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कल्याण से लातूर तक नया एक्सप्रेसवे घटाएगा सफर का समय, मलशेज घाट पर बनेगी आठ किलोमीटर लंबी टनलमहाराष्ट्र
19 सित॰ 2026, 3:08 pm (38 दिन पहले)· 4

कल्याण से लातूर तक नया एक्सप्रेसवे घटाएगा सफर का समय, मलशेज घाट पर बनेगी आठ किलोमीटर लंबी टनल

महाराष्ट्र कैबिनेट ने कल्याण से लातूर तक 450 किलोमीटर लंबे नए एक्सप्रेसवे को स्वीकृति प्रदान कर दी है, जिससे गंतव्य तक पहुंचने का समय 11 घंटे से सिमटकर केवल 5 घंटे रह जाएगा।

महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों को बेहतर सड़क संपर्क तंत्र से जोड़ने की दिशा में एक नया अध्याय जुड़ गया है। राज्य कैबिनेट ने कल्याण और लातूर के बीच एक अत्याधुनिक ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के निर्माण को हरी झंडी दे दी है। करीब 450 किलोमीटर लंबे इस नए मार्ग के चालू होने के बाद कल्याण से लातूर जाने वाले मुसाफिरों को वर्तमान 11 घंटे के थकाऊ सफर से राहत मिलेगी और वे महज 4.5 से 5 घंटे में अपनी यात्रा पूरी कर सकेंगे।

रूट का पूरा खाका और प्रमुख कनेक्टिविटी

यह महत्वपूर्ण कॉरिडोर दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के हिस्से के रूप में बन रही बदलापुर टनल के उत्तर छोर से शुरू होगा। वहां से आगे बढ़ते हुए यह महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा के करीब स्थित लातूर शहर तक पहुंचेगा। आने वाले वक्त में इस मार्ग को सीधे मुंबई मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र के साथ भी संबद्ध किया जाएगा, जो नागपुर-गोवा शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे के करीब रहेगा। इस तरह मुंबई क्षेत्र के यात्री बिना किसी रुकावट के राज्य के दक्षिणी और पूर्वी हिस्सों की तरफ तेजी से बढ़ सकेंगे।

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मलशेज घाट में बनेगी आठ किलोमीटर की सुरंग

इस पूरे प्रोजेक्ट की सबसे विशिष्ट और चुनौतीपूर्ण कड़ी मलशेज घाट का इलाका है। पहाड़ी और दुर्गम इलाके को सुगम बनाने के लिए यहां आठ किलोमीटर लंबी टनल खोदी जाएगी। यह संरचना ठीक उसी तकनीक और तर्ज पर तैयार की जाएगी, जैसी समृद्धि एक्सप्रेसवे पर इगतपुरी के समीप ट्विन टनल का निर्माण किया गया है। दुर्गम घाटियों, खड़ी ढलानों और अंध मोड़ के कारण वाहनों की गति धीमी होने की समस्या को यह टनल पूरी तरह दूर कर देगी।

लागत और तकनीकी विशेषताएं

इस पूरे एक्सप्रेसवे परियोजना पर कुल 22 से 25 हजार करोड़ रुपये की अनुमानित लागत आने का आकलन किया गया है। वाहनों के सुचारू प्रवेश और निकास के लिए पूरे 450 किलोमीटर के दायरे में कुल 17 इंटरचेंज स्थापित किए जाएंगे। परियोजना की अहमियत केवल दूरी नापने में नहीं है, बल्कि उस कठिन भौगोलिक परिदृश्य को भेदकर एक हाई-स्पीड कॉरिडोर उपलब्ध कराने में है जो अब तक भारी ट्रैफिक जाम और धीमी चाल के लिए जाना जाता था।

मल्टीमॉडल नेटवर्क और आर्थिक गलियारों से जुड़ाव

यह नया गलियारा दो अन्य बड़े एक्सप्रेसवे के साथ नेटवर्क को मजबूत करेगा। इसके साथ ही योजना के तहत इसे विरार-अलीबाग मल्टीमॉडल कॉरिडोर से भी जोड़ा जाएगा। इस एकीकरण से नवी मुंबई एयरपोर्ट और अटल सेतु तक आवागमन बेहद आसान और निर्बाध हो जाएगा। इसके अलावा, यह मार्ग मराठवाड़ा क्षेत्र में निर्माणाधीन सूरत-चेन्नई इकनॉमिक कॉरिडोर के साथ भी लिंक होगा, जिससे औद्योगिक माल ढुलाई और व्यापारिक गतिविधियों को असाधारण रफ्तार मिलेगी।

