टेलीविजन धारावाहिक अनुपमा की कहानी में भावुक पलों और पुराने दिनों की यादों ने घर के माहौल को पूरी तरह बदल दिया। परिवार के सभी सदस्य एक जगह बैठकर उन बीते लम्हों को याद करते दिखे जो कभी अनुज और अनुपमा के अटूट रिश्ते की पहचान हुआ करते थे। इन पुरानी बातों को सुनकर घर का हर सदस्य भावुक हो उठा और सबकी आंखों में आंसू छलक आए। बच्चों के मन में भी इस प्रेम कहानी की पूरी दास्तान जानने की उत्सुकता देखने को मिली।
शाह परिवार के सामने राही ने की प्रेम कहानी की शुरुआत
दिन की शुरुआत में राही ने सबके सामने इस बात को रखा कि अनुपमा और अनुज का रिश्ता बेहद निस्वार्थ और सच्चा था। राही की इस बात पर हसमुख समेत शाह परिवार के तमाम सदस्यों ने पूरी सहमति जताई। इस चर्चा के बाद अनुपमा अपनी और अनुज की पहली मुलाकात की स्मृतियों में खो गई। माहौल को हल्का करते हुए लीला ने मजाक भरे लहजे में यह भी कह दिया कि अनुपमा पहले हमेशा अनुज के बारे में ही बातें करती रहती थी। अनुपमा ने भी माना कि अनुज की शख्सियत उनके लिए किसी ख्वाबों के राजकुमार जैसी थी।
जन्माष्टमी की वह घटना और टिफिन का हलवा
परी और अंश ने जब इस सफर के बारे में विस्तार से जानने की जिद की, तो अनुपमा ने कई खास वाकयों का जिक्र किया। उन्होंने याद दिलाया कि किस तरह जन्माष्टमी के मौके पर अनुज ने समर की जान बचाई थी और उसी दिन अनुज का जन्मदिन भी मनाया गया था। अनुपमा ने यह भी बताया कि अनुज एक बेहद कामयाब और बड़े कारोबारी थे, लेकिन उनके भीतर जरा भी अहंकार नहीं था। वे अनुपमा के हाथ से बने टिफिन के हलवे को अपने वर्किंग टेबल पर बड़ी हिफाजत से रखते थे। इसके अलावा जब अनुपमा अपनी डांस एकेडमी चला रही थीं, तब अनुज पहली बार वहां पहुंचे थे और दोनों के बीच परस्पर आदर और सच्चे प्रेम की नींव मजबूत हुई थी।
हौसला, बराबरी और जीवन में आगे बढ़ने का सबक
सफर के संघर्षों को याद करते हुए अनुपमा की आंखें भर आईं। उन्होंने बताया कि किस तरह उन्होंने जीवन में पहली बार मुंबई जाने के लिए फ्लाइट अनुज के साथ ही ली थी। एक दौर ऐसा भी था जब आसपास के लोग उन्हें हारा हुआ समझ रहे थे और शाह हाउस में उनके साथ नौकरानी जैसा बर्ताव किया जाता था। ऐसे मुश्किल वक्त में अनुज ने उन्हें न सिर्फ बराबरी का दर्जा दिया बल्कि अपने पैरों पर खड़े होकर आगे बढ़ना भी सिखाया। इस पूरी दास्तान को सुनने के बाद प्रेम इतना प्रभावित हुआ कि उसने अनुपमा से इस प्रेम कहानी पर एक पूरी किताब लिखने का सुझाव दे दिया।
मंदिर में पूजा और सावी की तस्वीर से खुला राज
आने वाले पलों का मोड़ कहानी को एक नए ड्रामे की तरफ ले जाता है। अनुपमा और दिग्विजय सावी के जन्मदिन के सिलसिले में विशेष पूजा कराने मंदिर पहुंचते हैं। वहां पहुंचने पर मंदिर के पंडित जी जानकारी देते हैं कि भीतर पहले से ही कोई पूजा में बैठा हुआ है। जैसे ही अनुपमा मंदिर प्रांगण में प्रवेश करती हैं, उनकी नजर वहां रखी सावी की तस्वीर पर पड़ती है, जिसे देखकर वे हैरान रह जाती हैं। इसी दौरान वहां आरवी को देखकर यह सच्चाई खुलकर सामने आती है कि आरवी वास्तव में दिग्विजय का बेटा है। इस अप्रत्याशित सच के सामने आते ही दिग्विजय, राही और प्रेम पूरी तरह सन्न रह जाते हैं।



















