कर्नाटक के पिरियापटना में आयोजित 'प्रजा सेवा' जनसंपर्क कार्यक्रम के दौरान शनिवार को एक अनोखा और गंभीर सामाजिक मामला सामने आया। मंच पर पहुंचे एक स्थानीय किसान ने राज्य के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के सामने ग्रामीण नौजवानों के विवाह से जुड़ा संकट उठाया। किसान ने सरकार से मांग रखी कि राज्य प्रशासन को अविवाहित पुरुषों, विशेषकर खेती करने वाले युवाओं के लिए जीवनसंगिनी तलाशने में सहायता करने वाली एक विशेष कल्याणकारी योजना तैयार करनी चाहिए। किसान के अनुसार, ग्रामीण अंचलों में 35 से 40 वर्ष की आयु सीमा पार कर रहे कई पुरुष आज भी अकेले रहने को विवश हैं और इस सामाजिक एकाकीपन व घोर हताशा के चलते कुछ लोग आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम तक उठा रहे हैं।
जमीन और पक्के मकान होने के बावजूद नहीं मिल रही दुल्हन
अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए किसान ने विस्तार से बताया कि खेती-किसानी करने वाले कई युवकों के पास अपनी खुद की उपजाऊ जमीन और रहने के लिए अच्छे पक्के मकान मौजूद हैं। उन्होंने अपनी गृहस्थी बसाने के लिए पर्याप्त धन भी खर्च किया है, लेकिन इसके बावजूद समाज में कोई भी माता-पिता अपनी बेटियों का विवाह किसान परिवारों में करने को तैयार नहीं दिखते। इस सामाजिक बेरुखी के चलते लड़के उम्रदराज हो रहे हैं और मानसिक तनाव व अवसाद के गहरे भंवर में फंस रहे हैं। किसान ने इस समस्या को किसी एक व्यक्ति या गांव तक सीमित न बताते हुए इसे संपूर्ण राज्य का व्यापक सामाजिक संकट करार दिया।
मुख्यमंत्री की शुरुआती प्रतिक्रिया और किसान की मार्मिक गुहार
किसान की इस अप्रत्याशित मांग को सुनकर मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार शुरू में हैरान रह गए और हंसते हुए पूछा कि आखिर क्या बात है और क्या हुआ है। इसके बाद किसान ने पूरे विस्तार से जमीनी हकीकत रखी और बताया कि किस तरह हताश होकर लोग अपनी जान दे रहे हैं। अपनी पीड़ा साझा करते हुए किसान ने मुख्यमंत्री से कहा,
"35 से 40 साल की आयु के कई पुरुष अभी भी अविवाहित हैं। बेचारे आत्महत्या कर रहे हैं। वे जीवन से निराश हो चुके हैं। उन्हें शादी करने के लिए महिलाओं की जरूरत है। महोदय, कृपया। बेचारे लोग आत्महत्या कर रहे हैं। कृपया, कुछ तो करना ही होगा।"
लाखों ग्रामीण युवाओं के भविष्य से जुड़ा मुद्दा
किसान ने मंच से दृढ़तापूर्वक कहा कि अगर सरकार इस दिशा में कोई ठोस कदम उठाती है या कोई व्यवस्थित संस्थागत पहल करती है, तो इससे कर्नाटक के लाखों युवकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आ सकता है। उन्होंने यह बुनियादी सवाल भी उठाया कि जो किसान पूरे समाज के लिए अन्न उपजाते हैं और सबका पेट भरते हैं, अगर लोग अपनी बेटियों का विवाह उन्हीं के घरों में करने से कतराएंगे, तो ग्रामीण व्यवस्था कैसे आगे बढ़ेगी। किसान ने हाथ जोड़कर मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि इस गंभीर स्थिति का संज्ञान लेते हुए राज्य भर के अविवाहित अन्नदाताओं के लिए कोई ठोस व्यवस्था बनाई जाए।















