प कर दिया है।
मेक इन इंडिया के तहत शत-प्रतिशत स्वदेशी उत्पादन का संकल्प
आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को दोहराते हुए शाह ने रेलवे क्षेत्र में स्वदेशी विनिर्माण को सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शुमार बताया। उनके द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, वर्तमान में भारत के भीतर तैयार किए जा रहे लोकोमोटिव इंजनों में लगभग 94 प्रतिशत हिस्सा पूरी तरह से मेक इन इंडिया के तहत स्वदेशी रूप से बन रहा है और आने वाले समय में इसे बढ़ाकर 100 प्रतिशत पूरी तरह स्वदेशी करने का स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और साबरमती रेलवे डिवीजन की पूरी कार्यशील टीम को इन तमाम अभिनव पहलों और सफल आयोजनों के लिए हार्दिक बधाई दी। साबरमती से एलएनजी आधारित इस ट्रेन का प्रस्थान इसी व्यापक बदलाव का एक जीवंत हिस्सा है, जहां रेलवे का मुख्य ध्येय ईंधन की खपत घटाना, प्रदूषण पर लगाम लगाना, माल ढुलाई की ताकत बढ़ाना और यात्रियों को विश्व स्तर की आधुनिक सुविधाएं मुमुहैया कराना है।





















