देश के रेल ढांचे को आधुनिक गति देने के लिए एक बड़ा निर्णय सामने आया है, जिसके तहत उत्तर प्रदेश को अपनी पहली हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन मिलने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुलेट ट्रेन परियोजना के उत्तरी कॉरिडोर को अपनी औपचारिक मंजूरी दे दी है। इस हाई-स्पीड ट्रैक के तैयार होने के बाद देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से सांस्कृतिक नगरी वाराणसी के बीच का फासला घटकर मात्र 3.5 घंटे का रह जाएगा। मौजूदा समय में इस रूट पर सामान्य एक्सप्रेस और प्रीमियम ट्रेनों से सफर करने में यात्रियों को काफी लंबा समय बिताना पड़ता है, लेकिन नई हाई-स्पीड व्यवस्था से यह समय घटकर आधे से भी कम हो जाएगा।
गंगा पर बनेगा नया सिग्नेचर नमो ब्रिज
इस बड़े रेल प्रोजेक्ट के समानांतर वाराणसी में गंगा नदी पर एक नए सिग्नेचर ब्रिज के निर्माण की रूपरेखा भी तेजी से आगे बढ़ रही है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने निर्माण स्थल का जायजा लिया और घोषणा की कि गंगा पर तैयार हो रहे इस अत्याधुनिक पुल का नाम 'नमो ब्रिज' रखा जाएगा। यह नया बुनियादी ढांचा रेल और सड़क दोनों प्रकार के परिवहन को एक साथ मजबूती देगा। परियोजना के पूरा होने पर काशी क्षेत्र के समग्र आर्थिक विकास और आवागमन को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के विस्तार की रूपरेखा
उत्तरी कॉरिडोर के अलावा देशभर में हाई-स्पीड रेल कनेक्टिविटी को व्यापक बनाने के लिए कुल 7 नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर मंजूर किए गए हैं। इस पूरे नेटवर्क में दिल्ली से आगरा का सफर करीब 1 घंटे और लखनऊ का सफर 2.5 घंटे में पूरा करने का खाका तैयार किया गया है, जबकि आगे चलकर पटना तक यात्रा 4.5 घंटे में पूरी हो सकेगी। वहीं गुजरात और महाराष्ट्र में बुनियादी ढांचे के तहत 14 ट्रैक्शन सबस्टेशनों से बिजली आपूर्ति की व्यवस्था बनाई जा रही है। इसके साथ ही वर्ष 2027 में पहला सेक्शन खोलने का लक्ष्य तय किया गया है और 2030 के दशक में आधुनिक E-20 सीरीज की ट्रेनों की आपूर्ति शामिल है।
















