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कानपुर पुलिस कमिशनरेट में विवाहिता ने दी आत्मदाह की धमकी, ससुराल पक्ष पर तंत्र-मंत्र और दहेज उत्पीड़न का आरोपउत्तर प्रदेश
14 अग॰ 2026, 8:04 am (30 दिन पहले)· 5

कानपुर पुलिस कमिशनरेट में विवाहिता ने दी आत्मदाह की धमकी, ससुराल पक्ष पर तंत्र-मंत्र और दहेज उत्पीड़न का आरोप

कानपुर में एक विवाहिता ने ससुराल वालों पर एक किलो सोना मांगने और आधी रात को तंत्र-मंत्र में शामिल करने का आरोप लगाते हुए पुलिस कमिश्नर कार्यालय में आत्मदाह की चेतावनी दी। निष्पक्ष जांच के आश्वासन के बाद स्थिति शांत हुई।

उत्तर प्रदेश के कानपुर स्थित पुलिस कमिश्नर कार्यालय परिसर में गुरुवार को उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जब एक विवाहिता अपने पिता और भाई के साथ वहां पहुंची और सार्वजनिक रूप से आत्मदाह करने की चेतावनी देने लगी। महिला का गंभीर आरोप है कि विवाह के बाद से ही उसके ससुराल के लोग उसे शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं। पीड़िता ने अपने पति और ससुर सहित ससुराल पक्ष के अन्य सदस्यों पर भारी दहेज मांगने, मारपीट करने और घर में होने वाली कथित तंत्र-मंत्र की गतिविधियों में जबरन शामिल करने जैसे संगीन आरोप लगाए हैं। महिला का कहना है कि पूर्व में पुलिस में शिकायत दर्ज कराने और प्राथमिकी कायम होने के बावजूद आरोपियों के खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, जिससे आहत होकर उसे यह कदम उठाना पड़ा।

दहेज उत्पीड़न और तंत्र-मंत्र की गतिविधियों का आरोप

पीड़िता के पिता द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, उनकी बेटी का विवाह 16 मार्च 2024 को कानपुर के पांडु नगर निवासी एक राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले परिवार में हुआ था। पिता का दावा है कि उन्होंने शादी के दौरान अपनी हैसियत और सामर्थ्य के अनुसार पर्याप्त उपहार और धनराशि खर्च की थी। हालांकि, विवाह के कुछ ही समय बाद ससुराल पक्ष के लोगों का रवैया बदल गया और उन्होंने अतिरिक्त दहेज के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया।

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महिला के अनुसार, उसके पति और ससुर द्वारा उससे एक किलो सोना, महंगे फर्नीचर और एक अलग मकान की लगातार मांग की जा रही थी। जब उसने और उसके मायके वालों ने इन अनुचित मांगों को पूरा करने में असमर्थता जताई, तो उसके साथ मारपीट और गाली-गलौज की जाने लगी। आरोप है कि ससुराल वाले उसे मानसिक रूप से तोड़ने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाते थे।

इसके अलावा, महिला ने ससुराल में आधी रात को होने वाले कथित तंत्र-मंत्र के अनुष्ठानों को लेकर चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। महिला का दावा है कि घर के भीतर देर रात तंत्र-मंत्र से जुड़ी अजीबोगरीब गतिविधियां संचालित की जाती थीं और उसे भी इन क्रियाओं में बैठने तथा हिस्सा लेने के लिए विवश किया जाता था। जब उसने इन गतिविधियों में शामिल होने से स्पष्ट इनकार कर दिया और उनका विरोध किया, तो उसके साथ गंभीर मारपीट की गई। महिला ने आरोप लगाया कि विरोध करने पर उसके कपड़े फाड़ दिए गए, उसके साथ अभद्र व्यवहार किया गया और उसे कई घंटों तक एक कमरे में बंद रखा गया।

इंडोनेशिया यात्रा और जान से मारने के प्रयास का दावा

पीड़िता ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि उत्पीड़न का यह सिलसिला केवल घर तक ही सीमित नहीं रहा। उसके अनुसार, उसका पति उसे विदेश यात्रा पर इंडोनेशिया ले गया था, जहां भी उसे कथित रूप से तंत्र-मंत्र से जुड़ी गतिविधियों में शामिल करने का प्रयास किया गया और प्रताड़ित किया गया। विदेश से लौटने के बाद भी हालात में कोई सुधार नहीं हुआ।

