कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के इलाज में इस्तेमाल होने वाली महंगी और जीवनरक्षक दवाओं की कालाबाजारी और फर्जीवाड़े के खिलाफ दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने अब तक की बड़ी कार्रवाई की है। क्राइम ब्रांच की इंटरस्टेट सेल ने एक ऐसे अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है जो अस्पतालों से दवाएं चुराने, सरकारी सप्लाई को मोड़ने और नकली एंटी-कैंसर दवाएं तैयार कर बाजार में बेचने के अवैध कारोबार में लिप्त था। इस सिलसिले में पुलिस ने छह अलग-अलग राज्यों से कुल 17 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। छापेमारी के दौरान पुलिस ने गिरोह के ठिकानों से लगभग 9 करोड़ रुपये मूल्य का सामान जब्त किया है, जिसमें कैंसर की महंगी दवाओं की शीशियां, खाली डिब्बे और भारी मात्रा में अन्य मेडिकल सामग्री शामिल है।
छह राज्यों तक फैले अंतरराज्यीय नेटवर्क का भंडाफोड़
पुलिस जांच में सामने आया है कि इस सिंडिकेट का जाल किसी एक शहर तक सीमित नहीं था, बल्कि यह दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, नवी मुंबई, हैदराबाद, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान तक फैला हुआ था। इस संगठित आपराधिक गिरोह के बारे में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को 22 जून 2026 को पहली गोपनीय सूचना प्राप्त हुई थी। सूचना के आधार पर पुलिस टीमों ने पूर्वी दिल्ली, रोहिणी और मुंबई के विभिन्न संदिग्ध ठिकानों की निगरानी शुरू की। लगातार जांच और पुख्ता सबूत मिलने के बाद, 11 जुलाई 2026 को क्राइम ब्रांच ने 7 विशेष टीमों का गठन किया। इन टीमों ने ड्रग्स विभाग और स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर दिल्ली और नवी मुंबई के कई ठिकानों पर एक साथ योजनाबद्ध छापेमारी की। इस बड़ी कार्रवाई के बाद 12 जुलाई 2026 को दिल्ली के थाना क्राइम ब्रांच में औपचारिक एफआईआर दर्ज की गई।
बरामद एंटी-कैंसर दवाओं और संपत्तियों का ब्योरा
छापेमारी के दौरान पुलिस को आरोपियों के पास से भारी मात्रा में अवैध दवाएं और नकदी मिली है। बरामद सामान की कुल कीमत करीब 9 करोड़ रुपये आंकी गई है। इसके अलावा गिरोह के कब्जे से 50 लाख रुपये की नगदी भी जब्त की गई है। पुलिस ने कुल मिलाकर निम्नलिखित सामग्री बरामद की है
- 588 भरी हुई वायल: कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली महंगी एंटी-कैंसर दवाओं की भरी हुई शीशियां।
- 6 खाली वायल और 7 खाली डिब्बे: री-पैकेजिंग के लिए इस्तेमाल होने वाली पुरानी खाली शीशियां और दवा के डिब्बे।
- 3,021 यूनिट अन्य दवाएं: विभिन्न प्रकार की अन्य मेडिकल दवाएं और सामाग्री।
- 50 लाख रुपये कैश: अवैध बिक्री और लेन-देन से जुटाया गया नकदी धन।
- पैकिंग सामग्री: थर्माकोल बॉक्स, बबल रैप, सेलो टेप और पॉलीथिन बैग।
- डिजिटल और वित्तीय सबूत: इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेस, नकदी का हिसाब रखने वाली डायरियां और रजिस्टर।
बरामद की गई महंगी एंटी-कैंसर दवाओं के ब्रांड्स में डारज़ालेक्स, इमफिंजी, एरबिटक्स, ओपडीटा, गाज़ीवा, बावेन्सियो, एडसेट्रिस और कीट्रूडा प्रमुख रूप से शामिल हैं। ये सभी दवाएं बाजार में अत्यंत महंगी दरों पर बिकती हैं और मरीजों के जीवन की रक्षा के लिए बेहद संवेदनशील मानी जाती हैं।
दवाओं की हेराफेरी और तीन प्रमुख तरीके
पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि यह सिंडिकेट मुख्य रूप से तीन अलग-अलग रास्तों से महंगी एंटी-कैंसर दवाएं हासिल करता था। पहली कार्यप्रणाली के तहत आरोपी अनधिकृत और गैर-कानूनी स्रोतों से सीधे नकली दवाओं की खरीद करते थे। दूसरा तरीका अस्पतालों से दवाओं की चोरी का था, जहां गंभीर कैंसर मरीजों के इलाज के लिए रखी गई प्रामाणिक दवाओं को चुपके से निकालकर गिरोह को सौंप दिया जाता था। तीसरा तरीका सरकारी संस्थानों, केंद्रीय भंडारों और वेयरहाउस में भेजी जाने वाली रियायती या मुफ्त सप्लाई की दवाओं को अवैध रूप से बाजार की तरफ डाइवर्ट करना था।
केमिकल से निशान मिटाकर री-पैकेजिंग का खेल
इस पूरे काले कारोबार में किसी भी प्रकार के वैध बिल, खरीद रिकॉर्ड या ड्रग लाइसेंस का उपयोग नहीं किया जाता था। दवाओं को रिहायशी मकानों और गुप्त ठिकानों में बिना उचित तापमान नियंत्रण के स्टोर किया जाता था और फिर बिचौलियों के माध्यम से बाजार में भेजा जाता था। पुरानी खाली शीशियों और डिब्बों का उपयोग कर दवाओं की दोबारा पैकेजिंग की जाती थी। असली दवाओं के बैच नंबर, एमआरपी और पहचान चिह्नों को मिटाने के लिए आरोपी एसीटोन जैसे ज्वलनशील केमिकल्स का सहारा लेते थे। इसके बाद नए फर्जी लेबल लगाकर इन्हें थर्माकोल और बबल रैप में पैक करके कोरियर व अन्य माध्यमों से सप्लाई किया जाता था।
अस्पताल कर्मियों और मेडिकल स्टाफ की साठगांठ
जांच के दौरान स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े कर्मचारियों और मेडिकल स्टोर संचालकों की संलिप्तता भी उजागर हुई है। हैदराबाद के एक बड़े अस्पताल से मरीजों के लिए निर्धारित कैंसर इंजेक्शनों को गायब कर सिंडिकेट तक पहुंचाने का मामला सामने आया है। इसी तरह हरियाणा के फरीदाबाद में एक अस्पताल के ऑन्कोलॉजी (कैंसर) विभाग के नर्सिंग स्टाफ की सीधी भूमिका पाई गई है। गिरफ्तार आरोपियों में से एक व्यक्ति अस्पताल में नर्सिंग इंचार्ज के पद पर तैनात था, जबकि दूसरा आरोपी पहले एक प्रसिद्ध ऑन्कोलॉजिस्ट का पर्सनल असिस्टेंट रह चुका था। राजस्थान के अलवर में पकड़ा गया आरोपी भी अस्पताल में भर्ती कैंसर मरीजों के लिए आए इंजेक्शनों की हेराफेरी में शामिल था।
गिरफ्तार किए गए 17 आरोपियों का पूरा ब्योरा
पुलिस ने इस पूरे सिंडिकेट में शामिल 17 व्यक्तियों को चिन्हित कर गिरफ्तार किया है। इन आरोपियों का विवरण क्षेत्रवार इस प्रकार है
- दिल्ली के आरोपी: अभिषेक वैश्य (लक्ष्मी नगर), शुभम कुमार चौधरी (लक्ष्मी नगर), सूरज चौधरी (लक्ष्मी नगर) और सतीश कुमार (गोविंदपुरी)।
- उत्तर प्रदेश के आरोपी: गगन (इंदिरापुरम, गाजियाबाद), विश्वास त्यागी (गाजियाबाद) और आनंद कुमार (नोएडा)।
- हरियाणा के आरोपी: मुकेश (गुरुग्राम), मयंक गर्ग (गुरुग्राम), दीपक उर्फ रवि (फरीदाबाद), जसवंत शर्मा (फरीदाबाद) और परमजीत श्योराण (झज्जर)।
- तेलंगाना (हैदराबाद) के आरोपी: श्रीनिवासुलु कलवा, रामदास सतीश कुमार और मालुगरी श्रीनाथ रेड्डी।
- महाराष्ट्र के आरोपी: आयुष कुमार (नवी मुंबई)।
- राजस्थान के आरोपी: मनीष शर्मा (अलवर)।
वित्तीय तंत्र और आगे की पुलिस कार्रवाई
क्राइम ब्रांच की टीम अब इस पूरे नेटवर्क के वित्तीय खातों और हवाला कनेक्शनों की गहराई से जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस सिंडिकेट द्वारा सप्लाई की गई नकली और चोरी की दवाएं किन-किन मेडिकल स्टोर्स, दलालों या मरीजों तक पहुंची हैं। बरामद रजिस्टरों और डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, इस नेटवर्क से जुड़े कई अन्य चेहरों का पर्दाफाश होगा और अतिरिक्त गिरफ्तारियां व बरामदगी संभव हैं।



















