उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में ग्रामीण स्वच्छता व्यवस्था को नई दिशा देने के लिए एक व्यापक योजना पर काम शुरू किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू किए गए स्वच्छ भारत मिशन के तहत अब गांवों को सिर्फ गंदगी मुक्त बनाने तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि अपशिष्ट प्रबंधन के जरिए ग्राम पंचायतों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का खाका तैयार किया गया है। जनपद की विभिन्न ग्राम पंचायतों में रीसोर्स रिकवरी सेंटर (RRC) और फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट (FSTP) की स्थापना की जा रही है, जहां गांव से निकलने वाले कूड़े-कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण करके उससे जैविक खाद और पुनर्चक्रित सामग्री तैयार की जाएगी।
कचरे के वर्गीकरण से आमदनी बढ़ाने की पूरी प्रक्रिया
ग्रामीण क्षेत्रों में कचरा प्रबंधन को सुचारू बनाने के लिए सबसे पहले सफाई कर्मचारियों द्वारा पूरी ग्राम सभा से घर-घर जाकर कूड़ा इकट्ठा किया जाएगा। इस एकत्रित कचरे को सीधे रीसोर्स रिकवरी सेंटर पर लाया जाएगा। सेंटर पर पहुंचे कूड़े को अलग-अलग श्रेणियों में छांटा जाएगा, जिसमें गीला कचरा, सूखा कचरा, प्लास्टिक और लोहे जैसी धातुएं शामिल होंगी। छांटे गए सूखे कचरे और धातु पदार्थों को रीसायकल करने के बाद स्थानीय बाजार में बेचा जाएगा, जिससे ग्राम पंचायत के लिए सीधी आय अर्जित होगी। वहीं, गीले कचरे की मदद से उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद तैयार की जाएगी। इस खाद की बिक्री से भी पंचायत के कोष में इजाफा होगा और गांव वित्तीय रूप से मजबूत बन सकेंगे।
FSTP प्लांट से जल संरक्षण और सीवेज का वैज्ञानिक निस्तारण
गांवों में सेप्टिक टैंकों और शौचालयों से निकलने वाले तरल अपशिष्ट तथा गंदे पानी के प्रबंधन के लिए फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट (FSTP) स्थापित किए जा रहे हैं। वर्तमान समय में कई ग्रामीण इलाकों में सेप्टिक टैंकों का अपशिष्ट खुले स्थानों, नालों अथवा स्थानीय जलस्रोतों के आसपास बहा दिया जाता है। इससे नदियां, तालाब और भूमिगत जल प्रदूषित होता है, साथ ही आसपास के पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता है। FSTP प्रणाली के जरिए लाए जाने वाले फीकल स्लज और प्रदूषित जल का निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुसार चरणबद्ध शोधन किया जाएगा। शोधित पानी का उपयोग कृषि और बागवानी जैसे कार्यों में किया जाएगा, जिससे ताजे पानी की बर्बादी रुकेगी। इसके अलावा, शोधित स्लज का उपयोग खेतों के लिए प्राकृतिक जैविक खाद बनाने में होगा, जिससे किसानों को रासायनिक उर्वरकों का बेहतर विकल्प मिलेगा।
दोस्तपुर के गोराबारिक मॉडल का पूरे जनपद में होगा विस्तार
जिला पंचायत राज अधिकारी अभिषेक कुमार शुक्ला ने योजना की रूपरेखा साझा करते हुए बताया कि सुल्तानपुर जनपद की अधिकतर ग्राम पंचायतों को पूर्णतः कचरा मुक्त बनाने का लक्ष्य तय किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य गांवों को स्वच्छ रखने के साथ-साथ पंचायतों की स्वयं की आय के स्रोत विकसित करना है। इसके लिए स्थानीय स्तर पर जन जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे ताकि ग्रामीण कूड़े को अलग-अलग करके संग्रहण में सहयोग करें। डीपीआरओ के अनुसार, सुल्तानपुर के दोस्तपुर ब्लॉक स्थित गोराबारिक ग्राम पंचायत में इस व्यवस्था को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में सफलतापूर्वक लागू किया गया था। वहां मिले सकारात्मक परिणामों को देखते हुए अब इस मॉडल को पूरे सुल्तानपुर जिले की सभी ग्राम पंचायतों में चरणबद्ध तरीके से लागू करने की तैयारी पूरी कर ली गई है।



