महिला का दावा है कि 21 जनवरी 2025 को ससुराल में एक बार फिर तंत्र-मंत्र का अनुष्ठान शुरू किया गया। जब उसने इस पर कड़ी आपत्ति जताई, तो ससुराल वालों ने आपा खो दिया और उसे जान से मारने की धमकी दी। महिला ने आरोप लगाया है कि उस दौरान उसे छत के पंखे से लटकाकर उसकी हत्या करने की कोशिश भी की गई थी। किसी तरह अपनी जान बचाकर उसने इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी अपने मायके वालों को दी।

मार्च 2026 की एफआईआर और पुलिस जांच पर सवाल

लगातार बढ़ रहे अत्याचारों और जान के खतरे को देखते हुए पीड़िता के परिवार ने कानूनी रास्ता अपनाने का फैसला किया। इसके बाद 29 मार्च 2026 को कानपुर के महिला थाने में पति, ससुर और अन्य ससुराल जनों के खिलाफ संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराई गई। मामले की विस्तृत जांच पनकी थाने में तैनात इंस्पेक्टर दिनेश सिंह बिष्ट को सौंपी गई।

हालांकि, एफआईआर दर्ज होने के कई महीने बीत जाने के बाद भी पुलिस कार्रवाई की गति अत्यंत धीमी रही। पीड़िता का आरोप है कि नामजद एफआईआर के बावजूद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ ठोस कदम नहीं उठाए और न ही उन्हें गिरफ्तार किया गया। पुलिस की इस शिथिल कार्यशैली से असंतुलित होकर महिला को न्याय पाने के लिए उच्च अधिकारियों के द्वार पर दस्तक देनी पड़ी।

कमिशनरेट परिसर में पुलिस बल की तैनाती और पुलिस कमिश्नर का आश्वासन

गुरुवार को जब महिला अपने परिजनों के साथ पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंची और आत्मदाह करने का प्रयास किया, तो वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों और अधिकारियों में हड़कंप मच गया। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए तत्काल सचेंडी, कोतवाली और महिला थाना समेत कई आसपास के थानों की पुलिस मौके पर बुला ली गई। महिला पुलिसकर्मियों ने पीड़िता को शांत कराने और समझाकर घर भेजने का प्रयास किया, लेकिन महिला पुलिस कमिश्नर से सीधे मुलाकात कर अपनी बात रखने पर अड़ी रही।

काफी मशक्कत के बाद अधिकारियों ने महिला और उसके पिता को पुलिस कमिश्नर के समक्ष प्रस्तुत किया। पुलिस कमिश्नर ने पीड़िता की पूरी आपबीती सुनी, उसके द्वारा दिए गए प्रार्थना पत्र और पूर्व में दर्ज एफआईआर के दस्तावेजों का अवलोकन किया। पुलिस कमिश्नर ने महिला को भरोसा दिलाया कि मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाएगी तथा साक्ष्यों के आधार पर दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

अधिकारियों के ठोस आश्वासन के बाद महिला ने फिलहाल अपना प्रदर्शन समाप्त कर दिया। हालांकि, उसने चेतावनी दी है कि यदि पुलिस प्रशासन ने निष्पक्ष जांच कर उसे न्याय नहीं दिलाया, तो वह राज्य के मुख्यमंत्री कार्यालय के बाहर जाकर आत्मदाह करेगी। फिलहाल पुलिस मामले में दर्ज एफआईआर, साक्ष्यों और बयानों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी कर रही है।

सवाल-जवाब

कानपुर में महिला ने पुलिस कमिशनरेट में क्या कदम उठाया?
महिला अपने पिता और भाई के साथ पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंची और ससुराल वालों पर कार्रवाई न होने के विरोध में आत्मदाह की चेतावनी दी।
पीड़िता ने ससुराल पक्ष पर क्या प्रमुख आरोप लगाए हैं?
पीड़िता ने एक किलो सोना, महंगे फर्नीचर और मकान की मांग, शारीरिक मारपीट, और आधी रात को तंत्र-मंत्र की गतिविधियों में जबरन शामिल करने का आरोप लगाया है।
इस मामले में एफआईआर कब और कहां दर्ज कराई गई थी?
मामले में 29 मार्च 2026 को कानपुर के महिला थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई थी, जिसकी जांच पनकी इंस्पेक्टर दिनेश सिंह बिष्ट को सौंपी गई थी।
पुलिस कमिश्नर से मुलाकात के बाद क्या आश्वासन मिला?
पुलिस कमिश्नर ने महिला की शिकायत सुनकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने और नियमानुसार कानूनी कार्रवाई करने का आश्वासन दिया।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Laxmi Gupta@laxmi-gupta·29 दिन पहले