सवाल-जवाब

कल्याण-लातूर एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई कितनी है?
इस प्रस्तावित एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई लगभग 450 किलोमीटर होगी।
इस नए एक्सप्रेसवे से यात्रा के समय में कितनी बचत होगी?
कल्याण से लातूर का सफर 11 घंटे से घटकर मात्र 4.5 से 5 घंटे का रह जाएगा।
यह एक्सप्रेसवे कहां से शुरू और कहां समाप्त होगा?
यह दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर बन रही बदलापुर टनल के उत्तर से शुरू होकर महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा के पास लातूर में समाप्त होगा।
मलशेज घाट में बनने वाली टनल की लंबाई क्या होगी?
मलशेज घाट के पास आठ किलोमीटर लंबी टनल बनाई जाएगी, जो समृद्धि एक्सप्रेसवे की इगतपुरी ट्विन टनल जैसी होगी।
इस परियोजना के निर्माण में कितनी लागत आएगी?
एक्सप्रेसवे के निर्माण पर 22 से 25 हजार करोड़ रुपये का खर्च आने का अनुमान है।
एक्सप्रेसवे पर कितने इंटरचेंज बनाए जाएंगे?
वाहनों के सुचारू आवागमन के लिए इस मार्ग पर कुल 17 इंटरचेंज तैयार किए जाएंगे।
यह मार्ग किन अन्य प्रमुख परियोजनाओं से जुड़ेगा?
यह विरार-अलीबाग मल्टीमॉडल कॉरिडोर, नवी मुंबई एयरपोर्ट, अटल सेतु और सूरत-चेन्नई इकनॉमिक कॉरिडोर से कनेक्ट होगा।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Tanvi Desai@tanvi-desai·37 दिन पहले

यह एक्सप्रेसवे केवल परिवहन और रसद को ही नहीं बदलेगा, बल्कि महाराष्ट्र के भीतर फिल्म और मीडिया शूटिंग के लिए भी नए रास्ते खोलेगा। कल्याण से लातूर तक का यह उन्नत गलियारा और मलशेज घाट की सुरंग दुर्गम इलाकों की दूरियों को मिटाकर प्रोडक्शन क्रू और उपकरणों की आवाजाही को बेहद आसान और तेज बना देगी, जिससे दूरदराज के क्षेत्रों में मनोरंजन उद्योग का विस्तार तेजी से हो सकेगा।

Ravikash Gupta@ravikash·37 दिन पहले

कल्याण से लातूर तक का यह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे और मलशेज घाट की टनल महज़ परिवहन सुधार नहीं, बल्कि पश्चिमी महाराष्ट्र और मराठवाड़ा के बीच आर्थिक एकीकरण का एक बड़ा उत्प्रेरक है। 22 से 25 हजार करोड़ रुपये के इस निवेश और सूरत-चेन्नई व दिल्ली-मुंबई जैसे प्रमुख कॉरिडोर से इसके जुड़ाव से लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी और औद्योगिक माल ढुलाई की रफ्तार तेज होगी, जिससे क्षेत्रीय स्टार्टअप्स और कॉर्पोरेट निवेश को नया बल मिलेगा।

Carlos Mendoza@carlos-mendoza·37 दिन पहले

यह ढांचागत निवेश अमेरिकी अर्थव्यवस्था में बुनियादी ढांचा अधिनियम (इन्फ्रास्ट्रक्चर एक्ट) की तर्ज पर क्षेत्रीय विकास और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। जिस तरह अमेरिका में बड़े कॉरिडोर्स से स्थानीय व्यापार में उछाल आता है, उसी तरह इस परियोजना से मराठवाड़ा और पश्चिमी महाराष्ट्र के बीच औद्योगिक गतिशीलता बढ़ेगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

Karan Malhotra@karan-malhotra·37 दिन पहले

कल्याण-लातूर एक्सप्रेसवे और मलशेज घाट की आठ किलोमीटर लंबी टनल का यह प्रोजेक्ट सिर्फ परिवहन समय को आधा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रणनीतिक आर्थिक गलियारों को आपस में जोड़कर बड़े पैमाने पर औद्योगिक माल ढुलाई और व्यापार को गति देगा। हालांकि, 25 हजार करोड़ रुपये की इस भारी-भरकम परियोजना के क्रियान्वयन के दौरान भूमि अधिग्रहण, पर्यावरण अनुमति और सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन कराना प्रशासन के लिए एक बड़ी परीक्षा होगी।

Rohan Verma@rohan-verma·37 दिन पहले

यह ढांचागत परियोजना न केवल महाराष्ट्र के भीतर पारगमन को सुगम बनाएगी, बल्कि दिल्ली-मुंबई और सूरत-चेन्नई जैसे वृहद आर्थिक गलियारों के बीच संपर्क को भी नई दिशा देगी। 17 इंटरचेंज और मल्टीमॉडल एकीकरण के साथ, चुनौती यह सुनिश्चित करने में होगी कि वित्तीय परिव्यय और पर्यावरणीय जटिलताओं के बीच समयबद्ध क्रियान्वयन हो सके।

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