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करीब 380 गिरफ्तार, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया पुलिस थानों के आसपास दलालों पर बड़ा शिकंजाअसम
8 सित॰ 2026, 12:24 pm (23 दिन पहले)· 2

करीब 380 गिरफ्तार, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया पुलिस थानों के आसपास दलालों पर बड़ा शिकंजा

असम में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया कि पुलिस थानों के आसपास सक्रिय करीब 380 दलालों को हाल के राज्यव्यापी अभियान में गिरफ्तार किया गया है, अब यह कार्रवाई दूसरे सरकारी विभागों तक बढ़ाई जाएगी।

असम पुलिस ने पुलिस थानों के आसपास दलाली करने के आरोप में करीब 380 लोगों को गिरफ्तार किया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोमवार को गुवाहाटी में प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस राज्यव्यापी अभियान की जानकारी दी। यह अभियान उन लोगों के खिलाफ बड़ी मुहिम का हिस्सा है जो सरकारी काम कराने का वादा कर आम लोगों से पैसे वसूलते हैं।

कैसे हुई पहचान

सरमा ने बताया कि सरकार ने पिछले कई महीनों से चुपचाप संदिग्ध दलालों और ठगों की जानकारी इकट्ठा की थी। इसके लिए सोशल मीडिया और मीडिया में आई खबरों का सहारा लिया गया, जबकि थाना प्रभारियों को जानबूझकर इस पूरी प्रक्रिया से दूर रखा गया ताकि गोपनीयता बनी रहे। मुख्यमंत्री ने कहा, “सत्यापन के बाद हमने करीब 410 ‘दलाल या बिचौलियों’ की पहचान की। इनमें से करीब 380 को गिरफ्तार किया जा चुका है।”

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गिरफ्तार लोगों पर पुलिसकर्मी बनकर लोगों को धोखा देने और थानों में सरकारी काम कराने आए लोगों से पैसे ऐंठने जैसी धोखाधड़ी के आरोप हैं।

2022 में भी चला था ऐसा अभियान

असम में यह पहला मौका नहीं है जब दलालों के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई हुई हो। सरमा ने याद दिलाया कि 2022 में भी पुलिस थानों के आसपास सक्रिय दलालों के खिलाफ एक ऐसा ही अभियान चलाया गया था, जिसमें करीब 200 लोग गिरफ्तार हुए थे। उनके मुताबिक अगले दो साल में यह गोरखधंधा कमजोर पड़ गया था, लेकिन पिछले विधानसभा चुनाव से करीब एक साल पहले फिर से सिर उठाने लगा, जिसके बाद सरकार ने नए सिरे से जानकारी जुटाकर यह दूसरा और बड़ा अभियान शुरू किया। सरमा के मुताबिक यह पैटर्न बताता है कि जनता का ध्यान हटते ही ऐसे गिरोह फिर सक्रिय हो सकते हैं, यही वजह है कि सरकार ने पहले से एलान करने के बजाय चुपचाप सबूत जुटाने का रास्ता चुना।

यह तेज अभियान शनिवार सुबह शुरू हुआ। गृह विभाग भी संभाल रहे सरमा ने हाल ही में संपन्न हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के दो दिवसीय सम्मेलन के दौरान इसके लिए खास निर्देश दिए थे।

अब दूसरे विभागों पर नजर, जनता से मांगी मदद

सरमा ने कहा कि यह कार्रवाई सिर्फ पुलिस थानों तक सीमित नहीं रहेगी। सरकारी काम कराने के नाम पर लोगों से पैसे वसूलने वाले दलालों को खत्म करने के लिए दूसरे सरकारी विभागों में भी ऐसी ही कवायद चल रही है और आने वाले दिनों में और अभियान चलाए जाएंगे।

उन्होंने यह भी बताया कि असम पुलिस की स्पेशल ब्रांच एक पोर्टल तैयार करेगी, जिसके जरिए आम लोग संदिग्ध दलालों की जानकारी और नाम भेज सकेंगे। उन्होंने साफ किया कि ऐसी सूचनाओं पर कार्रवाई सत्यापन के बाद ही होगी। सरमा ने कहा, “जाहिर है, कार्रवाई सत्यापन के बाद ही की जाएगी।”

सवाल-जवाब

कितने लोग गिरफ्तार हुए हैं?
करीब 380 लोगों को अब तक गिरफ्तार किया गया है, जबकि सत्यापन के बाद करीब 410 संदिग्ध दलालों की पहचान की गई थी।
यह अभियान कब शुरू हुआ?
तेज अभियान शनिवार सुबह शुरू हुआ, और इसकी जानकारी मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोमवार को गुवाहाटी में दी।
क्या पहले भी ऐसा अभियान चला था?
हां, 2022 में भी पुलिस थानों के आसपास दलालों के खिलाफ ऐसा ही अभियान चला था, जिसमें करीब 200 लोग गिरफ्तार हुए थे।
दलालों की पहचान कैसे की गई?
सरकार ने सोशल मीडिया और मीडिया रिपोर्टों के आधार पर कई महीनों तक जानकारी जुटाई, और थाना प्रभारियों को इस प्रक्रिया से दूर रखा गया।
क्या यह अभियान सिर्फ पुलिस थानों तक सीमित है?
नहीं, सरकार अब दूसरे सरकारी विभागों में भी दलालों की पहचान के लिए ऐसी ही कवायद कर रही है।
आम लोग दलालों की शिकायत कैसे कर सकेंगे?
असम पुलिस की स्पेशल ब्रांच एक पोर्टल तैयार करेगी, जिस पर लोग संदिग्ध दलालों के नाम और जानकारी भेज सकेंगे।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·22 दिन पहले

असम सरकार की यह कार्रवाई प्रशासनिक सुधार और भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ा कदम है। पुलिस थानों को स्थानीय दलालों से मुक्त कराने के लिए स्थानीय थाना प्रभारियों को सूचना संकलन से बाहर रखना एक प्रभावी रणनीतिक फैसला था, जिससे गोपनीयता सुनिश्चित हुई। अब इस अभियान का दायरा अन्य सरकारी विभागों तक बढ़ाना और जनता की सहभागिता के लिए पोर्टल लॉन्च करना यह तय करेगा कि बिचौलिया संस्कृति पर दीर्घकालिक और स्थायी अंकुश लगे।

Ravikash Gupta@ravikash·22 दिन पहले

असम में पुलिस थानों के बाद अन्य सरकारी विभागों तक इस अभियान के विस्तार का निर्णय प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने की दिशा में एक अहम मोड़ है। विशेष शाखा द्वारा एक समर्पित पोर्टल का निर्माण यह सुनिश्चित करेगा कि नागरिकों की सीधी भागीदारी से बिचौलियों पर डिजिटल निगरानी रखी जा सके। यदि यह मॉडल सफल होता है, तो इससे केवल आम जनता का सरकारी दफ्तरों में विश्वास ही नहीं बढ़ेगा, बल्कि निचले स्तर की वित्तीय और प्रशासनिक व्यवस्था में अनधिकृत लेन-देन पर भी प्रभावी और स्थायी अंकुश लगेगा।

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