पाक जलडमरूमध्य में मछली पकड़ने के अधिकार को लेकर छिड़ा विवाद एक बार फिर गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है, जहां श्रीलंकाई नौसेना ने तमिलनाडु के सात भारतीय मछुआरों को उनकी नाव सहित हिरासत में ले लिया। यह कार्रवाई रविवार तड़के उस समय हुई जब मछुआरे कच्चातिवु द्वीप और उत्तरी मन्नार के मध्य समुद्री क्षेत्र में अपना ट्रॉलर चला रहे थे। नौसैनिक कर्मियों ने उन पर अवैध तरीके से मछली पकड़ने का आरोप लगाते हुए नाव को अपने नियंत्रण में ले लिया और चालक दल के सभी सदस्यों को श्रीलंका के एक नौसैनिक बंदरगाह पर ले जाया गया। इस ताजा घटना के बाद तटीय इलाकों में लंबे समय से लंबित इस समुद्री सीमा विवाद का स्थायी राजनीतिक समाधान निकालने के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर दबाव बढ़ गया है।
हिरासत में लिए गए मछुआरों की पहचान और टोकन व्यवस्था
तमिलनाडु मत्स्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार पकड़े गए सभी सात लोग रामनाथपुरम जिले के तटीय मछुआरा परिवारों से ताल्लुक रखते हैं। इन मछुआरों की पहचान 41 वर्षीय प्लासियस, 22 वर्षीय अलगु पांडी, 33 वर्षीय एंटनी पिचाई, 21 वर्षीय राबिन, 58 वर्षीय नेल्सन, 65 वर्षीय अरुलानंदा जेवियर और 34 वर्षीय सहाय आनंद के रूप में की गई है। ये सभी मछुआरे रामेश्वरम और थंगाचीमडम क्षेत्र से समुद्र में उतरे थे। मत्स्य विभाग ने विधिवत समुद्री यात्रा के लिए 31 अक्टूबर को कुल 398 टोकन जारी किए थे, जिसके तहत समुद्र में गए सभी समूहों को रविवार शाम तक तट पर लौटना था। हालांकि, निर्धारित समय से पहले ही रविवार की भोर में सात लोगों का यह दल नौसैनिक कार्रवाई का शिकार बन गया। घटना की खबर फैलते ही स्थानीय मछुआरा संगठनों में रोष फैल गया, जिसके बाद एक मछुआरा नेता ने कहा, “हम तटीय जिले के सभी मछुआरा संगठनों की एक बैठक बुलाएंगे और आगे की रणनीति तय करेंगे।”
लगातार होती गिरफ्तारियां और कूटनीतिक अपील
समुद्री सीमा पर भारतीय मछुआरों को पकड़े जाने का यह कोई पहला मामला नहीं है, बल्कि पिछले कुछ महीनों से ऐसी घटनाएं लगातार दोहराई जा रही हैं। रविवार की इस कार्रवाई से पहले 3 अक्टूबर को भी रामेश्वरम के नौ मछुआरों को श्रीलंकाई अधिकारियों ने गिरफ्तार किया था और उनकी मैकेनाइज्ड बोट जब्त कर ली थी। उस गिरफ्तारी के तुरंत बाद मुख्यमंत्री विजय ने इस मामले में दखल देने के लिए विदेश मंत्री एस. जयशंकर से अपील की थी। विजय ने 5 अक्टूबर को लिखे अपने पत्र में श्रीलंका की हिरासत में मौजूद 20 मछुआरों की तत्काल रिहाई और जब्त की गई 270 नौकाओं को वापस लौटाने का आग्रह किया था। इसके साथ ही उन्होंने दोनों देशों के बीच मत्स्य पालन से जुड़े द्विपक्षीय ‘संयुक्त कार्य समूह’ की रुकी हुई वार्ता को तुरंत बहाल करने की मांग उठाई थी ताकि कूटनीतिक स्तर पर विवाद सुलझाया जा सके।
साल भर से जारी टकराव का घटनाक्रम
दोनों देशों के समुद्री जलक्षेत्र के बीच मछुआरों की आवाजाही को लेकर पूरे साल तनाव बना रहा है। इसी साल जुलाई के दौरान भी रामेश्वरम से समुद्र में गए नौ मछुआरों को मन्नार के उत्तरी समुद्री हिस्से में मछली पकड़ते समय गिरफ्तार किया गया था। तब भी उनकी नाव को कब्जे में लेकर पूरे चालक दल को मन्नार स्थित नौसैनिक शिविर में भेज दिया गया था। इससे पहले मार्च महीने में भी ठीक ऐसी ही कार्रवाई सामने आई थी, जब रामेश्वरम के सात मछुआरों और उनकी दो नौकाओं को हिरासत में लिया गया था। उस समय मछुआरों पर अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा (आईएमबीएल) का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया था, जिसके विरोध में मछुआरा संगठनों ने सड़कों और बंदरगाहों पर प्रदर्शन कर अपने साथियों और आजीविका के साधन नौकाओं को अविलंब लौटाने की मांग की थी।