अंक ज्योतिषीय दृष्टिकोण से, 16 मार्च 2024 को हुआ यह विवाह और 21 जनवरी 2025 की घटनाएँ अत्यधिक नकारात्मक ऊर्जा और संघर्ष के अंकों का प्रभाव दर्शाती हैं। जब पारिवारिक रिश्तों में भौतिक लालच और मनोवैज्ञानिक दबाव अपनी सीमा लांघते हैं, तो अंकों का असंतुलन ऐसे गहरे मानसिक और शारीरिक संकट को जन्म देता है। इस मामले में कानूनी हस्तक्षेप के साथ-साथ मानसिक और आध्यात्मिक उपचार की भी अत्यंत आवश्यकता है, अन्यथा घरेलू कलह और मानसिक प्रताड़ना के ये गंभीर मामले और अधिक विस्फोटक रूप ले सकते हैं।

Ravikash Gupta@ravikash·29 दिन पहले

कानपुर की इस घटना में दहेज और अंधविश्वास के मामलों के बीच एक चिंताजनक कॉर्पोरेट व सामाजिक प्रवृत्ति उभरती है। राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले परिवार और विदेश यात्रा के इन आरोपों से यह स्पष्ट होता है कि महिलाओं के विरुद्ध हिंसा और जबरन तंत्र-मंत्र जैसी कुप्रथाएं केवल पारंपरिक समाजों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आधुनिक और प्रभावशाली तबकों में भी गहरी जड़ें जमा चुकी हैं। पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल और प्रशासनिक लापरवाही इस बात की ओर इशारा करती हैं कि न्याय प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और त्वरित बनाना होगा, अन्यथा ऐसे मामलों में पीड़ित पक्ष को चरम कदम उठाने के लिए विवश होना पड़ेगा।

Arjun Mehta@arjun-mehta·29 दिन पहले

रविकेश गुप्ता के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए यह रेखांकित करना आवश्यक है कि राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले प्रभावशाली परिवारों से जुड़े मामलों में पुलिस की शुरुआती उदासीनता आपराधिक न्याय प्रणाली में गहरी असमानता को दर्शाती है। यदि प्राथमिकियों के बावजूद त्वरित और निष्पक्ष कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित नहीं की गई, तो यह प्रशासनिक विफलता महिलाओं के प्रति अपराधों में राजनीतिक संरक्षण के आरोपों को और पुख्ता करेगी, जिससे शासन व्यवस्था पर जनता का विश्वास डगमगाएगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·29 दिन पहले

कानपुर पुलिस कमिश्नर कार्यालय के बाहर आत्मदाह की चेतावनी यह दर्शाती है कि स्थानीय स्तर पर मामलों की सुनवाई में पीड़ित पक्ष को किस हद तक निराशा मिलती है। एक किलो सोने की मांग और इंडोनेशिया तक तंत्र-मंत्र के गंभीर आरोपों से जुड़े इस मामले में, राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले परिवार के खिलाफ पुलिस की शुरुआती सुस्ती जांच की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करती है। यदि उच्चाधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद भी आरोपियों पर सख्त कानूनी शिकंजा नहीं कसा गया, तो यह कानून-व्यवस्था और त्वरित न्याय व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न होगा।

Rohan Verma@rohan-verma·29 दिन पहले

कानपुर कमिश्नरेट में राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले परिवार पर लगे इन गंभीर आरोपों से यह स्पष्ट होता है कि जमीनी स्तर पर पुलिसिया लापरवाही किस प्रकार पीड़ितों को आत्मदाह जैसे चरम कदम उठाने पर मजबूर कर देती है। यदि प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद आरोपियों पर त्वरित कार्रवाई नहीं होती है, तो यह प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। इस प्रकरण में उच्चाधिकारियों द्वारा निष्पक्ष जांच का आश्वासन तो दे दिया गया है, लेकिन यदि पुलिस अब भी राजनीतिक प्रभाव के चलते ढिलाई बरतती है, तो यह कानून-व्यवस्था के इकबाल पर एक बड़ा धब्बा होगा और इससे जनता का तंत्र से विश्वास तेजी से उठेगा।

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